Farm Loan waiver promise: किसानों के जख्मों पर नमक डालती एक तस्वीर
किसानों के पूरे कर्ज माफ कर देने के वायदे से चुनाव जीतने वाली अशोक गहलोत सरकार बनने के बाद राजस्थान में 18,817 किसानों की जमीन नीलाम हो चुकी है, जबकि 12 हजार किसानों को नीलामी का नोटिस मिला हुआ है।

Farm Loan waiver promise: 2014 से 2017 तक लगातार हार का सामना करती आ रही कांग्रेस ने 2018 में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ जीत कर जोरदार वापसी की थी| इन तीनों ही राज्यों के चुनावों में राहुल गांधी कांग्रेस के स्टार प्रचारक थे| चुनावों से ठीक पहले मध्य प्रदेश में कुछ किसानों ने कर्जे के कारण आत्महत्या कर ली थी, तीनों ही राज्यों में किसानों का कर्जा मुख्य मुद्दा बन गया था| तब राहुल गांधी ने अपनी जनसभाओं में सरकार बनने के दस दिन के भीतर सभी किसानों का कर्जा माफ़ करने का वादा किया था|

हालांकि राजस्थान में वसुंधरा राजे ने किसानों के 50-50 हजार के कर्जे माफ़ कर दिए थे, लेकिन पूरा कर्जा माफ़ के नारे से कांग्रेस तीनों राज्यों में चुनाव जीत गई थी| अब जब राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा करते करते राजस्थान पहुंचे हैं, तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने पहले दिन से ही सवालों की बौछार शुरू कर के राहुल गांधी को बचाव मुद्रा में ला दिया, खासकर किसानों के कर्ज माफी मुद्दे पर, क्योंकि अशोक गहलोत सरकार ने चुनावी वायदे के मुताबिक़ किसानों के कर्ज माफ़ नहीं किए| जबकि चुनावों के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद 26 नवंबर को पोकरण की सभा में कहा था कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 10 दिन में सभी किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा|
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तीनों राज्यों के कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने एक ही दिन 17 दिसंबर 2018 को शपथ ली थी, शपथ लेते ही तीनों मुख्यमंत्रियों ने कर्ज माफी का एलान कर दिया था| लेकिन जब सरकारी आदेश जारी हुआ तो वह चुनावी वायदे के मुताबिक़ सभी किसानों का पूरा कर्ज माफ नहीं था|
काफी "इफ एंड बट" लगा दिए गए थे, मध्यप्रदेश के 34 लाख किसानों पर 38 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था, सरकार ने दो लाख रूपए तक का सिर्फ सहकारी बैंकों का कर्ज माफ़ किया| सहकारी बैंको का कुल कर्जा 16 हजार करोड़ रूपए था, यानी आधे से भी कम| छत्तीसगढ़ में भी इन्हीं शर्तों के साथ 16.65 लाख किसानों का 6100 करोड़ का कर्ज माफ हुआ|
राजस्थान में सबसे बड़ा खेल हुआ| राजस्थान में 55 लाख किसानों पर 94 हजार करोड़ का कर्ज था| लेकिन अशोक गहलोत सरकार ने चार सालों में टुकड़ों टुकड़ों में सिर्फ सहकारी बैंकों का 18 हजार करोड़ का कर्ज माफ़ किया है|
किसानों पर कर्ज था 94 हजार करोड़ रुपये का, और गहलोत सरकार ने कर्ज माफ़ किया है सिर्फ 18 हजार करोड़ रूपए का| मुख्यमंत्री की शपथ लेते ही उन्होंने कर्ज माफी का एलान कर दिया था। लेकिन उसी शाम को जब आदेश जारी हुआ तो उसमें सिर्फ दो लाख तक का और सिर्फ सहकारी बैंकों का कर्ज माफ़ करने का एलान था, जिसमें वसुंधरा राजे सरकार की ओर से माफ़ किए गए 50 हजार रूपए के कर्ज माफ़ को भी जोड़ दिया गया था। इसलिए प्रेक्टिकली सिर्फ डेढ़ लाख का कर्ज माफ़ किया गया था, वह भी सिर्फ उन किसानों का जिनकी अधिकतम 2 हेक्टर जमीन थी|
मान लो किसी किसान पर एक लाख रूपए का कर्ज था, उस पर दो लाख रूपए का ब्याज हो चुका है, तो उस का दो लाख का ब्याज माफ़ हो गया, और एक लाख का कर्ज ज्यों का त्यों रह गया| अब फिर ब्याज बढ़ कर कई गुना हो गया है|
सहकारी बैंको का कर्ज किसानों के कर्ज का 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होता, यानी बाकी 90 प्रतिशत कर्ज तो सरकारी और प्राईवेट बैंकों का था| आदेश में कहा गया था कि अन्य बैंकों के डिफॉल्टर किसानों का 2 लाख रुपए तक का अवधि-पार अल्पकालीन फसली कर्ज ही माफ होगा| जबकि यह अभी तक हुआ ही नहीं|
इसी बीच सरकारी और प्राईवेट बैंकों ने बाकायदा मुनादी करवा कर किसानों की जमीनों की कुर्की और नीलामी शुरू कर दी| अशोक गहलोत सरकार बनने के बाद राजस्थान में 18,817 किसानों की जमीन नीलाम हो चुकी है, जबकि 12 हजार किसानों को नीलामी का नोटिस मिला हुआ है|
राजस्थान में किसानों की कर्ज माफी फिर मुद्दा बनता जा रहा है, किसान आक्रोशित हैं, किसान कहीं राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में खलल न डाल दें, इसलिए किसानों को उनकी यात्रा से दूर रखने की कोशिश हो रही है| 14 दिसंबर को किसानों ने जब राहुल गांधी से मिलने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें भगा दिया| भाजपा के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ।
अगले दिन सुबह यात्रा शुरू होने से पहले राहुल गांधी से बुलवाया गया कि अशोक गहलोत सरकार ने 20 लाख किसानों के 20 हजार करोड़ के कर्जे माफ़ किए हैं| अखबारों में जब यह खबरें बननी शुरू हुई कि किसानों को राहुल गांधी से दूर रखा जा रहा है, तो सचिन पायलट ने उन्हें लालसोट के बडौली गाँव में एक दलित किसान सोहन लाल बैरवा के घर चाय के लिए रुकवा कर मेसेज दिलाया कि राहुल गांधी तो किसानों के घर जा रहे हैं|
बैरवा के घर पर राहुल गांधी ने कुट्टी काटने की मशीन चलाकर देखी और जानवरों के लिए हरा चारा भी काटा| चारा काटने की तस्वीर भी वायरल की गई, ताकि भाजपा और किसानों का विरोध दब जाए| उस तस्वीर को उन्होंने ट्विटर हैंडल पर डालकर लिखा- ''असली भारत, तो बस गांव में ही बसता है|'' तो अहम सवाल यह है कि क्या यह तस्वीर राजस्थान के उन किसानों के जख्म भर देगी, जिनके खेत नीलाम हो चुके हैं या जो कर्ज माफी की आस में चार वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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