कौन हैं राजीव कुमार? जो बने बंगाल ने नए DGP, कभी ममता के फोन टैप का लगा था आरोप
DGP Rajeev kumar, पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक (डीजी और आईजीपी) नियुक्त किया। उन्होंने राज्य पुलिस बल की कमान संभाली, उन्होंने मनोज मालवीय की जगह ली है।
आईपीएस राजीव कुमार मुख्यमंत्री के सबसे करीबी अधिकारी माने जाते हैं। सारदा चिटफंड मामले में राजीव कुमार का नाम आने के बाद उनके आवास पर सीबीआई की रेड के खिलाफ खुद ममता बनर्जी ने धरना दिया था।

राजीव कुमार फिलहाल सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग में प्रधान सचिव हैं। उन्हें सीएम ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है और वह अपनी जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी कौशल के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले उन्होंने राज्य आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के अतिरिक्त डीजीपी के रूप में कार्य किया था। 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें एडीजी सीआईडी के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया था।
राजीव कुमार सिर्फ ममता बनर्जी के चहेते अधिकारी नहीं है। बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के पसंदीदा अधिकारी रहे हैं। उनका कैरियर विवादों औऱ अनेक उपलब्धियों से भरा हुआ है। 1989 बैच के अधिकारी कुमार के पास आईआईटी रूड़की से इंजीनियरिंग की डिग्री है। वह कोलकाता पुलिस के आयुक्त, संयुक्त आयुक्त (STF) और महानिदेशक (CID) जैसे प्रमुख पदों पर काम कर चुके हैं।
आज ममता के सबसे विश्वासपात्र अधिकारी राजीव कुमार पर 2009 में एसटीएफ प्रमुख के तौर पर कार्य करते हुए टीएमसी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव मुकुल रॉय फोन टैपिंग का आरोप लगाया था। रॉय ने दावा किया था कि, लेफ्ट सरकार के कहने पर राजीव कुमार ने तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी का फोन टैप किया था। साल 2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं तो उन्होंने राजीव कुमार को एक कम महत्व वाला पद देकर उन्हें दंड दिया। जिसका अधिकारियों ने विरोध भी किया था।
2013 में, जब सारदा चिटफंड घोटाला की राजीव कुमार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का नेतृत्व किया और सत्तारूढ़ सरकार से उनकी निकटता के चलते उनकी प्रशंसा और आलोचना दोनों हुई। अब राजीव कुमार ने ममता की पुलिस की कमान संभाल ली है। लेकिन बीजेपी ने राजीव कुमार की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं।
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