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Jammu Kashmir: बदले हुए जम्मू कश्मीर में बदल गयी राजनीति

Jammu Kashmir:धारा 370 हटने के बाद बीते साल भर में शुक्रवार को यह प्रधानमंत्री मोदी का दूसरा जम्मू कश्मीर दौरा था जिसमें उन्होंने राज्य में जल्द विधानसभा चुनाव करवाने का भरोसा दिया है। इससे पहले मार्च 2023 में मोदी जब जम्मू कश्मीर आये थे तब दिल जीतने का दावा किया था।

उस समय मोदी ने कहा था "2014 में मैंने आप लोगों का दिल जीतने का सपना देखा था। आज मैं फिर आपके बीच आया हूं तो मुझे लग रहा है कि मैं आपका दिल जीतने के काबिल बन चुका हूंं।" तब मोदी ने यह भी कहा था कि "जल्द फिर आऊंगा"। उसके बाद दूसरी बार शुक्रवार को मोदी जम्मू पहुंचे जहां उधमपुर से लगातार तीसरी बार सांसद बनने के लिए चुनाव लड़ रहे जीतेन्द्र सिंह के लिए रैली को संबोधित किया।

Jammu Kashmir

जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने से पहले 6 लोकसभा सीटें थीं, अब बदली हुई परिस्थितियों में जम्मू कश्मीर में पांच और एक लद्दाख में चली गई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को जम्मू के अलावा इस बार कश्मीर से भी उम्मीदें है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से महबूबा और अब्दुल्ला परिवार से मुक्ति पाने का आव्हान किया।

मोदी ने जम्मू कश्मीर की जनता को चेताया कि विकसित भारत के लिए विकसित जम्मू कश्मीर जरूरी है, लेकिन कांग्रेस, पीडीपी और एनसी जैसी परिवारवादी पार्टियां अपने परिवार के लिए जम्मू कश्मीर को फिर पुराने दिनों की ओर ले जाना चाहती हैं। मोदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों का मन बदला है और अब परिवारवादियों से जम्मू कश्मीर की जनता छुटकारा पाना चाहती है।

2019 के आम चुनाव में भाजपा ने तीन सीट उधमपुर, जम्मू और लद्दाख जीती थी। वहीं नेशनल कांफ्रेंस ने श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जीती थी। भारतीय जनता पार्टी इस बार जम्मू, उधमपुर, लद्दाख के अलावा कश्मीर से भी एक सीट जीतने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है।

कश्मीर की तीन सीटों श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला पर कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेन्स का गठबंधन मजबूत नजर आ रहा है। वहीं महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस को तो समर्थन दिया है लेकिन कश्मीर की तीनों सीटों पर एनसी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। महबूबा खुद अनंतनाग से चुनाव लड़ रही हैं।

जम्मू कश्मीर का यह पहला चुनाव है जब इस बार 10 से ज्यादा पार्टियां मैदान में हैं। जम्मू कश्मीर में पीडीपी, एनसी, कांग्रेस, भाजपा के अलावा इस बार डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी, जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेस, जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी, पैंथर्स पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ सीपीएम भी मैदान में है।

जम्मू की उधमपुर सीट के अलावा कश्मीर की अनंतनाग सीट पर भाजपा की उम्मीदें बढी हैं। उधमपुर सीट से जहां जीतेन्द्र सिंह जीत की हैट्रिक मारना चाहते हैं वहीं परिसीमन के बाद अनंतनाग में भाजपा मजबूत हुई है। जम्मू संभाग के राजौरी और पुंछ इलाके इसमें शामिल होने के कारण भाजपा को यहां तगड़े मुकाबले की संभावना दिख रही है।

भाजपा के पक्ष में एक बात और जा रही है और वह है कि इस बार चुनाव में दो प्रमुख दलों नेशनल कांफ्रेस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को अगस्त 2019 के बाद अस्तित्व में आई दो स्थानीय पार्टियों 'जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी' और 'डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी)' से कड़ी चुनावी टक्कर मिल रही है।

जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी मार्च 2020 में अस्तित्व में आई। पीडीपी के पूर्व नेताओं की बनाई पार्टी की अगुवाई पूर्व पीडीपी नेता सैयद अल्ताफ बुखारी करते हैं। अल्ताफ बुखारी पहले पीडीपी में थे और जम्मू कश्मीर के वित्त और पीडब्लूडी मंत्री रह चुके हैं। केन्द्र सरकार ने इन्हे जेड प्लस सुरक्षा मुहैया कराई है। वहीं सिंतबर 2022 में डेमोेक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी का गठन कांग्रेस के नेता रहे और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने किया है। इसने उधमपुर से जीएम सरूरी को मैदान में उतारा है।

