वोटर लिस्‍ट की जांच पर क्‍यों आगबबूला हुईं ममता बनर्जी? बोलीं- EC बैक डोर से NRC लागू करने करना चाह रहा

Voter list investigation: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गुरुवार ने तीखा हमला बोलते हुए चुनाव आयोग पर कुछ लोगों से नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण मांगने को लेकर 'बैक डोर' से विवादास्पद राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग जुलाई 1987 और दिसंबर 2004 के बीच पैदा हुए मतदाताओं को अलग-थलग कर रहा है और 'मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन' के नाम पर उनसे नागरिकता के दस्तावेज मांग रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग 'भाजपा के मुखपत्र' की तरह व्यवहार कर रहा है और पूछा कि क्या वह पिछले दरवाजे से एनआरसी को लागू करने की कोशिश कर रहा है। आइए जानते हैं ममता बनर्जी ने और क्‍या-क्‍या कहा? साथ ही जानते हैं कि आखिर चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्‍ट की जांच करने के आदेश पर आखिर ममता बनर्जी क्‍यों भड़क उठी हैं?

voter list investigation

चुनाव आयोग के फैसले पर क्‍यों भड़की ममता बनर्जी?

गौरतलब है कि भारत के चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्‍ट का गहन पुनरीक्षण करने का आदेश जारी किया है। चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार बिहार के अलावा कुल छह राज्‍यों की वोटर लिस्‍ट की गहन जांच की जाएगी जहां पर 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन राज्‍यों में पश्चिम बंगाल भी शामिल है। इस जांच में अवैध बांग्लादेशी वोटरों को वोटर लिस्‍ट से बाहर किया जाएगा। याद रहे पश्चिम बंगाल में अत्‍यधिक संख्‍या में बांग्लादेश वोटर्स हैं। जो चुनाव आयोग की जांच में वाेटर लिस्‍ट से बाहर हो जाएंगे।ये ही वजह है कि पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल

दीघा में मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे चुनाव आयोग से दो पत्र मिले हैं, जिनमें प्रत्येक में 25-30 पृष्ठ हैं। मैं अभी तक उन्हें विस्तार से नहीं पढ़ पाई हूं। लेकिन सरसरी तौर पर देखने से मुझे जो समझ में आया है, उसके अनुसार आयोग अब 1 जुलाई, 1987 और 2 दिसंबर, 2004 के बीच पैदा हुए मतदाताओं से एक घोषणा पत्र मांग रहा है, जो पत्रों में से एक में अनुबंध डी है, जहां उन्हें नागरिकता के प्रमाण के रूप में अपने माता-पिता दोनों के जन्म प्रमाण पत्र जमा करने होंगे।"

ममता बनर्जी ने कहा "अत्यंत चिंता" का विषय है, यही वजह है कि उन्होंने आनन-फानन में प्रेस बुलाकर इस मुद्दे को संबोधित किया। चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगते हुए टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि यह कदम एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने कहा, "मुझे चुनाव आयोग के इस कदम के पीछे का कारण या इन तारीखों को चुनने का तर्क समझ में नहीं आ रहा है। यह किसी घोटाले से कम नहीं है। मैं आयोग से स्पष्टीकरण मांगती हूं कि क्या वे बैक डोर से एनआरसी को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। वास्तव में, यह एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक लगता है, जिसका विपक्ष में हर राजनीतिक दल को विरोध करना चाहिए।"

भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है चुनाव आयोग

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा की इच्छा के आधार पर काम कर रहा है और दस्तावेजों की मांग करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकार को चुनौती दी। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर इशारा करते हुए कहा, "चुनाव आयोग केंद्र और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से परामर्श किए बिना एकतरफा तरीके से ऐसा कैसे कर सकता है, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? वे हमारे साथ बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं और ऐसा केवल एक निश्चित आरएसएस प्रचारक की इच्छा को पूरा करने के लिए कर रहे हैं, जो अब व्यावहारिक रूप से देश चला रहा है।"

उन्होंने आगे दावा किया कि इसी तरह का एक पत्र चुनाव वाले बिहार को भी भेजा गया था, लेकिन आरोप लगाया कि वहां कुछ नहीं होगा क्योंकि राज्य पर भाजपा का शासन है। बनर्जी ने आरोप लगाया, "बिहार में कुछ नहीं होगा क्योंकि उस राज्य पर भाजपा का शासन है और वहां राज्य के चुनाव दरवाजे पर हैं। उनका असली निशाना बंगाल है। वे वैध युवा मतदाताओं के नाम हटाना चाहते हैं। कई माता-पिता अपने जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं कर पाएंगे। वे बंगाल के प्रवासी श्रमिक समुदाय, छात्रों, ग्रामीणों और अशिक्षित मतदाताओं को निशाना बना रहे हैं।"

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