BJP National Executive: सेमीफाइनल से पहले भाजपा का शक्ति प्रदर्शन और संदेश
आमतौर पर ऐसा होता नहीं है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पहले BJP कोई शक्ति प्रदर्शन करे। लेकिन आज से दिल्ली में शुरु हुई BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पहले ऐसा किया। यह बताने के लिए कि मोदी की अगुवाई में भाजपा अजेय है।

BJP National Executive: भाजपा ने रोड शो के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा का बढता कारवां रूकने वाला नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि में संभवत: गुजरात की प्रचंड जीत है लेकिन इस जीत की खुशी में हिमाचल और दिल्ली की हार का गम भी है। इसलिए रोड शो के जरिए जहां गुजरात की प्रचंड जीत का जश्न मनाया जा रहा है वहीं हिमाचल और दिल्ली की हार पर मंथन भी होगा।
इस साल 2023 में देश के नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे। इसे 2024 का सेमीफाइनल कहा जा रहा है। भाजपा कार्यकारिणी में इन नौ राज्यों में होने वाले चुनाव पर भी मंथन होगा क्योंकि इन राज्यों में चुनाव के समय भाजपा का बहुत कुछ दांव पर लगेगा। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इन राज्यों में भाजपा की जीत को मोदी के कामकाज और लोकप्रियता पर जनता की मुहर के रूप में देखा जाएगा। इन राज्यों में बड़ी जीत मोदी और भाजपा को 2024 के आम चुनाव की सबसे बड़ी दावेदार बना देगी। हालांकि मोदी की लोकप्रियता आज भी शिखर पर है, लेकिन महंगाई और बेरोजगारी जैसे प्रश्न भाजपा की चुनावी किस्मत पर ग्रहण लगा सकते हैं या जीत के फासले को कम कर सकते हैं।
भाजपा की सबसे बड़ी चिंता उसके सहयोगी दलों का साथ छोड़ना है। भाजपा लोकसभा चुनाव के पूर्व एनडीए के कुनबे को फिर से बड़ा करने की कोशिश में जुटी है। भाजपा की पूरी कोशिश होगी कि उसकी छतरी से छिटके दल वापस लौट आएं जिससे 2024 की राह आसान हो जाए। नरेंन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 2014 और 2019 के आम चुनावों में लगातार जीत हासिल करके एक इतिहास रचा, जो 1967 और 1971 में इंदिरा गांधी द्वारा हासिल की गई उपलब्धि के समान था। हालांकि यह भी एक सच है कि जब विधानसभा चुनावों की बात आई तो राज्यों में भाजपा को सत्तारूढ़ कराने में प्रधानमंत्री मोदी से ज्यादा सहयोगी दलों की क्षमता भाजपा के काम आई।
2018 और 2021 के बीच हुए 23 राज्यों के चुनाव में भाजपा ने जो जीत का स्वाद चखा, उसमें बड़ी भूमिका भाजपा के विभिन्न राज्यों के सहयोगी दलों ने निभाई। 2022 में, जब भाजपा ने उत्तर प्रदेश, गुजरात और उत्तरराखंड में अच्छी जीत दर्ज की, तब मोदी का जादू पूरे रंग में नजर आया। यह भाजपा के लिए अच्छी खबर है लेकिन हिमाचल प्रदेश में आंतरिक फूट के कारण मिली हार ने पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी के खतरे की ओर भी इशारा किया है।
भले ही भाजपा कई राज्यों में आतंरिक गुटबाजी का सामना कर रही हो लेकिन उसके बाद भी विपक्ष मोदी को सीधी चुनौती देने की स्थिति में नहीं है। कांग्रेस अकेेले अपने दम पर तो बिल्कुल भी नहीं। हिमाचल में मनोबल बढ़ाने वाली जीत के बाद आगामी नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए एक बड़े पुनरूद्धार का आखिरी बड़ा मौका हो सकते हैं। इनसे यह भी पता चल जाएगा कि राहुल की भारत जोड़ो यात्रा का कोई राजनैतिक प्रभाव पड़ा है या नहीं।
अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव बहुत महत्व के नहीं होगे क्योकि इनमें से अधिकांश राज्यों में उनकी उपस्थिति नगण्य है। हालांकि गुजरात में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय पार्टी बनने के बाद आप पार्टी की पूरी कोशिश इन राज्यों में भी कांग्रेस के वोट बैक में सेंध लगाने की होगी जैसे गुजरात में लगाई। आम आदमी पार्टी एक विकल्प के रूप में उभरी है लेकिन भाजपा के बजाय कांग्रेस के विकल्प के रूप में।
