दिल्ली में अवैध निर्माण पर रेखा गुप्ता सरकार का बुलडोजर एक्शन! 94 इमारतें ढहाई, 114 संपत्तियां सील

Rekha Gupta Delhi: दिल्ली में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ रेखा गुप्ता सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। राजधानी के अलग-अलग इलाकों में लगातार चल रही कार्रवाई के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। अवैध इमारतों, नियमों के उल्लंघन और फायर सेफ्टी की अनदेखी को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में दिल्ली सरकार ने "जीरो टॉलरेंस" नीति के तहत बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। इस अभियान में न सिर्फ अवैध निर्माणों को गिराया जा रहा है, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों को सील करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है।

Rekha Gupta Government continues crackdown

🔷124 प्रॉपर्टियों की जांच में क्या मिला? 6 दिन में 94 अवैध निर्माण ध्वस्त

सरकारी एजेंसियों ने राजधानी के विभिन्न जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाया। राजस्व विभाग ने 124 संपत्तियों का निरीक्षण किया और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया गया, वहां तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई। सरकार का कहना है कि यह अभियान सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसका मकसद शहर में अवैध निर्माण की जड़ों तक पहुंचना है। इसी वजह से हर जिले में अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया गया है।

पिछले छह दिनों के भीतर नगर निगम (MCD) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 94 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया है। इसके अलावा 114 संपत्तियों को सील भी किया गया है। सरकार का मानना है कि अवैध निर्माण न सिर्फ शहरी नियोजन को प्रभावित करते हैं, बल्कि कई बार जान-माल के लिए भी खतरा बन जाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में अब तेज और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।

🔷खानपुर और सैनिक फार्म पर भी फोकस

खानपुर और सैनिक फार्म जैसे इलाकों में भी अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों की समीक्षा की जा रही है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन भवनों में स्वीकृत नक्शे से बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं, उनकी पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि नियमों को दरकिनार कर बनाए गए निर्माण अब जांच के दायरे से बाहर नहीं रहेंगे।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने भी अपने स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन आर्किटेक्ट्स की भूमिका गंभीर नियम उल्लंघनों में पाई जाए, उन्हें अनुमोदित पैनल से हटाने और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इस कदम को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अवैध निर्माणों में तकनीकी मंजूरी देने वालों की जवाबदेही भी तय करने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

🔷फायर सेफ्टी और इंश्योरेंस पर नई तैयारी

सरकार केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती। भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कई नई व्यवस्थाओं पर भी काम चल रहा है। दिल्ली सरकार भवनों, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम और अधिक लोगों के आने-जाने वाली इमारतों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस मॉडल पर विचार कर रही है।

प्रस्ताव के मुताबिक बीमा कंपनियां केवल उन्हीं इमारतों को कवर देंगी जो सभी सुरक्षा और संरचनात्मक मानकों को पूरा करती हों। इसके साथ ही फायर विभाग के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने की भी तैयारी है, ताकि आपात स्थिति में प्रतिक्रिया प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो सके।

🔷जीरो टॉलरेंस का संदेश

रेखा गुप्ता सरकार का कहना है कि दिल्ली में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजस्व विभाग, एमसीडी और डीडीए जैसी एजेंसियां मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

सरकार का संदेश साफ है कि जो लोग नियमों का पालन करेंगे, उन्हें चिंता की जरूरत नहीं है, लेकिन अवैध निर्माण और सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता करने वालों के खिलाफ आने वाले दिनों में और भी सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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