Sharad Pawar Interview: शरद पवार ने डाला राहुल के रंग में भंग
वरिष्ठ राजनेता और विपक्ष में सबसे अनुभवी शरद पवार ने अडानी समूह के विरोध में राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे दुष्प्रचार को राष्ट्र विरोधी बताकर पूरे मुद्दे की हवा निकाल दी है।

Sharad Pawar Interview: कुछ दिन से ऐसा लग रहा था कि सभी विपक्षी दल राहुल गांधी के पीछे खड़े हो गए हैं| खासकर जब उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म हुई, तो तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी ,भारत राष्ट्र समिति और समाजवादी पार्टी भी उनके पीछे खड़ी दिखाई देने लगी थीं| ये चारों दल वे हैं, जो गैर कांग्रेस, गैर भाजपा की लाईन अपना रहे थे| अभी राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता का अंतिम फैसला नहीं हुआ है कि उनकी सदस्यता बहाल होगी या नहीं| हालांकि ज्यादा संभावना यह है कि सैशन कोर्ट में 13 अप्रेल की सुनवाई के बाद उनके पक्ष में फैसला हो जाएगा| लेकिन 15 दिन की विपक्षी एकता में दरार पड़ने लगी है|

दरार का कारण भी वही राहुल गांधी हैं, जिनकी वजह से विपक्षी एकता होती दिख रही थी| कारण है राहुल का बड़बोलापन। राहुल गांधी को उनकी हद बताने के लिए महाराष्ट्र ने लीड ली है। पहले उद्धव ठाकरे सामने आए थे और अब शरद पवार सामने आए हैं| उद्धव ठाकरे ने जब वीर सावरकर के मुद्दे पर स्टैंड लिया था, तब भी शरद पवार ने उद्धव का समर्थन किया था| राहुल गांधी ने कान पकड़ कर वीर सावरकर पर अपनी गलती मान ली थी और भविष्य में सावरकर पर गलत टिप्पणी न करने का आश्वासन दिया था।
आप याद करिए भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के दो बड़े मुद्दे क्या थे| अडानी और सावरकर, यही दो मुद्दे थे, इन दो मुद्दों के अलावा वह कुछ नहीं बोले| भारत जोड़ो यात्रा के बाद उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने सावरकर पर राहुल गांधी की जुबान बंद करवा दी। अब शरद पवार ने अडानी के मुद्दे पर भी राहुल गांधी को घेर लिया है| उन्होंने अडानी के मालिकाना हक वाले एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा है कि कुछ स्वार्थी तत्व पर्दे के पीछे से गौतम अडानी को टार्गेट कर रहे हैं|
उनके कहने का मतलब यह है कि कुछ लोग पर्दे के पीछे से राहुल गांधी का इस्तेमाल कर रहे हैं| उनका यह नया स्टैंड राहुल गांधी के खिलाफ तो है ही| लेकिन सिर्फ राहुल गांधी के खिलाफ नहीं है, बल्कि अडानी को लेकर समूचे विपक्ष की जेपीसी गठित करने की मांग के खिलाफ भी है| मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठकों में अडानी ग्रुप की जेपीसी से जांच की मांग करने के मुद्दे पर ही तो विपक्षी एकता हुई थी|
सारा बजट सत्र जेपीसी की मांग के हंगामें में बीत गया| लेकिन सत्र खत्म होते ही शरद पवार ने जेपीसी की मांग से किनारा कर लिया| अलबत्ता इस बेकार के मुद्दे पर संसद का सत्र बर्बाद करने के खिलाफ स्टैंड ले लिया| उनके इस स्टैंड से अब अडानी को लेकर हुई विपक्षी एकता तार तार हो गई| यानी विपक्षी दलों की बैठकों में भी जेपीसी को लेकर एक राय नहीं थी, जैसा कि मीडिया में बताया जा रहा था| क्योंकि शरद पवार ने यह भी कहा है कि वह शुरू से ही जेपीसी की मांग के खिलाफ थे|
