TMC की मांग, बूथ पर लोकल पोलिंग एजेंट वाला नियम हो लागू, चुनाव आयोग ने हफ्ते भर पहले था बदला
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की अगुवाई में चुनाव आयोग से मांग की है कि आयोग पोलिंग बूथ पर स्थानीय एजेंट वाला पुराना नियम फिर से लागू करें जिस नियम में कहा गया था कि किसी भी मतदान केंद्र पर उसी व्यक्ति को पार्टियां एजेंट बना सकती हैं जिसका नाम बूथ पर मतदाता के रूप में दर्ज हो।

पिछले सप्ताह ही बदला था नियम
इस नियम में पिछले सप्ताह ही चुनाव आयोग ने ढील दी थी जिसके बाद अब ऐसा कोई भी व्यक्ति जो उस विधानसभा का मतदाता हो पोलिंग बूथ पर एजेंट बन सकता है।
मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) आरिज आफताब से मुलाकात के बाद बंदोपाध्याय ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पोलिंग बूथ पर पार्टियों का एजेंट उसी व्यक्ति को होना चाहिए जो उस इलाके स्थानीय निवासी हो जहां पर मतदान केंद्र स्थित है जैसा कि पहले होता रहा है।
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टीएमसी ने की पुराना नियम लागू करने की मांग
बंदोपाध्याय ने कहा कि "बीजेपी की मांग के बाद चुनाव आयोग ने पिछले सप्ताह ही पार्टियों द्वारा स्थानीय पोलिंग एजेंट रखने की लंबे समय चली आ रही स्थापित परंपरा को बदल दिया था इसके चलते पहले चरण के चुनाव में कई बूथों पर बहुत सारी मुश्किलें खड़ी हुई हैं क्योंकि बहुत सारे एजेंट एक दूसरे को जानते भी नहीं।"
उन्होंने कहा कि टीएमसी ने सीईओ से आग्रह किया है कि वे उसी इलाके के पोलिंग एजेंट रखने के पहले का नियम फिर से बहाल करें। ऐसा होने से गड़बड़ियों की आशंका भी कम होगी और शेष सात चरणों में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित होगा।
जब बंदोपाध्याय से टीएमसी की मांगों पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा "सीईओ ने हमारी बातों को सुना है लेकिन ज्यादा कुछ कहा नहीं है।"

'2 मई को पता चल जाएगा, कौन है जनता की पसंद'
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें चुनाव आयोग से उनके हक में फैसला मिलने की उम्मीद है तो बंदोपाध्याय बोले "हमारा काम उनके लिए मुद्दों को सामने लाना है। हम लोकतांत्रिक परंपराओं में विश्वास करते हैं।"
भाजपा के इन दावों पर कि टीएमस परिणामों के बारे में डरी हुई है क्योंकि उसका जनाधार तेजी से घट रहा है, उन्होंने कहा 2 मई के बाद यह साफ हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल में कौन जनता की पसंद है।












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