पूरी रात जंगल में डटे रहे, किया खूंखार आतंकियों को ढेर! 'दाढ़ीवाले भूत' सूरज पराशर के मिशन की इनसाइड स्टोरी

Lt Cdr Suraj Parashar: देश की सुरक्षा में अपनी जान की परवाह किए बिना डटे रहने वाले वीर जवानों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया है। इस सम्मान समारोह में सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिसकर्मियों को उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए सम्मान दिया गया। इन्हीं बहादुर सैनिकों में भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर (Suraj Parashar) का नाम भी शामिल था।

सूरज को जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए एक जोखिम भरे अभियान में अहम भूमिका निभाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उस अदम्य साहस और नेतृत्व का प्रतीक है, जिसने कठिन हालात में भी सुरक्षा बलों को सफलता दिलाई। उनके साथ इस अभियान में शामिल अन्य जवानों को भी उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया। आइए जानते हैं सूरज के शौर्य और पराक्रम की कहानी...

Lt Cdr Suraj Parashar

भारतीय नौसेना की एलिट फोर्स MARCOS के कमांडो हैं सूरज पराशर

लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर भारतीय नौसेना के जांबाज अधिकारी हैं और देश की सबसे विशेष और कठिन सैन्य इकाइयों में गिनी जाने वाली MARCOS (मरीन कमांडो फोर्स) का हिस्सा हैं। MARCOS कमांडो को समुद्र, जंगल और दुर्गम इलाकों में विशेष अभियानों के लिए तैयार किया जाता है। नवंबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के चुंटावाड़ी गांव में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान सूरज पराशर ने असाधारण साहस, सूझबूझ और नेतृत्व का परिचय दिया।

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भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर चलाए गए इस ऑपरेशन में उन्होंने मोर्चे पर डटे रहते हुए दो खतरनाक आतंकवादियों को ढेर करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी बहादुरी और मिशन के प्रति समर्पण ने ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Shaurya Chakra Suraj Parashar

ऑपरेशन चुंटावाड़ी में 2 आतंकियों को किया ढेर

लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर ने 5 और 6 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के चुंटावाड़ी गांव में चलाए गए संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली थी। यह अभियान सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद शुरू किया गया था। अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा। आतंकवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए। इसके बावजूद लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर ने धैर्य और समझदारी दिखाते हुए अपनी टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने ऐसी रणनीतिक जगह चुनी, जहां से आतंकवादियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके।

घर में छिपे थे आतंकवादी

जानकारी के अनुसार, आतंकवादी चुंटावाड़ी गांव के एक घर में छिपे हुए थे। मुठभेड़ के दौरान घिरे हुए आतंकवादियों में से एक ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान कुछ जवानों को मामूली चोटें भी आईं। हालात की गंभीरता को समझते हुए सूरज पराशर ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और छिपे हुए दूसरे आतंकवादी को निशाना बनाकर फायरिंग शुरू कर दी।

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का असर हुआ और रात करीब 8:30 बजे एक A++ श्रेणी के विदेशी आतंकवादी को मार गिराया गया। यह ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण पल था, जिसने पूरे अभियान की दिशा बदल दी। आतंकवादी के मारे जाने के बाद भी अभियान समाप्त नहीं हुआ। सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ इलाके में डटे रहे।

पूरी रात संभाला मोर्चा

लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर ने अंधेरे और कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरी रात जंगल के बीच इलाके की निगरानी जारी रखी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी आतंकी मौके से भाग न सके। अगले दिन सूर्योदय होते ही उन्होंने बरामदगी अभियान का नेतृत्व किया। ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और अन्य युद्ध सामग्री बरामद की। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह अभियान सुरक्षा बलों के बेहतर समन्वय और जवानों की बहादुरी के कारण सफल हो सका।

इन जवानों को भी मिला शौर्य चक्र

ऑपरेशन चुंटावाड़ी में बहादुरी दिखाने के लिए लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर के साथ असिस्टेंट कमांडेंट मोहम्मद शफीक, लेफ्टिनेंट कमांडर राम गोयल और कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इन सभी जवानों ने जोखिम भरे हालात में साहस का परिचय देते हुए अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

MARCOS क्या है?

MARCOS (मरीन कमांडो फोर्स) भारतीय नौसेना की स्पेशल फोर्स यूनिट है, जिसे देश की सबसे एलिट सैन्य टुकड़ियों में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1987 में हुई थी और इसे समुद्र, तटीय क्षेत्रों, जंगलों तथा दुश्मन के इलाके में विशेष अभियान चलाने के लिए तैयार किया जाता है। आतंकवाद विरोधी कार्रवाई, बंधक बचाव मिशन, समुद्री सुरक्षा और गुप्त सैन्य अभियानों में MARCOS की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

MARCOS कमांडो बनने की प्रक्रिया बेहद कठिन मानी जाती है। चयनित जवानों को कई महीनों तक कड़ी शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। उन्हें पानी के भीतर युद्ध, पैराशूट जंप, लंबी दूरी की तैराकी, जंगल युद्ध और क्लोज कॉम्बैट जैसी विशेष तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाता है। कठिन प्रशिक्षण के कारण बहुत कम उम्मीदवार ही इस यूनिट का हिस्सा बन पाते हैं।

अपनी गोपनीय और तेज कार्रवाई के लिए MARCOS कमांडो को अक्सर, दाढ़ीवाला फौज (Bearded Army), समुद्र के भूत (Ghosts of the Sea), Crocodiles और दाढ़ीवाले भूत भी कहा जाता है। खास बात यह है कि भारतीय नौसेना में आम तौर पर साफ-सुथरी शेव रखने का नियम होता है, लेकिन MARCOS कमांडो को ऑपरेशन की जरूरतों और उनकी विशेष पहचान के कारण दाढ़ी रखने की अनुमति दी जाती है। वे दुश्मन के इलाके में चुपचाप घुसकर मिशन को अंजाम देने में माहिर होते हैं। भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्सेज और वायुसेना की गरुड़ कमांडो फोर्स की तरह MARCOS भी देश की सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद स्पेशल फोर्स इकाइयों में शामिल है।

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