Ayodhya Ram Mandir: भारत के भाग्य का नया सूर्योदय है राम मंदिर का निर्माण
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में श्री राम मंदिर का पुनर्निर्माण और प्रभु श्री रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा मात्र एक धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह भारत के भाग्य का नया सूर्योदय है।

यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अभ्युदय का अमृत काल भी है।
सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि से भरे हमारे देश में सांस्कृतिक धरोहर हमारी पहचान है। धर्म, भाषा, रूपरेखा, शैली और विविध संस्कृतियों और जीवन शैलियों के बाद भी भारत एक है। उसकी आत्मा एक है। हम सब एक दूसरे से अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हुए हैं। इसी जुड़ाव को बढ़ाने की दिशा में प्रभु श्री राम के मंदिर का निर्माण एक महत्वपूर्ण कदम है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर हमें अपनी साझी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखने में मदद देगा।
राम भारतीय संस्कृति के प्रेरणा पुरुष हैं। एक आदर्श राजा, आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श मित्र हैं। हम भारतीय जिन सात्विक मानवीय गुणों को सदियों से पूजते आए हैं, वे सभी राम के व्यक्तित्व में निहित हैं। इसीलिए श्री राम, मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और हमारी आस्था के केंद्र में हैं, हमारे चेतन-अवचेतन मन में हैं और चिर काल से इस देश के मानस में बसे हुए हैं।
यहाँ राम सब के हैं और सब राम के हैं। चाहे पूरब हो या पश्चिम, उत्तर हो या दक्षिण, राम हमारे मानस में समाये हुए हैं। देश के किसी भी हिस्से में जाएँ, आपको लोगों के नाम में राम मिलेगा - दक्षिण में रामय्या, रामचन्द्रन या रामनाथन हो या उत्तर में रामशरण, राम सिंह या रामदास, राम सभी में हैं। सुबह की राम राम से लेकर जय सिया राम और जय श्री राम हमारे लिए अभिवादन और अभिनन्दन हमारे व्यवहार में समाहित/ सन्निहित हैं।
भारत ही नहीं राम का संदेश भागौलिक सीमाओं से परे, सार्वभौम और कालातीत है। उनकी प्रासंगिकता महज भारतीय उपमहाद्वीप तक ही सीमित नहीं है। राम कथा के अनगिनत संस्करण दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों जैसे थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया, म्यांमार, लाओस में आज भी प्रचलित हैं। आज भी भगवान राम और देवी सीता का चरित्र चित्रण इन देशों की लोक परंपराओं का हिस्सा हैं। आज यही राम हमारे मानस से निकल कर प्राकट्य में आ रहे हैं।
राम के आदर्शों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता एक लोकहितकारी न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था को जिसमें सभी के लिए शांति, न्याय और समानता हो, सुनिश्चित करती है। इसीलिए राम मंदिर का निर्माण न केवल भारतीय सांस्कृतिक एकता का एक अद्वितीय प्रतीक है, यह सुशासन और सामाजिक समरसता की ओर प्रवृत्त करने की दिशा में एक महती प्रयास भी है।
मंदिर ही एक वह जगह होती है जहां सभी वर्गों, जातियों, और समुदायों के लोग एकत्र होते हैं और साझा व्यवहार करते हैं जिससे धर्मिक एकता का संवर्धन होता है। रामायण में श्रीराम की कथा ने सभी वर्गों और समुदायों को एक साथ लाने का संदेश दिया है तथा भारतीय समाज में धर्म, नैतिकता, और सत्य के मूल्यों को प्रोत्साहित किया है।
निःसंदेह समाज में एकता और सभी धर्म-सम्प्रदायों के बीच समरसता की ओर यह एक महत्वपूर्ण कदम है। 22 जनवरी को होने वाले प्रतिष्ठा समारोह में वाल्मिकी और रवि दास मंदिर के पुजारियों की उपस्थिति और महर्षि वाल्मिकी के नाम पर अयोध्या धाम हवाई अड्डे का नामकरण, माता शबरी के नाम पर भोजनालय, निषाद राज के नाम पर अतिथि निवास, सामाजिक एकता, न्याय और सद्भाव का ही एक उदाहरण है।
