लव जिहाद के मामले और मुस्लिम समुदाय की विश्वसनीयता का संकट
भारतीय समाज में किसी की भी विश्वसनीयता उसके आचार विचार और व्यवहार से ही तय होती है। सामूहिक रूप से समाज जब किसी वर्ग, जाति, संप्रदाय के बारे में अपनी धारणा विकसित करता है तो उसके पीछे उसका अपना लंबा व्यावहारिक अनुभव होता है। समाज की इस कसौटी पर अगर भारत के मुसलमानों का व्यवहार परखें तो क्या उनके बारे में बनी धारणा गलत साबित होती है?

इस सवाल को आप इस लिहाज से देखिए कि आये दिन मीडिया या सोशल मीडिया में ऐसी खबरें आती हैं, जब कोई न कोई मुस्लिम लड़का किसी हिन्दू, सिख अथवा ईसाई लड़की के साथ संबंधों को लेकर विवाद में आता है। कभी किसी लड़की की हत्या हो जाती है, कभी किसी लड़की या महिला को जबरन इस्लाम कबूल करवाने की खबर आती है तो कभी अपना नाम बदलकर किसी हिन्दू लड़की को फंसाने, उसका शारीरिक शोषण करने और फिर उसे परेशान करने की बात सामने आती है। सवाल ये उठता है कि ऐसा किसी और समुदाय के बारे साथ क्यों दिखाई नहीं देता? अंतर्धार्मिक प्रेम संबंधों में धोखाधड़ी, प्रताड़ना, हत्या के अधिकांश किस्से सिर्फ मुस्लिम समुदाय से ही क्यों जुड़ जाते हैं?
पहचान छिपाकर क्यों बिछाते हैं प्रेम जाल?
ताजा मामला एक बार फिर लखनऊ का है जहां एक जिम ट्रेनर फैजल अहमद ने अथर्व सिंह नाम बताकर एक हिन्दू लड़की से प्यार किया और उससे आर्य समाज मंदिर में जाकर शादी भी कर लिया। जब दोनों साथ रहने लगे तो यह रहस्य खुला कि अथर्व असल में फैजल है। जब ये रहस्य खुला तो फैजल ने उस महिला पर दबाव बनाना शुरु कर दिया कि अब वह इस्लाम कबूल कर ले। महिला इसके लिए तैयार नहीं हुई और उसने फैजल के खिलाफ लखनऊ के चिनहट थाने में धोखाधड़ी, बलात्कार और लव जिहाद का केस दर्ज करवा दिया।
ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि मुस्लिम नौजवान नाम बदलकर, अपनी पहचान छ्पाकर हिन्दू लड़कियों से दोस्ती क्यों करते हैं? इसी से इस बात का संकेत मिलता है कि उनके समुदाय की विश्वसनीयता समाज में न्यूनतम है। इसके बाद जब रहस्य खुलता है तो या तो उसे इस्लाम कबूल करवाकर मुस्लिम बना लिया जाता है या फिर उसे तरह तरह से प्रताड़ित किया जाता है। ऐसी खबरें या जानकारियां मुस्लिम समुदाय की विश्वसनीयता को बढाने की बजाय उसे और नीचे ही गिराती हैं।
मेरठ में एकता देशवाल की 2020 में निर्मम हत्या का मामला भी लव जिहाद का एक ऐसा ही मामला था जिसमें मेरठ का शाकिब एकता देशवाल से अमन बनकर लुधियाना में मिलता है। शाकिब ने एकता से अपनी पहचान छिपाकर जान पहचान बढाई। जब दोनों में दोस्ती हो गयी तो उसने मंदिर में जाकर उससे शादी भी कर लिया। शादी के बाद जब अमन एकता को लेकर मेरठ के दौराला अपने गांव आया तब जाकर इस बात का भेद खुला कि वह अमन नहीं, शाकिब है।
भेद खुलने के बाद एकता को अमन के शाकिब होने से ज्यादा गुस्सा इस बात पर आया कि उसने प्यार में झूठ क्यों बोला? पूरे परिवार ने मिलकर एकता पर दबाव बनाया कि वह इस्लाम कबूल कर ले। लेकिन बीकॉम करनेवाली एकता खुली सोच वाले परिवार में पली बढी थी। उसने मना कर दिया तो शाकिब के पूरे परिवार ने मिलकर एकता की हत्या कर दी। वह अपने साथ जो गहने और पैसे लाई थी उसे शाकिब के परिवार ने रख लिया और उसकी लाश को गन्ने के खेत में गाड़ दिया। उसे मारने के बाद उसका एक हाथ भी काट लिया क्योंकि उसने हाथ पर अमन नाम का गोदना गोदवा रखा था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि अगर लाश की शिनाख्त हो तो उसके परिवार पर शक न जाए।
खैर, इस मामले में कुत्तों ने सारी पोल खोल दी जब कुत्तों ने जमीन खोदकर लाश खाना शुरु कर दिया। पुलिस आई और जांच पड़ताल में सारी कहानी सामने आ गयी कि कैसे एकता से हिन्दू बनकर मिलने वाले शाकिब और उसके परिवार ने उसकी हत्या कर दिया था। क्या किसी भी और धर्म या जाति से जुड़ा व्यक्ति एकता के साथ वह करता जो शाकिब और उसके परिवार ने किया? जो लड़की उसके प्यार में पड़कर घर बार सबकुछ छोड़कर उसके भरोसे पर मेरठ आ गयी उसके साथ शाकिब ने जो विश्वासघात किया, क्या किसी और समुदाय में इसकी कल्पना भी की जा सकती है?
