गुजरात चुनाव में महिला वोटरों पर है बीजेपी का पूरा जोर
राष्ट्रीय राजनीति में भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह निश्चित रूप से बहुत मेहनत से चुनाव लड़ते और लड़वाते हैं, लेकिन गुजरात में वे हर बार किसी लोकल नेता की तरह चुनाव लड़ते हैं। इस बार भी मोदी और शाह की चुनावी मुद्राएं गुजरात में अपने किसी घर के ही नेता जैसी ही है, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने शासक बना कर जिनको गुजरात की सत्ता में बिठाया हैं उनमें से ज्यादातर का कोई जनाधार नहीं है, और चुनाव जितवाने की ताकत तो बिल्कुल ही नहीं है।

इसीलिए, मोदी और उनके हनुमान अमित शाह ने गुजरात में जो चुनावी रणनीति की जाजम बिछा रखी है, उस में इस बार महिला वोटरों पर पूरा फोकस है। देश की राजनीति के ये दोनों कद्दावर जानते हैं कि फरवरी व मार्च 2022 में हुए पांच राज्यों के चुनावों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने भाजपा को अधिक वोट दिया है और 2019 के आम चुनाव में बीजेपी पहली बार सबसे अधिक महिला वोट पाने वाली पार्टी बन गई थी।
फिर सामने दो दिग्गज महिलाएं, सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी भी हैं। लेकिन बीमार सोनिया और यूपी में बुरी तरह से हार चुकी प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस गुजरात में कोई मजबूत दावा करेगी इसकी उम्मीद कम है। गुजरात में वैसे भी कांग्रेस कोई बहुत ताकतवर राजनीतिक पार्टी नहीं रह गई है। फिर भी बीजेपी का ज्यादा फोकस महिलाओं पर है, तो इसके पीछे मोदी और शाह की रणनीति यही है कि विधानसभा चुनावों में लगातार हारती जा रही कांग्रेस के पूरी तरह से सफाये का लक्ष्य महिलाओं के जरिए आसानी से साधा जा सकता है।
प्रधानमंत्री जब जब "अपने" गुजरात आये हैं, हर बार यहां की महिलाओं की ताकत, क्षमता, ममत्व, प्रभाव और संबंधों को सहेजने तथा विरासत संभालने वाली के रूप में जबरदस्त प्रशंसा की है। गुजरात गौरव अभियान के उद्घाटन अवसर पर जून महीने में वड़ोदरा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था "ये जो 21 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजना है, इनमें से अधिकांश योजनाएं महिला केंद्रित हैं। ये योजनाएं महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सशक्तिकरण के लिए हैं।"
उससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च में अहमदाबाद में आयोजित पंचायत महासम्मेलन में कहा था "गुजरात सौभाग्यशाली है कि हमारे प्रदेश में गांवों के विकास की ताकत महिलाओं के हाथ में है, यहां पंचायत व्यवस्था में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक है।"
इसी साल अप्रैल में बनासकांठा जिले में बनास डेयरी के नए परिसर के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि "बनासकांठा की महिलाएं अपने बच्चों से ज्यादा अपने जानवरों की रक्षा करती हैं। यह त्याग और तपस्या है, जिसके लिए मैं नमन करता हूं।" हालांकि, सद्भावना लेने के नजरिये से महिलाओं पर बीजेपी का यह फोकस कोई नया नहीं है। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 2007 में महिला मतदाताओं का वोट हासिल करने की योजना बनाई थी।
सन 2002 में गोधरा दंगों के बाद, गुजरात में दंगों की ही चर्चा होती रही, तो 2007 में, मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी चर्चा को ही विकास की तरफ स्थानांतरित कर दिया। मोदी जानते थे कि विकास महिलाओं और युवाओं को तुरंत प्रभावित करता है। इसलिए, उन्होंने उस वर्ग पर ध्यान केंद्रित किया और सफलता भी मिली। अपने भाषणों में दिल को छू लेने वाली बातें कहने में माहिर नरेंद्र मोदी जैसा कि अब कह रहे हैं, तब भी कहा था - "बहनों, अगर आपको कोई परेशानी है तो भाई मानकर मुझे सिर्फ एक पोस्टकार्ड लिखना, फिर देखना कि तुम्हारा यह भाई किस तरह से बहनों के लिए काम करता है।"
तस्वीर साफ है कि भाजपा के महिला समर्थकों का सबसे महत्वपूर्ण वर्ग ग्रामीण इलाकों में बसता है और उनमें से ज्यादातर परिवार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले हैं। संभवतया बीजेपी और उसकी सरकारों की कल्याणकारी योजनाएं भी मुख्य रूप से उन्हीं के लिए लक्षित हैं।
2014 और 2019 के बीच गरीबों के लिए स्वीकृत 17 लाख घरों में से लगभग 68 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हैं। उज्ज्वला योजना, स्वच्छता अभियान और जल से नल जैसी योजनाओं में भी महिलाओं पर ही फोकस है। फिर गुजरात तो शुरू से ही कृषि में महिलाओं की सबसे बड़ी सहभागिता वाला प्रदेश रहा है, जहां पर जमीन की मालिकाना में महिलाओं के हक का अनुपात सबसे ज्यादा है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2017 के चुनाव के दौरान गुजरात में 4.35 करोड़ में से 2.97 करोड़ मतदाताओं (69%) ने वोट दिया, जिनमें से 1.37 करोड़ महिलाएं थीं। जबकि उससे पहले 2012 के चुनाव में 3.81 करोड़ मतदाताओं में से 2.74 करोड़ मतदाताओं (72%) ने वोट दिया जिनमें से 1.26 करोड़ महिला मतदाता थीं।
भाजपा ने 2007 के बाद जो चुनाव जीते, उसमें यह भी निष्कर्ष निकला कि युवा और महिला मतदाताओं ने भाजपा को अधिक वोट दिया, तथा उनमें से भी भाजपा से अधिक नरेंद्र मोदी के चेहरे को वोट दिया। जब से यह निष्कर्ष सामने आया है तब से बीजेपी का फोकस युवाओं के साथ साथ महिलाओं पर भी बढ़ गया है।
इसका एक बड़ा फाय़दा यह हुआ है कि कांग्रेस इससे बैकफुट पर आ गई है। मोदी की आलोचना करके कांग्रेस युवाओं और महिलाओं के वोटों को खोना नहीं चाहती है। इसलिए हाल ही में गुजरात कांग्रेस ने एक अघोषित फैसला किया है कि 2022 के विधानसभा चुनाव तक वह बीजेपी की तो आलोचना करेगी, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर नरेंद्र मोदी की आलोचना नहीं करेगी।
सौ बातों की एक बात यह है कि गुजरात में विधानसभा चुनाव का माहौल गर्मा गया है, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी आम आदमी पार्टी के लिए बिसात बिछाने की फिराक में कुल दस बार गुजरात आ चुके हैं। बीते पांच महीनो में प्रधानमंत्री मोदी पांच बार और अमित शाह सात बार गुजरात घूम कर घर घर बीजेपी के बंदनवार बांध चुके हैं।
इस बार भाजपा का पूरा फोकस महिलाओं पर केंद्रित है। गुजरात कांग्रेस के नेता ये बात समझते हैं कि इस बार महिला और युवा वोटर ही फोकस में रहेंगे, लेकिन कांग्रेस की दो सबसे बड़ी महिला नेता सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के पास पता नहीं देश में ऐसा कौन सा काम है कि चुनाव सर पर है, फिर भी वे अब तक गुजरात नहीं आई हैं।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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