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Satyapal Malik: अपनी विफलता के जवाब तो सत्यपाल मलिक को देने पड़ेंगे

Satyapal Malik: सत्यपाल मलिक अब बुरे फंस गए हैं। अब या तो उन्हें अपने आरोपों का कोई सबूत देना होगा या जैसा कि उन्होंने करण थापर के इंटरव्यू में कहा था, वही कहेंगे कि लाल चौक की अफवाह थी।

CBI calls Satya Pal Malik for questioning should answer for his failure

Satyapal Malik: सीबीआई ने सत्यपाल मलिक से उनके आरोपों पर जांच शुरू करने से पहले गवाह के रूप में उनसे पूछताछ की इच्छा जाहिर की है। जम्मू कश्मीर का राज्यपाल रहते हुए, और वहां से हटने के बाद भी दर्जनों बार उन्होंने दावा किया था कि दो फाईलें क्लीयर करने के लिए उन्हें तीन सौ करोड़ रूपए की रिश्वत की पेशकश की गई थी। जिनमें से एक फाईल अनिल अंबानी की रिलायंस कंपनी से जुड़ी थी।

CBI calls Satya Pal Malik for questioning should answer for his failure

मलिक के अनुसार अनिल अंबानी चाहते थे कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों का हेल्थ इंश्योरेंस उनकी कंपनी से करवाया जाए। यह 2200 करोड़ का खेल था, जिसमें सरकार और कर्मचारियों का पैसा लगता। इस फाईल को क्लीयर करने पर उन्हें 150 करोड़ की रिश्वत मिलती।

वैसे सत्यपाल मलिक अपने ही उन आरोपों से अब थोड़ा थोड़ा पीछे हटने लगे हैं कि उन्हें किसी ने कोई पेशकश की थी। लेकिन सीबीआई के पास उनके उन सारे भाषणों की वीडियो रिकार्डिंग है, जिनमें वह जाट सम्मेलनों में जाकर कहते थे कि संघ के एक बड़े अधिकारी ने उन्हें उस फाईल को क्लीयर करने को कहा था।

एक बार तो उन्होंने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री के क़रीबी लोग उनके पास जम्मू-कश्मीर में दलाली का काम लेकर आए थे, जिसमें उन्हें 300 करोड़ रुपये का ऑफ़र था। लेकिन उन्होंने फाईल क्लीयर नहीं की। शायद अब उन्हें याद नहीं कि अक्टूबर 2021 में उन्होंने क्या कहा था। तब उन्होंने कहा था कि एक सचिव उनके पास दो फाईलें लेकर आया था। उसने उन्हें बताया था कि ये संदिग्ध सौदे हैं, लेकिन एक की मंजूरी के लिए उन्हें 150 करोड़ रुपए मिल सकते हैं।

मलिक ने यह भी आरोप लगाया था कि फाइलों की मंजूरी के लिए उन पर दबाव बनाया गया था। इस संबंध में वह कई बार उस समय के भाजपा के महासचिव राम माधव का नाम लेते रहे हैं, जबकि राम माधव ने इन आरोपों को बकवास कहा है।

सीबीआई ने जब उनके आरोपों के आधार पर केस दर्ज किया था तो सत्यपाल मलिक ने उसका स्वागत किया था। अब उनके आरोपों की सीबीआई जांच शुरू हुई है, तो उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना चाहिए, क्योंकि जो भी सबूत हैं, वे उन्हीं के पास हैं। ऐसा नहीं है कि जांच उनसे शुरू हो रही है, सीबीआई जम्मू कश्मीर के कई अफसरों के घरों पर छापे मार कर कुछ दस्तावेज एकत्र भी कर चुकी है, उनसे पूछताछ भी कर चुकी है।

सीबीआई चाहती थी कि मलिक अकबर रोड के उनके दफ्तर में आ जाएं, लेकिन मलिक ठहरे भूतपूर्व लाट साहब, सो उन्होंने कहा कि उनके घर पर ही पूछताछ हो। सीबीआई ने इस पर भी कोई एतराज नहीं जताया, वह तुरंत तैयार हो गई और सत्यपाल मलिक की ओर से तय की गई तारीख 28 अप्रेल को उनके घर पर ही सीबीआई की टीम उनसे सबूत मांगेगी। सत्यपाल मलिक ने पूछताछ से आनाकानी नहीं की है।

