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Right to Employment: वोट का अधिकार है तो रोजगार का क्यों नहीं?

Right to Employment: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की अप्रैल, 2023 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जनसंख्या 1,428.6 मिलियन यानी 142.86 करोड़ तक पहुंच गई है। इन आंकड़ों के मुताबिक भारत 15 से 20 आयु वर्ग में 25.4 करोड़ आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा युवा देश बन गया है। युवा होने का मतलब है कि उसके लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों की उपलब्धता होनी चाहिए। यह काम देश के नीति निर्माता करते हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि हमारे देश के राजनेताओं के एजेंडे में युवा सिर्फ वोट देने का ही अधिकार रखते हैं। उनको अभी तक रोजगार पाने का अधिकार नहीं मिला है।

हमारी जनसंख्या का बड़ा हिस्सा 35 वर्ष के कम आयु वर्ग का है। इस तरह भारत के पास डेमोग्राफिक डिविडेंड है। इतनी बड़ी युवा शक्ति और डेमोग्राफिक डिविडेंड किसी भी देश के लिए फायदेमंद बात हो सकती है यदि उसका सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल किया जाए। लेकिन हमारे नेताओं और सरकारों ने इस डिविडेंड को डिजास्टर बना दिया है। अगर युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोज़गार, मूल्य और कौशल न मिले तो जिस आबादी के सहारे भारत आर्थिक महाशक्ति बन सकता था, वही हमारे लिए बोझ बन जाएगी। किसी देश के लिए इससे बड़ा संकट क्या हो सकता है?

Right to Employment: If there is a right to vote then why not to employment?

हम आज उसी संकट के दौर से गुज़र रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा बन चुकी बेरोज़गारी जीवन मरण का सवाल बन गया है। यह संकट दिन प्रतिदिन गहरा होता जा रहा है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि यह चिंताजनक स्थिति हमारे केंद्रीय विमर्श से गायब है। युवाओं की पीड़ा और देश के भविष्य से जुड़ा यह मामला किसी बहस में नहीं है। जिस देश में प्याज की महंगाई जैसे मुद्दे पर कभी सरकारें गिर जाती थीं आज वहां बेरोजगारी की ऐसी स्थिति पर भी मुर्दा शांति बनी हुई है।

देश का युवा 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद लोकसभा, विधानसभा, पंचायत आदि चुनावों में मतदान करने का अधिकारी हो जाता है। लेकिन 25 की उम्र तक पहुंचने और ऊंची से ऊंची शिक्षा लेने के बाद रोजगार के लिए वह दर-दर भटकता रहता है। कुछ राजनीतिक दल चुनाव के समय उन्हें रोजगार नहीं तो बेरोजगारी भत्ता देने का वादा करते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद युवाओं से किया गया वादा सिर्फ वादा ही रह जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब 18 वर्ष की उम्र में एक युवा अपना जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार पा लेता है तो उसको रोजगार का अधिकार क्यों नहीं मिल रहा है?

इस मांग को लेकर कुछ युवा शिक्षकों और छात्रों ने एक अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम "एक वोट, एक रोजगार" है। इस अभियान की मांग है कि जब एक युवा को 18 वर्ष पूरा करने पर मतदान का अधिकार मिल जाता है, तो उसे रोजगार का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए? उनकी नजर में रोजगार सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं है। बल्कि हर सरकारी और गैर सरकारी नौकरी के साथ सामाजिक सुरक्षा होनी चाहिए।

भारत में इस समय युवाओं की आबादी सबसे ज्यादा है। इस तरह भारत युवा देश है। युवाओं की आंखों में भविष्य का सपना, दिल में एक आदर्श समाज के निर्माण का सपना और व्यक्तित्व ऊर्जा से भरपूर होता है। लेकिन उनके समक्ष संसाधनों का अभाव है, जिसके कारण वह कुछ बेहतर कर पाने की जगह या तो निष्क्रिय होकर बैठ जाते हैं और फिर युवाओं की बड़ी संख्या समाज और देश के लिए अनुत्पादक हो जाता है।

सरकारी क्षेत्र में जो नौकरियां हैं उन पर बड़ी संख्या में संविदा पर भर्ती की जा रही है, इन पदों पर कार्य करने वाले संविदा कर्मियों को कई साल की नौकरी के बाद अचानक हटा दिया जाता है। कई बार बेरोजगारी की दशा में विस्थापित हुआ यह कर्मी आत्महत्या तक कर लेता है, इसलिए संविदा पर नियुक्तियां बंद हो और जो लोग वहां कार्य कर रहे हैं, उन्हें वहीं स्थायी किया जाए और देश में जितने भी सरकारी पद हैं उन पर तत्काल स्थायी नियुक्ति की जाए।

आज यदि युवाओं को काम मिल भी रहा है तो सरकार की तरफ़ से तय न्यूनतम मज़दूरी किसी दफ़्तर या फ़ैक्ट्री में नहीं मिल रही। आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (AI) ने अब उच्चतम शिक्षा प्राप्त नौजवानों के भविष्य को भी अंधेरे में डाल दिया है। बेरोजगार नागरिकों का इस्तेमाल कोई भी विघटनकारी शक्ति कर सकती है जो घातक हो सकता है।

यहां एक तथ्य यह भी है कि नौजवान को काम चाहिए होता है ताकि वह अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सके। अगर ऐसा नहीं होता तो वह अवसाद, नशा और अपराध की तरफ बढ जाता है। एन.सी.आर.बी. के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष करीब पच्चीस हज़ार पढ़े लिखे नौजवानों ने नौकरी नहीं मिलने या नौकरी छिन जाने की स्थिति में आत्महत्या कर लिया। इसी तरह पढ़ा-लिखा युवक काम न मिल पाने की वजह से समाज एवं राष्ट्रविरोधी तत्वों के झांसे में आसानी से फंस जाते हैं।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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