अदिति यादव क्या सच में लंदन यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं? दोस्त ने खोला राज, अखिलेश की बेटी को लेकर पोस्ट वायरल
Aditi Yadav Viral Controversy: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बड़ी बेटी अदिति यादव (23) को लेकर सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से कई तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अदिति यादव के लंदन की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने, करोड़ों की चोरी करने और विदेश भाग जाने जैसी फेक खबरें फैलाई जा रही हैं। इन दावों ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी। लेकिन अब मामला सिर्फ अफवाहों तक सीमित नहीं रहा। कानपुर और प्रतापगढ़ में FIR दर्ज होने के बाद यह विवाद कानूनी जांच के दायरे में पहुंच गया है।
लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव लंदन की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं? क्या वह वास्तव में विदेश में हैं, जैसा सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है? इन सवालों के बीच एक वायरल पोस्ट ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। खुद को अदिति का दोस्त और क्लासमेट बताने वाले युवक ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि वायरल कहानी पूरी तरह झूठी है और अदिति कहां पढ़ाई कर रही हैं, इसकी असली जानकारी भी साझा की है।

लंदन यूनिवर्सिटी के दावे की असली हकीकत: अदिति यादव के क्लासमेट ने बताया सच
इंटरनेट पर 'भारत कुमार पटेल' नाम की एक फेसबुक आईडी से एक बहुत ही आपत्तिजनक पोस्ट लिखी गई थी। इस पोस्ट में दावा किया गया था, ''अखिलेश यादव की 23 वर्षीय बेटी अदिति यादव लंदन की मशहूर 'यनीवर्सिटी कॉलेज लंदन' (UCL) में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई कर रही थीं, लेकिन वे वहां से अपने घर के 7 करोड़ रुपये चोरी करके अपने एक नाइजीरियाई दोस्त के साथ नाइजीरिया भाग गई हैं।''
इस बेहद भ्रामक दावे पर से पर्दा उठाते हुए अदिति यादव के साथ पढ़ने वाले छात्र आदर्श यादव ने फेसबुक औ एक्स पर एक लंबा पोस्ट साझा किया है। आदर्श ने अफवाह उड़ाने वालों को मूर्ख बताते हुए लिखा कि जो लोग लंदन यूनिवर्सिटी की कहानी गढ़ रहे हैं, उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा ही नहीं है।
आदर्श यादव ने साफ किया कि अदिति यादव पिछले एक साल से कहीं बाहर नहीं हैं, बल्कि वे भारत में ही दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) की लॉ फैकल्टी से कानून की पढ़ाई (Law Graduation) कर रही हैं।

आदर्श यादव ने पोस्ट में कहा, ''ये मूर्ख, बड़ी बहन अदिति यादव जी के संबंध में जो घटिया टिप्पणी कर रहे हैं, जिसका आधार ही लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं पर टीका हैं। मूर्खों पता नहीं हैं की पिछले एक साल से अदिति जी दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी से लॉ ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हैं।''
आदर्श ने आगे लिखा,
''इन दिनों सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं, और जैसा की मैं भी लॉ फैकल्टी में उनका बैचमेट हूं, हर परीक्षा के बाद मुलाकात होती हैं और अदिति जी को अपने दादा श्रद्धेय नेताजी और पिता आदरणीय अखिलेश यादव जी से विरासत में संस्कार और नैतिकता को पूरी तरह आत्मसात करती हैं। सभी बच्चों से मिलना उन्हें सम्मान देना ये उनकी रोज की आदत हैं। दूरदराज से आए गरीब परिवार के बच्चे भी उनसे बेहिचक बातचीत करते हैं और वो सबसे उनका हालचाल पूछतीं हैं, किसका पेपर कैसा गया, कैसा नहीं।'' (वनइंडिया हिंदी आदर्श यादव के इस पोस्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है,हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट में आदर्श यादव को अदिति का दोस्त बताया गया है।)
अगर अदिति के पुराने बैकग्राउंड की बात करें तो पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स और इंटरनेट डेटा में यह दर्ज है कि अदिति ने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ के मशहूर ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज से पूरी की थी, जहां साल 2020 में उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 98 फीसदी अंक हासिल किए थे। कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में उनके लंदन में होने की चर्चा जरूर थी, लेकिन वर्तमान में कानूनी दस्तावेजों और उनके सहपाठी के बयान से यह साफ हो गया है कि वे दिल्ली यूनिवर्सिटी में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं।
अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ?
अदिति यादव के खिलाफ चलाए जा रहे इस फेक नैरेटिव को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।
कानपुर में कार्रवाई: समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण यादव ने कानपुर के साइबर क्राइम थाने में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से मुलाकात कर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए भारत कुमार पटेल, नागेश्वर सिंह बघेल और विनोद कुमार यादव नाम के तीन लोगों को नामजद किया है। डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह के मुताबिक, इन आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 336(4) और आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत जालसाजी और महिला की छवि खराब करने का केस दर्ज हुआ है।
प्रतापगढ़ में एक्शन: प्रतापगढ़ में सपा के जिला महासचिव अब्दुल कादिर जिलानी ने "शीतला सुजान कवि पत्रकार" नाम की एक फेसबुक आईडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि यह आईडी समाज में भ्रम फैलाने और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के मकसद से लगातार फर्जी कंटेंट पोस्ट कर रही थी।
अब पुलिस की साइबर सेल और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स इन सभी डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह एडिटेड तस्वीरें और भ्रामक कंटेंट किस लोकेशन और आईपी एड्रेस से इंटरनेट पर अपलोड किए गए थे।