भले ही कांग्रेस ने आप के हाथों पंजाब गंवाया हो या फिर गुजरात में कांग्रेस की अपमानजनक हार के लिए आप पार्टी को जिम्मेदार बताया जा रहा हो लेकिन मोदी के इस वर्चस्व और आप के उभार के दौर में एक तथ्य यह भी है कि कांग्रेस ने 20 फीसदी का अपना न्यूनतम वोट प्रतिशत बनाए रखा है। इसलिए वह भविष्य के किसी भी भाजपा विरोधी गठबंधन या चुनौती के लिए अहम बनी रहेगी। जब तक वह अपने वोट बैंक को बनाए रखेगी तब तक किसी दूसरी पार्टी या गठबंधन के लिए मोदी को बिना कांग्रेस के चुनौती देना असंभव है।
मोदी की लोेकप्रियता का पहला चुनाव पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में होगा जिसकी शुरूआत फरवरी में होगी। भाजपा की परीक्षा तो त्रिपुरा में होगी जहां सत्ता बचाने के लिए भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री को बदल दिया था। भाजपा अगर उत्तर पूर्व के चारों राज्यों में अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने में सफल रहती है तो भाजपा की यह एक बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि जिस क्षेत्र की राजनीति 2014 तक कांग्रेस तय करती थी, अब वहां भाजपा का परचम होगा।
इसके बाद कर्नाटक के चुनाव होेंगे जहा भाजपा को सरकार बचाने की चुनौती होगी। दक्षिण का कर्नाटक इकलौता ऐसा राज्य है जहां भाजपा की सरकार है। हालांकि 2018 के चुनाव में भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी लेकिन सरकार कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर बना ली थी। भाजपा ने एक साल बाद कांग्रेस में दल बदल करवाकर अपनी सरकार बनायी और इस समय सत्ता उसी के हाथ में है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से ही आते हैं ऐसे में कांग्रेस का पूरा जोर कर्नाटक जीतने पर होगा, यह भी भाजपा के लिए एक चुनौती होगी।
इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव होंगे। 2018 कें विधानसभा चुनाव में भाजपा को तीनों राज्यों में हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन मध्य प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस के नेताओं का दल बदल करवाकर सरकार बना ली थी। राजस्थान में कांग्रेस के नेताओं की सार्वजनिक लड़ाई के बाद भाजपा को बेहतर अवसर उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मजबूत है। इन तीन हिंदीभाषी राज्यों में मोदी की लोकप्रियता की असली परीक्षा होगी। इसके साथ ही भाजपा की एक बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई दक्षिण के एक और राज्य तेलंगाना में होगी, जहां इसी साल चुनाव होने हैं। भाजपा की कोशिश हर हाल में केसीआर को सत्ता से बेदखल करने की होगी क्योकि तेलंगााना के मुख्यमंत्री से भाजपा के रिश्ते बेहद बुरे हैं और भाजपा तेलंगाना की लड़ाई पश्चिम बंगाल की तर्ज पर प्रतिष्ठा की लड़ाई बनाकर लड़ने वाली है। मोदी मैजिक तेलगांना में चलेगा कि नहीं इस चुनाव में तय होगा।
भाजपा की सबसे बड़ी ताकत प्रधानमंत्री मोदी के प्रति वोटरों का बरकरार रहने वाला जनसमर्थन है। 2009 से 2019 के आम चुनावों तक भाजपा ने राष्ट्रीय वोट शेयर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर लगभग दोगुनी कर ली है। तमाम सबूत यही कह रहे हैं कि आज वह दोगुनी ताकतवर हो गयी है। बेरोजगारी बढ़ने और मंहगाई चरम पर होने के बाद भी भाजपा के वोटर डिगे नहीं है।
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मोदी जैसा शुभंकर भाजपा के पास होने के बाद भी इसी साल नौ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव भाजपा की अग्निपरीक्षा लेंगे। इसमें भाजपा कितनी सफल होती है यह तो चुनाव परिणाम ही बताएगा लेकिन यह तय है कि 2023 के विधानसभा चुनाव 2024 के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए आम चुनाव का सेमीफाइनल होगा। भाजपा के साथ विपक्ष का प्रदर्शन भी 2024 की तस्वीर साफ कर देगा।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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