अयोध्या में नव निर्मित राममन्दिर करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और भारत के पुनर्जागरण का प्रतीक है बल्कि यह भारत की सोई अस्मिता और आत्मविश्वास के जागरण का प्रतीक भी है। श्री राम जन्म भूमि का आंदोलन हिन्दू समाज का आत्म साक्षात्कार है। यह इस बात का प्रमाण है कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हिन्दू साढ़े पाँच सौ बरस की लंबी लड़ाई लड़ और जीत सकते हैं। सच में अयोध्या में राम लला का भव्य राष्ट्र मंदिर का निर्माण सभी भारतीय नागरिकों के लिए सदियों पुराने सपने के पूरे होने जैसा है। पांच सौ वर्षों बाद रामनगरी का वैभव व कीर्ति लौट रही है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख महंत श्री नृत्य गोपाल दास, के शब्दों में, "मंदिर निर्माण के साथ सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के भाग्य का नया सूर्य उदित होगा। नि:संदेह यह अवसर हर्ष और उल्लास का है। अयोध्या इस तरह प्रसन्न है, जैसे कि अपने आराध्य का पुन: प्राकट्य हो रहा हो।"
सच में सामूहिक चेतना से जो काम होते हैं, उनमें अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। आज सम्पूर्ण देश प्रसन्न है, जन-मानस आह्लादित है। जिन असंख्य लोगों ने राममंदिर आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी है, उनकी आत्माएं प्रसन्न हो रही होंगी, क्योंकि उनका बलिदान अब सार्थक होने जा रहा है। इसी के साथ मंदिर निर्माण आंदोलन की इति भी होगी जिसने भारतीय जनमानस की चेतना को लगभग तीन दशकों तक एक सूत्र में पिरोकर रखने का काम किया।
इसे विधि की व्यवस्था भी कह सकते हैं कि नव-निर्मित मंदिर में श्री राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का शुभ कार्य राम जन्मभूमि आंदोलन के महानायक पूर्व उप प्रधानमंत्री और सबके सम्माननीय श्री लालकृष्ण आडवाणी और देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हो रहा है जो स्वयं भी राम जन्मभूमि आंदोलन के नायकों में से एक रहे हैं।
मंदिर निर्माण के न केवल धार्मिक व् सांस्कृतिक बल्कि अनेक अन्य पहलू भी हैं जिसमें सामाजिक और आर्थिक प्रमुख हैं। मंदिर से न केवल सामाजिक समरसता बढ़ेगी बल्कि आर्थिक संवर्धन भी होगा। अयोध्या हिन्दुओं का तीर्थस्थल पहले से है, लेकिन राम मंदिर निर्माण के बाद इसका दर्जा भी अमरनाथ जैसी तीर्थ यात्राओं जैसा हो जाएगा। यह आने वाले समय में हरिद्वार, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, कामरूप, द्वारका, श्री जगन्नाथ पुरी जैसे हिंदू तीर्थ स्थलों के बीच स्थापित हो जायेगा।
महत्त्वपूर्ण बात यह भी है कि अयोध्या हिंदुओं के लिए ही नहीं, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए भी महत्त्व रखती है। ऐसे में अयोध्या अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल के तौर पर उभरेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। धार्मिंक पर्यटन का मॉडल न केवल आस्था का संवर्धन करेगा बल्कि बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से पिछड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश की समृद्धि के द्वार खुल जाएंगे। सकारात्मक रूप से सोचें तो अयोध्या ने अपने विकास का मार्ग राम मंदिर के केंद्र में सुनिश्चित कर लिया है।
निस्संदेह राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, और धार्मिक घटना है जो देश को एकता, सांस्कृतिक समृद्धि, और सच्चे धर्मिक मूल्यों की दिशा में एकाग्र कर रही है। नव-निर्मित मंदिर ने भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों को सुलझाने का एक अप्रतिम उदाहरण स्थापित किया है जो भविष्य में देशवासियों को परस्पर सद्भाव के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। हमें पूर्ण विश्वास होना चाहिए कि राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक नए युग का प्रादुर्भाव करेगा जो देश को सांस्कृतिक एकता, भ्रातृत्व, और समरसता की दिशा में आगे ले जायेगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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