दूसरी तरफ सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉफ्रेन्स (जेकेपीसी) भी चुनाव मैदान में पुरानी प्रतिद्धंद्धी नेशनल कॉफ्रेस के खिलाफ ताल ठोक रही है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस का कहना है कि नई पार्टियां भाजपा की सोची समझी रणनीति का नतीजा हैं जिन्हे मुस्लिम वोटरों को बांटने और भाजपा के हितों को साधने के लिए बनाया गया है।

भाजपा की सारी उम्मीदें पहाड़ी जनजातीय समूह की बड़ी आबादी पर टिकी हैं, जिन्हे फरवरी में ही अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया गया है और इस तरह इस समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का रास्ता खुल गया है। इसके बाद से पूर्व नेशनल कांफ्रेस नेता मुश्ताक अहमद शाह बुखारी, पूर्व एमएलसी सैयद मोहम्मद रफीक शाह और शाहनाज गनी जैसे कई प्रमुख नेता भाजपा में शामिल हो चुके है।

जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने से पहले पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार का हिस्सा रह चुकी भाजपा अब धारा 370 हटने के बाद इस राज्य में अपना पहला मुख्यमंत्री देने का हरसंभव प्रयास कर रही है। सितंबर में विधानसभा चुनाव होना तय हैै। संघ ने अपने प्रचारकों की बड़ी फौज जम्मू कश्मीर में उतार दी है।

संघ भी चाहता है कि जहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपना बलिदान दिया वहां भाजपा का मुख्यमंत्री बने। मोदी भी कह चुके हैं कि धारा 370 हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को आधी श्रद्धांजलि दी है, भाजपा का मुख्यमंत्री बनाकर पूरी श्रद्धांजलि देना है।

भाजपा जम्मू और उधमपुर को लेकर आश्वस्त है लेकिन भाजपा की पूरी कोशिश कश्मीर की अनंतनाग और श्रीनगर सीट जीतने की भी है। जम्मू कश्मीर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर तक विधानसभा चुनाव भी होना है। भाजपा को उम्मीद है कि परिसीमन के बाद और भाजपा के द्वारा किए गए विकास के कामों के बाद इस बार कश्मीर में बदलाव तय है।

भाजपा भले ही जम्मू कश्मीर को लेकर उम्मीद से भरी हो, लेकिन लद्दाख में भाजपा का अपनी लोकसभा सीट बचाए रखना मुश्किल हो रहा है। अगस्त 2019 में जब जम्मू कश्मीर को विधानसभा वाला केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया, उस समय लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया था। लद्दाख के लोग लद्दाख के लिए दो लोकसभा सीट एक लद्दाख ओर दूसरी लेह की मांग करते हुए लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

बौद्ध बाहुल्य वाले लद्दाख और मुस्लिम बाहुल्य वाले कारगिल के संगठन लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलांयस एक साथ मिलकर आंदोलन कर रहे हैं। लद्दाख के लोगों की मुख्य मांगे हैं कि लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाए, छठी अनुसूचि के तहत संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय नौकरी में युवाओं को आरक्षण और लद्दाख में लोकसेवा आयोग का गठन किया जाए।

भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि लद्दाख को छठी अनुसूचि में शामिल किया जाएगा। अब केन्द्र सरकार अपने वादे से पीछे हट रही हैै। ऐसे में लद्दाख सीट जीतना भाजपा के लिए बेहद मुश्किल है। अक्टूबर 2023 को हुए लद्दाख स्वायत्तशासी पर्वतीय विकास परिषद के चुनाव में नेशनल कांफ्रेस और कांग्रेस गठबंधन ने जीत दर्ज की थी और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।

बहरहाल, जम्मू कश्मीर में भाजपा के पक्ष में जो बात दिख रही है वह यह कि अब कश्मीर के लोगों को धारा 370 की वापसी को लेकर कोई उम्मीद नहीं है। एक बड़ा वर्ग मोदी सरकार के विकास कार्यो से संतुष्ट नजर आ रहा है। परिवारवाद और भ्रष्टाचार में लिप्त रही पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस काफी हद तक अपना असर खो चुके हैं। इसलिए धारा 370 की वापसी की बात कोई नहीं कर रहा है।

भाजपा ने कश्मीर में केन्द्र की योजनाओं के जरिए एक बड़ा लाभार्थी वर्ग तैयार कर लिया है। इसलिए जम्मू कश्मीर में भाजपा अपने विकास कार्यों के भरोसे चुनाव लड़ रही है और यही भाजपा के पक्ष में जाता हुआ दिख रहा है। जिस राज्य में भाजपा का कोई नाम नहीं लेता था, आज भाजपा वहां की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनती हुई दिख रही है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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