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खालिस्तानी आतंकवाद की ज्वाला फिर से भड़काने में लगा है पाकिस्तान

पंजाब में संगरूर क्षेत्र में हुए लोक सभा उपचुनाव में खालिस्तान समर्थक और पूर्व पुलिस अधिकारी सरदार सिमरनजीत सिंह मान को मिली विजय से इस बात की आशंका पैदा हो गई है कि पंजाब में खालिस्तानी उग्रवाद की ज्वाला पुनः भड़क सकती है।

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लोक सभा उपचुनाव में जीतने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी सरदार सिमरनजीत सिंह मान की पृष्ठभूमि अधिकांश युवा नहीं जानते हैं, इसलिए इसके बारे में कुछ प्रकाश डालना जरूरी है। तीन दशकों से लगातार लोक सभा व विधानसभा के चुनाव लड़ते रहे मान पंजाब के एक प्रतिष्ठित परिवार से हैं और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रह चुके हैं। लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार ऑपरेशन के बाद वे भारत विरोधी बयानों व गतिविधियों के कारण चर्चा में आ गये और आईपीएस की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद सिमरनजीत सिंह मान को विभिन्न मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया और कई वर्ष जेल में रहने के बाद उन्हें सरकार द्वारा बरी किया गया।

जेल में रहते हुए मान ने 1989 में भारी मतों से जीत हासिल की। इसके बाद उन्हें दूसरी जीत 1999 में मिली लेकिन संसद में कृपाण लेकर ही जाने की जिद के कारण उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं मिली और कुछ समय बाद ही उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। अब उन्हें तीसरी बार लोक सभा चुनाव में विजय मिली है। लेकिन इस दौरान मान को छह बार लोक सभा और छह बार ही विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना भी करना पड़ा।

ऐसे आरोप थे कि 1978 के दिनों में जब वे अमृतसर के पुलिस अधीक्षक थे तभी पाकिस्तान से खालिस्तानी आतंकवादियों के लिए अस्त्र-शस्त्रों की सप्लाई का सिलसिला शुरू हुआ था। उस समय की ख़बरों के अनुसार पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक बीरबल दास ने पंजाब के राज्यपाल को एक गुप्त रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें यह आरोप लगाया था कि अमृतसर की पुलिस लाइन में खालिस्तानी आतंकवादियों को अस्त्र-शस्त्र चलाने की जो ट्रेनिंग दी जा रही है उसके पीछे तत्कालीन पुलिस कप्तान सिमरनजीत सिंह मान का हाथ है।

सिमरनजीत सिंह मान का संबंध एक राजनीतिक परिवार से है। उनके पिता जोगेंद्र सिंह मान पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह भी उनके रिश्तेदार हैं। सिमरनजीत सिंह मान अनेक बार संयुक्त राष्ट्र संघ को भारत सरकार के खिलाफ ज्ञापन भी दे चुके हैं। लोक सभा उप चुनाव में उनकी अप्रत्याशित जीत के बाद पाकिस्तान के समर्थन से खालिस्तानी आंदोलन चला रहे उग्रवादियों का हौसला बढ़ने और पंजाब का माहौल ख़राब होने की आशंका जताई जा रही है।

गत छह महीनों में पंजाब में पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई की गतिविधियों में जो तेजी आई है उसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नींद हराम कर दी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने यह स्वीकार किया है कि पाकिस्तान से ड्रोन द्वारा पंजाब में खालिस्तान समर्थकों को आधुनिक हथियार और विस्फोटक पदार्थ भारी मात्रा में सप्लाई किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा है कि सुरक्षा एजेंसियां हालात पर पैनी नजर रख रही हैं। इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसियों की गतिविधियां भविष्य में देश के लिए खतरनाक रूप ले सकती हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गत छह महीने में पाकिस्तान द्वारा कम-से-कम सात बार ड्रोनों द्वारा आधुनिकतम अस्त्र-शस्त्रों के जखीरे भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में गिराए गए हैं। तरनतारन और फिरोजपुर के सीमावर्ती गांवों में छापे मारकर सुरक्षा एजेंसियों ने एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार करके उनके कब्जे से पाकिस्तान में बने मिसाइल, रॉकेट और एके-47 रायफलें काफी संख्या में बरामद की हैं।

सीमा सुरक्षा बल के उच्चाधिकारियों ने भी पाकिस्तान द्वारा खालिस्तानियों को हथियार सप्लाई किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उनके पास ऐसे उपकरण नहीं हैं जिनके द्वारा वे पाकिस्तान द्वारा भेजे गए ड्रोनों को भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने पर गिरा सकें।

पिछले महीने रॉ की गुप्त सूचना के आधार पर पानीपत के करीब एक वाहन को रोककर उससे भारी मात्रा में पाकिस्तान में बने हुए हथियार बरामद किए गए। इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों ने यह स्वीकार किया कि वे शस्त्रों के इस भंडार को आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले में कुछ लोगों को पहुंचाने वाले थे। इन लोगों के नाम और पते उन्हें पाकिस्तान में सक्रिय खालिस्तानियों ने बताए थे।

पाकिस्तान के इशारे पर गत छह महीने में सिखों के पवित्र ग्रंथों की बेअदबी की कथित घटनाओं में अतिवादियों द्वारा कम-से-कम चार लोगों की निर्मम हत्याएं की जा चुकी हैं। मारे गए ये चारों व्यक्ति गैर सिख थे। जानकार सूत्रों का दावा है कि 1978 में खालिस्तानी उग्रवाद की लहर शुरू होने से पहले भी गुरुग्रंथ साहिब की कथित बेअदबी की आड़ में सिख जनता को गैर सिखों के खिलाफ इसी तरह से भड़काया गया था।

दो महीने पूर्व चंडीगढ़ के समीप मोहाली में पंजाब गुप्तचर विभाग के कार्यालय पर रॉकेटों से जो हमला किया गया था उसके पीछे भी पाकिस्तान का हाथ बताया जाता है। अभी तक पुलिस इस घटना के लिए जिम्मेवार लोगों का सुराग नहीं लगा सकी है। शिमला में हिमाचल विधानसभा पर खालिस्तान समर्थक पोस्टरों के लगाए जाने के पीछे कौन लोग थे, अभी तक सरकारी एजेंसियां इसका सुराग लगाने में विफल रही हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के अवसर पर पंजाब के अनेक नगरों में खालिस्तान समर्थकों ने बंद का आयोजन किया और राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन किए। इससे साफ है कि पाकिस्तान के इशारे पर खालिस्तान समर्थक पुनः सक्रिय हो रहे हैं।

(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)

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