दीदी ने चली गजब सियासी चाल, 15 अप्रैल को 'बंगाल दिवस' का ऐलान कर BJP की मंशा पर फेरा पानी
पश्चिम बंगाल सरकार ने विधानसभा में बंगाल दिवस (Bengal Day) को लेकर 7 सितंबर को एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में स्पष्ट कर दिया गया कि अब से हर साल 15 अप्रैल को पोइला वैशाख (बंगाली नववर्ष) के दिन बंगाल दिवस मनाया जाएगा। हालांकि, भाजपा इस दिन का विरोध कर रही है, क्योंकि भाजपा 20 जून को बंगाल दिवस मनाने पर अड़ी है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा इस दिन को चुनने के पीछे बहुत बड़ा सियासी कारण माना जा रहा है क्योंकि, भाजपा 20 जून को राज्य दिवस मनाना चाहती है। लेकिन ममता भाजपा की सियासी चाल को कामयाब होने देना नहीं चाहती हैं। इसलिए उन्होंने विधानसभा में प्रस्ताव पास करवाकर राज्यपाल को भी चुनौती दे दी है। अब देखने वाली बात होगी की राजभवन से क्या प्रतिक्रिया आती है।

जानें ममता ने कैसे भाजपा की सियासी चाल पर फेरा पानी
द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी के पूर्व सांसद प्रोफेसर सुगाता बोस ने कहा कि 20 जून का दिन 1947 के 'सांप्रदायिक नरसंहार' की याद दिलाता है। यह विभाजन के दुखद इतिहास का एक दुखद फुटनोट है। उन्होंने आगे कहा कि इस साल की शुरुआत तक पश्चिम बंगाल में राज्य दिवस मनाने की कोई मिसाल नहीं है, लेकिन भाजपा 20 जून को राज्य दिवस के रूप में मना रही है क्योंकि उनके संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हिंदुओं के लिए विभाजन चाहते थे। जबकि पीएम मोदी विभाजन के लिए पंडित नेहरू को दोषी ठहराते हैं, हम देखते हैं कि वे बंगाल का राज्य दिवस मनाते हैं जो बंगाल के विचार के खिलाफ है।
ममता बनर्जी ने भाजपा को दिया जवाब
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कहा कि बंगाल के लोग 20 जून का समर्थन नहीं करते हैं। वह हिंसा और रक्तपात का पर्याय है। विभाजन को राज्य स्थापना दिवस के रूप में चिह्नित करता है। ममता बनर्जी ने पिछले हफ्ते कहा था कि केंद्र का राज्य के स्थापना दिवस के रूप में 20 जून का दिन चुनना गलत है। इसपर फैसला विधानसभा में लिया जाएगा।












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