अभी इसी साल अप्रैल में ऐसा ही एक और भयावह मामला ग्वालियर से आया जिसमें इमरान ने राजू बनकर एक हिन्दू लड़की से शादी कर लिया। लेकिन जब इमरान उस लड़की को अपने घर लाया तो सारी सच्चाई सामने आ गयी। इस मामले में सबसे घिनौना पक्ष ये था कि इमरान ने खुद तो उस हिन्दू लड़की की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया ही, उसे घर में बंद कर दिया। उसे भोजन पानी भी नहीं देते थे। इस्लाम कबूल करवाने के नाम पर पहले उसका मौलवी से रेप करवाया गया। उसे बताया गया कि हमारे मजहब में गैर मुस्लिम लड़कियों को ऐसे ही शुद्ध करते हैं। फिर इमरान के भाई ने भी उसके साथ रेप किया। इतने से बात खत्म नहीं हुई। इमरान की मां ने उससे धंधा करवाने की योजना बना ली।
यह सारी निर्दयता और घिनौनी हरकत उसके साथ इसलिए की गयी क्योंकि वह हिन्दू परिवार से आयी थी। हालांकि किसी तरह वह उस नर्क से निकलकर बाहर आयी और अपनी बहन की मदद से इमरान, उसके परिवार और मौलवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए न केवल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया बल्कि उनका घर भी गिरा दिया। लेकिन इतना सब कुछ करने से उस लड़की की बर्बाद जिन्दगी तो उसे वापस नहीं मिल जाएगी। इमरान ने राजू बनकर उसके तन मन पर जो घाव दिया था उसकी पीड़ा से अब उसे जीवन भर गुजरना पड़ेगा।
पिछले हफ्ते इंदौर में एक बार ऐसा ही मामला तब सामने आया जब खजराना पुलिस ने अनस नामक एक मुस्लिम नौजवान को गिरफ्तार किया। अनस ने हिन्दू बनकर एक हिन्दू लड़की से दोस्ती कर ली जो कि 12वीं की छात्रा थी। दो साल दोस्ती और प्यार का सिलसिला चला और एक दिन वह उस लड़की को लेकर दिल्ली चला आया और यहां उसने एक मस्जिद में शरण ली। लड़की के घरवालों ने लड़की के लापता होने की शिकायत दर्ज की तब जाकर पुलिस ने अनस को दिल्ली से गिरफ्तार किया और लड़की को भी बरामद किया।
अब लड़की ने भी वही कहानी बताई कि अनस उससे एक मंदिर में हिन्दू बनकर मिला था। पुलिस का कहना है कि वह एक अपराधी किस्म का नौजवान है और उस पर पहले से पांच केस दर्ज हैं। ऐसे व्यक्ति ने अगर नाम और पहचान छुपाकर किसी हिन्दू लड़की को अपने प्रेम जाल में फंसाया तो स्वाभाविक है इसके पीछे किसी न किसी संगठित गिरोह के होने का शक होता ही है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में इसी साल शिबलू खान ने रोमी बनकर एक हिन्दू लड़की से दोस्ती की फिर 21 अप्रैल को अपना जन्मदिन बताकर उसे अपने घर बुला लिया और उसे नशीला पदार्थ खिलाकर न केवल रेप किया बल्कि उस रेप का वीडियो भी बना लिया। बाद में उसने लड़की पर धर्म परिवर्तन करके निकाह करने का दबाव बनाया, नहीं तो वीडियो वॉयरल करने की धमकी भी दी। हालांकि लड़की के परिवारवालों की शिकायत पर शिबलू खान को गिरफ्तार कर लिया गया है।
समुदाय की विश्वसनीयता पर सवाल
ऐसे एक दो मामले नहीं हैं। देश के हर शहर में हर साल ऐसे अनेक मामले सामने आते हैं जहां मुस्लिम नौजवान अपनी पहचान छिपाकर पहले हिन्दू लड़कियों से दोस्ती करते हैं फिर उनका अश्लील वीडियो बनाते हैं, फिर धमकी देकर निकाह करने का दबाव बनाते हैं। बागपत का मामला भी तो इसी महीने का है जब लोनी के रहीस ने राहुल बनकर एक हिन्दू लड़की से दोस्ती की और इस्लाम कबूल करके निकाह का दबाव बनाया। उसने तो लड़की के परिवारवालों को भी धमकी दे दी कि अगर उन्होंने उस लड़की की शादी उससे नहीं की तो वह सबका सर तन से जुदा कर देना।
भारतीय राजनीति और मीडिया में मुस्लिम समुदाय को अपने राजनीतिक हित के लिए भले ही पीड़ित बताया जाता है लेकिन समाज का अपना अनुभव ये है कि वह पीड़ित समुदाय नहीं है, बल्कि सबको पीड़ित कर रहा है। स्वाभाविक है ऐसे में उस पूरे समुदाय की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है। इसके बारे में मुस्लिम समुदाय के जिम्मेदार लोगों को जरूर विचार करना चाहिए क्योंकि इसी से उनके समुदाय की विश्वसनीयता बढेगी और समाज में समरसता भी आयेगी।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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