अब जानिए उत्तर प्रदेश के किस नेता ने अदिति यादव फेक पोस्ट विवाद पर क्या कहा?
इस मामले के सामने आते ही यूपी की राजनीति में बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस घटना की निंदा तो की, लेकिन इसका पूरा आरोप खुद समाजवादी पार्टी के ही कल्चर पर मढ़ दिया। राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अदिति यादव उनकी भी बेटी जैसी हैं और उन पर की गई इस टिप्पणी से पूरा समाज शर्मिंदा है, लेकिन इसके लिए खुद अखिलेश यादव की राजनीति जिम्मेदार है।
राजभर ने अपने बयान में कहा,
"अदिति के खिलाफ लाल-हरी टोपी वालों में से जिसने भी यह आपत्तिजनक पोस्ट की है, वह बहुत बड़ा गुनाह है। लेकिन यह समय खुद अखिलेश यादव के लिए अपने गिरेबान में झांकने का है। सपाई हमेशा सोशल मीडिया पर दूसरों की जाति, रंग, कपड़ों और पेशे का मजाक उड़ाते रहते हैं। मैं खुद भी इनके गुंडों का भुक्तभोगी रहा हूँ। मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ कि इस घटिया हरकत के पीछे भी कोई सपाई ही निकलेगा, क्योंकि ऐसा प्रशिक्षण सिर्फ लाल-हरी टोपी वाले मास्टर साहब की कक्षा में ही दिया जाता है। वैसे भी इस मामले में विनोद कुमार यादव नाम के व्यक्ति का नाम आना बहुत कुछ बयां करता है।"
लखनऊ के सरोजनीनगर से भाजपा विधायक और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी राजेश्वर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र के भीतर वैचारिक मतभेद होना एक बहुत ही सामान्य बात है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के परिवार की बेटियों को इस तरह झूठे आरोपों के दलदल में घसीटना हमारी सार्वजनिक मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की पूरी निष्पक्षता के साथ जांच कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस घटना को लेकर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के ट्रोल सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है:
सांसद राजीव राय (घोषी): उन्होंने कहा कि यह भारतीय राजनीति का सबसे घटिया और मानसिक विक्षिप्तता का स्तर है। यूपी पुलिस अभी तक शांत बैठी है क्योंकि पीड़ित लड़की किसी भाजपा नेता की बेटी नहीं है।
पवन पांडेय (सपा नेता, अयोध्या): उनका आरोप है कि जब अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में हुई गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए, तो भाजपा नेताओं के पास इसका कोई तथ्यात्मक जवाब नहीं था। इसी वजह से उन्होंने ध्यान भटकाने के लिए परिवार और बेटी पर व्यक्तिगत हमले करना शुरू कर दिया।
सांसद आनंद भदौरिया (सीतापुर): उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि चरित्र पर कीचड़ उछालना सिर्फ कायरों का काम होता है। जो लोग मनगढ़ंत कहानियों से देश की बेटी को बदनाम करना चाहते हैं, उन्हें जनता के भारी गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
विधायक रागिनी सोनकर: उन्होंने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा देने वाली सरकार का असली चेहरा सबके सामने आ गया है, क्योंकि इस तरह की बेहद भद्दी टिप्पणियां करने वाले ट्रोल्स पर कोई लगाम नहीं लगाई जा रही है।

आखिर ऐसे विवाद बार-बार क्यों सामने आते हैं?
डिजिटल दौर में सोशल मीडिया सूचना का सबसे तेज माध्यम बन चुका है। लेकिन इसके साथ फर्जी खबरों और भ्रामक दावों का खतरा भी बढ़ा है। किसी व्यक्ति, खासकर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के बारे में बिना सत्यापन के जानकारी फैलाना कुछ ही घंटों में बड़े विवाद का रूप ले सकता है।
अदिति यादव का मामला भी इसी चुनौती को सामने लाता है। यह घटना बताती है कि किसी भी वायरल पोस्ट को सच मानने से पहले उसकी तथ्यात्मक जांच जरूरी है। क्योंकि कई बार सोशल मीडिया पर चल रही कहानी और वास्तविकता में जमीन-आसमान का अंतर होता है।














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