दांव पर 17.8 लाख स्टूडेंट का करियर! हाईकोर्ट का CBSE OSM मामले में राहत देने से इनकार, नहीं खुलेगा पोर्टल

CBSE कक्षा 12वीं के रिजल्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। बोर्ड की कॉपियों की जांच में इस्तेमाल किए गए ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने सवाल उठाए हैं। इसी मुद्दे को लेकर छात्र संगठन NSUI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि रिजल्ट वेरिफिकेशन और री-चेकिंग से जुड़ा पोर्टल दोबारा खोला जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और CBSE की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि इस समय कोई भी बड़ा बदलाव लाखों छात्रों की आगे की पढ़ाई और कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

CBSE

क्या है पूरा विवाद?

CBSE ने इस साल कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम का उपयोग किया था। कुछ छात्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान तकनीकी स्तर पर दिक्कतें आईं, जिससे कई उत्तरों का सही मूल्यांकन नहीं हो पाया।

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इसी आधार पर NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। याचिका में मांग की गई कि जिन छात्रों को अपने अंकों पर संदेह है, उन्हें दोबारा आवेदन का मौका दिया जाए और वेरिफिकेशन पोर्टल फिर से शुरू किया जाए।

अदालत में क्या बोले तुषार मेहता?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता खुद CBSE और केंद्र सरकार की ओर से अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं से जुड़ी पूरी प्रक्रिया तय समय-सारिणी के अनुसार चलती है और उसमें किसी भी स्तर पर बदलाव का असर बहुत व्यापक हो सकता है।

उन्होंने अदालत को बताया कि अगर इस समय वेरिफिकेशन पोर्टल दोबारा खोला जाता है तो परिणामों से जुड़ी आगे की प्रक्रिया प्रभावित होगी। इससे देशभर के करीब 17.8 लाख छात्रों पर असर पड़ सकता है, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है जो फिलहाल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिले की तैयारी कर रहे हैं।

कॉलेज एडमिशन पर भी जताई चिंता

CBSE की ओर से यह भी कहा गया कि कई विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे समय में रिजल्ट से जुड़ी प्रक्रिया को दोबारा खोलने से मेरिट लिस्ट, काउंसलिंग और एडमिशन कार्यक्रम में देरी हो सकती है। सरकार का तर्क था कि कुछ छात्रों की शिकायतों के आधार पर पूरे सिस्टम को रोकना लाखों अन्य छात्रों के हितों के खिलाफ होगा।

हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से मना कर दिया। अदालत ने माना कि इस चरण में कोई ऐसा आदेश देना उचित नहीं होगा जिससे बड़ी संख्या में छात्रों की शैक्षणिक प्रक्रिया प्रभावित हो। बेंच ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से पहले उसके व्यापक प्रभावों को समझना जरूरी है। इसी वजह से अदालत ने वेरिफिकेशन पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश नहीं दिया।

याचिका अभी खारिज नहीं हुई

हालांकि हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज नहीं किया है। अदालत ने मामले को लंबित रखा है और आगे भी इसकी सुनवाई जारी रहेगी। इस दौरान CBSE से ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता से जुड़े पहलुओं पर जवाब मांगा जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष अपनी ओर से अतिरिक्त दस्तावेज और तर्क भी पेश कर सकता है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

अभी के लिए CBSE का वेरिफिकेशन पोर्टल दोबारा नहीं खुलेगा। छात्रों को बोर्ड द्वारा पहले से तय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा। वहीं, अदालत में मामला जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद पर नई जानकारी सामने आ सकती है। NSUI की ओर से ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर उठाए गए सवालों और CBSE के जवाब पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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