शरद पवार ने अडानी के मुद्दे पर जेपीसी की मांग से खुद को अलग करके राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दोनों मुद्दों की हवा निकाल दी है| इतना ही नहीं उन्होंने बिना हिंडनबर्ग का नाम लिए यहाँ तक कहा कि ये कौन लोग हैं, हमने तो कभी उसका नाम नहीं सुना था| उनकी कीमत पर देश की अर्थव्यवस्था को कीमत चुकानी पड़ती है| हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से अडानी ग्रुप के शेयर गिर गए थे, और सात अप्रेल तक उन्हें 9 लाख 11 हजार 272 करोड़ का नुकसान हुआ| शरद पवार ने कहा है कि जानबूझकर किसी साजिश के तहत अडानी ग्रुप को निशाना बनाया गया और राहुल गांधी ने इस मुद्दे को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया|
शरद पवार ने जैसे ही अडानी के मुद्दे पर विपक्षी एकता की हवा निकाली, कांग्रेस बिलबिला उठी है। क्योंकि अब यहीं से राहुल गांधी के नेता बनने की कोशिशों पर पानी पड़ना शुरू होगा| राहुल गांधी ने जैसे 2019 का चुनाव राफेल के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी को चोर कह कर लड़ा था, उसी तरह वह इस बार अडानी मुद्दे पर एक नेरेटिव बना रहे थे|
पांच अप्रेल के अपने लेख में मैंने उन चार नेरेटिव का जिक्र किया था, जिनको मुद्दा बना कर विपक्ष नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की रणनीति बना रहा है| उनमें से एक मुद्दा अडानी का भी था, जिस पर विपक्षी एकता ही तार तार नहीं हुई है, बल्कि शरद पवार ने बिना कहे यह भी कह दिया है कि राहुल गांधी किन्हीं अज्ञात विदेशी ताकतों के हाथ में खेल रहे हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था को चौपट करना चाहते हैं| शरद पवार के इस आरोप से भाजपा के उन आरोपों की पुष्टि होती है कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के साथ मिल कर देश को अस्थिर करना चाहते हैं|
अडानी के मुद्दे पर एक स्ट्रांग स्टैंड लेकर शरद पवार ने देश को यह भी बताया है कि राहुल गांधी इतने परिपक्व नेता नहीं बने हैं कि उनके हाथ में देश की बागडोर सौंपी जा सकती है| कांग्रेस समझ रही है कि शरद पवार ने कहाँ चोट की है, इसलिए वह बिलबिला उठी है। जयराम रमेश ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा है कि शरद पवार की अपनी राय हो सकती है, लेकिन 19 विपक्षी दल आश्वस्त हैं कि मोदी और अडानी समूह का मुद्दा वास्तविक और बहुत गंभीर है|
शरद पवार के नए स्टैंड से सिर्फ विपक्षी एकता तार तार नहीं हुई है, बल्कि विपक्षी दलों के भीतर भी खलबली मच गई है, और उन्होंने एक दूसरे पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया है| अब यह अलग बात है कि जिस एनडीटीवी चैनल को शरद पवार ने इंटरव्यू दिया वह अब अडानी का हो चुका है। लेकिन शरद पवार जैसा नेता एनडीटीवी पर कुछ कहे या किसी और चैनल पर, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता|
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यह बात मैं इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि अडानी का चैनल अडानी के मित्र का इंटरव्यू कर रहा है, जो हमें बता रहा है कि अडानी को कैसे टार्गेट किया जा रहा है| यानी शरद पवार ने विपक्षी दलों में इतनी खलबली मचा दी है कि मोदी के बाद अब शरद पवार को भी अडानी का मित्र बता दिया गया है| हालांकि अब महुआ मोईत्रा का तृणमूल कांग्रेस में क्या होगा यह अभी नहीं कहा जा सकता नहीं क्योंकि ममता बनर्जी भी अडानी के मुद्दे पर कांग्रेस से सहमत नहीं है|
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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