जब मलिक सस्ती लोकप्रियता के लिए प्रधानमंत्री, आरएसएस और भाजपा नेताओं पर आरोप लगा रहे थे, तो गृहमंत्री अमित शाह ने सीबीआई से जांच करवाने का फैसला किया था। उन्होंने जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से कहा कि वह सत्यपाल मलिक के आरोपों की सीबीआई से जांच की सिफारिश करें। मनोज सिन्हा ने जांच की सिफारिश कर दी तो गृहमंत्रालय ने उसे सीबीआई को फारवर्ड कर दिया था।

सीबीआई ने एफ़आईआर दर्ज कर ली थी, तो स्वाभाविक है कि सत्यपाल मलिक से ही पूछा जाएगा कि उनके पास 300 करोड़ रूपए की पेशकश लेकर कौन आया था। वह सचिव कौन था, जिसने उन्हें 300 करोड़ रूपए दिलाने के लिए कहा था। सत्यपाल मलिक को इस पूछताछ पर एतराज भी नहीं है, होना भी नहीं चाहिए। आखिर वह कोई सुराग बताएंगे, तभी तो सीबीआई उसे पकड़ सकेगी, जो यह काला धंधा कर रहा था।

लेकिन सत्यपाल मलिक को सत्यवादी राजा हरीशचन्द्र समझने वाला मोदी विरोधी मीडिया और विपक्ष सीबीआई के सम्मन से जल भुन गया है। जबकि उन्हें तो खुश होना चाहिए, क्योंकि मलिक के मुताबिक़ तो जांच की आंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जाएगी। लेकिन इन सब की समस्या यह है कि अब सत्यपाल मलिक ने मुकरना शुरू कर दिया है, उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया है कि यह अफवाह थी कि इन दो फाईलों को क्लीयर करने पर 300 करोड़ की रिश्वत मिल रही है, लेकिन उनके पास पैसे लेकर कोई नहीं आया था।

उन्होंने करण थापर को दिए इंटरव्यू में क्या कहा था कि श्रीनगर के लाल चौक में उड़ी अफवाह भी शाम की खबर बनती है। अब सीबीआई को वह यह बताएंगे कि वह लाल चौक की अफवाह थी कि 300 करोड़ रूपए का लेनदेन हो रहा है। लोग यहां तक कहते हैं कि सत्यपाल मलिक ने पहले दोनों फाईलें क्लीयर कर दी थीं, लेकिन बाद में वापस मंगवा कर रिजेक्ट कीं।

इसमें दो कहानियाँ चल रही हैं, दोनों ही सत्यपाल मलिक के अलग अलग भाषणों और निजी बातचीत पर आधारित हैं। पहली यह कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री से इस संबंध में चर्चा की, तो प्रधानमंत्री ने उन्हें कहा था उनके नाम पर किसी का कोई काम नहीं किया जाए। तब उन्हें लगा कि इसमें वह खुद फंस जाएंगे, इसलिए उन्होंने फाईल को वापस मंगवा कर रिजेक्ट किया था। दूसरी बात यह चल रही है कि वह इन अफवाहों से डर गए थे कि फाईलों की चर्चा लाल चौक तक पहुंच गई है। इसलिए उन्होंने दोनों फाईलों को रिजेक्ट किया। जो भी हो, सीबीआई की जांच में दूध का दूध , पानी का पानी हो जाएगा।

लेकिन विपक्षी दल और मीडिया का एक वर्ग सीबीआई की जांच से बेहद परेशान हो गया है। मीडिया के इस ख़ास विचारधारा वाले वर्ग ने आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि सत्यपाल मलिक ने क्योंकि करण थापर को इंटरव्यू देकर मोदी पर आरोप लगाए हैं, इसलिए मोदी ने सीबीआई को उनके पीछे लगा दिया है। इस इंटरव्यू में, और उसके बाद कई अन्य पत्रकारों को उनके यूट्यूब चैनलों पर धड़ाधड़ इंटरव्यू देकर उन्होंने मोदी पर कई तरह के आरोप लगाए थे, जिनमें एक आरोप यह भी था कि मोदी को भ्रष्टाचार से परहेज नहीं है।

इसके सबूत में उन्होंने यही उदाहरण बताया था कि जब उन्होंने नरेंद्र मोदी को बताया कि उनके पास दो फाईलें आई थीं, जिस पर उन्होंने क्लीयरेंस नहीं दी। इस पर मोदी ने उन्हें सिर्फ इतना भर कहा कि ठीक किया। उन्होंने कोई जांच नहीं बिठाई, लेकिन जांच तो उन्हें खुद बिठानी चाहिए थी। जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन था, और वह खुद राज्यपाल थे। उन्होंने इस मामले को ऐसे कैसे रफा दफा कर दिया था।

सत्यपाल मलिक अब बुरे फंस गए हैं। अब या तो उन्हें अपने आरोपों का कोई सबूत देना होगा या जैसा कि उन्होंने करण थापर के इंटरव्यू में कहा था, वही कहेंगे कि लाल चौक की अफवाह थी। इसलिए एक ख़ास किस्म का मीडिया परेशान है, क्योंकि वह तो सत्यपाल मलिक को चुनावों में मोदी के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा भुनाने की रणनीति बना चुका था। लेकिन चुनावों से पहले ही उनकी पोल खुल गई, तो उनकी रणनीति का क्या होगा।

चलते चलते उनके दूसरे आरोप की बात। वह आरोप ज्यादा ही गंभीर है कि पुलवामा का हमला सरकार की गलती का नतीजा था, क्योंकि अगर गृहमंत्रालय सीआरपीएफ को हवाई जहाज मुहैया करवा देता, तो आतंकी हमले से बचा जा सकता था। जब उन्होंने यह बात पीएम से कही, तो पीएम ने उन्हें चुप रहने के लिए कहा था| वैसे उनकी यह बात बेतुकी है, क्योंकि सीआरपीएफ के साठ ट्रकों का मूवमेंट तब भी होता, और ट्रकों के काफिले में कुछ सैनिक तो तब भी होते।

वैसे सत्यपाल मलिक के ये आरोप झूठ का पुलिंदा ही नहीं, बल्कि नैतिक बेईमानी भी है, क्योंकि यह हमला तब हुआ था, जब वह राज्यपाल थे। जिन सवालों को वह उठा रहे हैं, उनका जवाब खुद उन्हें देना है। उन्होंने गृह मंत्रालय से हवाई जहाज की मांग नहीं की थी, जबकि उन्हें खुद सीआरपीएफ के लिए हवाई जहाज की मांग करनी चाहिए थी। उस समय वहां राज्यपाल का शासन था, और सीआरपीएफ राज्यपाल के अधीन आती है।

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    सीआरपीएफ की मूवमेंट के समय वहां रास्ते में पुलिस की तैनाती की जिम्मेदारी भी उनकी थी, उन्होंने तैनाती क्यों नहीं करवाई? इसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है। राज्यपाल अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। लेकिन वह आरोप देश के उस समय के गृहमंत्री पर लगा रहे हैं, जिन्हें मूवमेंट की जानकारी ही नहीं थी। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के नाते हमले के अगले ही दिन सत्यपाल मलिक ने पुलवामा की घटना को खुफिया विफलता भी बताया है। लेकिन तब भी उन्होंने झूठ बोला था। हमले से एक हफ्ता पहले 8 फरवरी को कश्मीर पुलिस के महानिरीक्षक ने आतंकी हमले की चेतावनी का एक खुफिया इनपुट जारी किया गया था| "एक्स्ट्रीमली अर्जेन्ट" शीर्षक से जारी उनका सर्कुलर बाद में मीडिया तक पहुंच गया था, जिसमें स्पष्ट लिखा था कि सुरक्षा बल तैनाती से पहले अपने स्थान की अच्छी तरह से जांच कर लें, क्योंकि आईईडी की मदद से हमले के इनपुट मिले हैं। यह सर्कुलर राजभवन में भी पहुंचा था, इसके बावजूद उन्होंने कहा कि खुफिया एजेंसियों की विफलता थी। जबकि इस इनपुट के बाद मूवमेंट की उन्हें खुद निगरानी करनी चाहिए थी, जो सत्यपाल मलिक ने नहीं की।

    यह भी पढ़ें: पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के समर्थन में आए केजरीवाल, बोले- CBI के पीछे छिपी है कायरता

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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