'ये ट्रेलर है,असली पिक्चर बाकी है!', कॉकरोच पार्टी की सरकार को खुली चुनौती, BJP नेता बोले- 'नाम बदलो वरना...'

Cockroach Janta Party Protest Abhijeet Dipke: देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी राजनीतिक हलचल का गवाह बना है। 06 जून को यहां हुए एक बेहद अनोखे और विशाल प्रदर्शन ने देश के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। यह प्रदर्शन किसी पुरानी और स्थापित राजनीतिक पार्टी ने नहीं, बल्कि सोशल मीडिया से शुरू हुए एक नए आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने किया था।

इस सड़क प्रदर्शन के ठीक एक दिन बाद, पार्टी के मुखिया और संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को सीधे शब्दों में खुली चुनौती दे डाली है। दीपके का साफ कहना है कि जंतर-मंतर पर जो कुछ भी दिखा, वह तो 'महज एक ट्रेलर' था, असली फिल्म आना अभी बाकी है।

CJP Protest Abhijeet Dipke

दूसरी तरफ आंदोलनकारियों के इस अजीबोगरीब नाम को लेकर सत्ता पक्ष (BJP) की ओर से भी तीखे पलटवार शुरू हो गए हैं। इसके बाद से यह पूरा मामला अब एक बड़े सियासी दंगल का रूप ले चुका है। आइए जानें आखिर यह पूरा मामला क्या है और दिल्ली में इस वक्त माहौल इतना गर्म क्यों है।

🔷'कॉकरोच' जब एकजुट होते हैं, तो क्या होता है? दीपके का बड़ा दावा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को हुए जोरदार प्रदर्शन के बाद, CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक और आक्रामक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने आंदोलन में शामिल होने वाले हजारों युवाओं और छात्रों का शुक्रिया अदा किया।

दीपके ने लिखा,

"कल हममें से हजारों लोगों ने एक नया इतिहास रच दिया है। जंतर-मंतर पर हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने सरकार को यह दिखा दिया है कि जब देश के 'कॉकरोच' एक साथ खड़े होते हैं, तो वे क्या कर सकते हैं। यह तो सिर्फ एक छोटा सा ट्रेलर था।"

दीपके ने अपनी पोस्ट में इस बात पर भी जोर दिया कि इस आंदोलन में शामिल होने वाले ज्यादातर लोग वो छात्र और युवा थे, जिन्होंने अपनी जिंदगी में पहले कभी किसी धरने या प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया था। लेकिन शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, पेपर लीक और रोजगार के संकट को लेकर उनके मन में जो गुस्सा और निराशा थी, उसने उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

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उन्होंने कहा कि जब तक हम अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आएगा। एकजुट और शांतिपूर्ण आंदोलन को सरकार भी दबा नहीं सकती, इसलिए 'कॉकरोच' को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।

🔷केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को 7 दिन का अल्टीमेटम

इस पूरे विरोध प्रदर्शन का मुख्य निशाना देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षाओं में हो रही लगातार धांधलियों और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। जंतर-मंतर पर भाषण के दौरान अभिजीत दीपके ने पहले तो शिक्षा मंत्री को 6 जून शाम 5 बजे तक का समय दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने सरकार को 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया।

अभिजीत दीपके ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होने वाली है। धर्मेंद्र प्रधान ने देश की एक पूरी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। अगर अगले 7 दिनों के भीतर उन्हें पद से नहीं हटाया गया या उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दिया, तो हम अपने इस जमीनी आंदोलन को और बड़ा और उग्र करने के लिए मजबूर होंगे।" दीपके ने यह भी एलान किया कि वे इस पूरे मुद्दे पर आगे की रणनीति साझा करने के लिए रविवार देर शाम इंस्टाग्राम लाइव के जरिए देश के युवाओं से सीधे रूबरू होंगे।

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🔷हाथ में तिरंगा और चेहरे पर कॉकरोच का मास्क

जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन आम प्रदर्शनों से बिल्कुल अलग और अनोखा था। इसमें शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी, उनके माता-पिता और युवा प्रोफेशनल्स दिल्ली पहुंचे थे। प्रदर्शन में शामिल होने महाराष्ट्र के नागपुर से आए एक छात्र ने बताया कि वह शिक्षा और सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रणाली में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए इतनी दूर से आया है।

  • प्रदर्शन के दौरान छात्र अपने चेहरों पर कॉकरोच के मुखौटे (मास्क) लगाए हुए थे।
  • युवाओं के हाथों में देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, पढ़ाई की किताबें और फूल थे।
  • पूरा जंतर-मंतर परिसर "धर्मेंद्र प्रधान को जाना होगा" के नारों से गूंज रहा था।

CJP के नेताओं का आरोप है कि सरकार छात्रों की जायज चिंताओं को सुनने के बजाय इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उठने वाली विरोध की आवाजों को दबाने में लगी हुई है।

🔷ऑनलाइन मीम से कैसे बना इतना बड़ा आंदोलन?

आपको जानकर हैरानी होगी कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की शुरुआत कोई राजनीतिक दल के रूप में नहीं हुई थी। दरअसल, यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा की गई एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य (सटायर) और मीम के रूप में शुरू हुआ था। देखते ही देखते देश के बेरोजगार और परेशान युवाओं ने इसे लपक लिया और यह एक बड़ा डिजिटल आंदोलन बन गया।

अब यह ऑनलाइन मूवमेंट देश के युवाओं के नेतृत्व वाला एक बड़ा जमीनी अभियान बन चुका है। CJP का मुख्य फोकस अब इन चार बड़े मुद्दों पर है:

  • पेपर लीक: देश में आए दिन होने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले।
  • भर्ती में देरी: सरकारी नौकरियों के विज्ञापन निकलने के बाद सालों तक परीक्षा और जॉइनिंग न होना।
  • बेरोजगारी: युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की भारी कमी।
  • जवाबदेही: सरकारी संस्थाओं और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करना।
  • छावनी में तब्दील हुई दिल्ली: 1000 से ज्यादा जवान तैनात

इस अनोखे प्रदर्शन की भनक लगते ही दिल्ली पुलिस और प्रशासन के हाथ-पॉंव फूल गए थे। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरी दिल्ली में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। जंतर-मंतर और उसके आस-पास के प्रमुख इलाकों में 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। सिर्फ इतना ही नहीं, दिल्ली के बाहरी बॉर्डर्स, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अंतर-राज्यीय बस टर्मिनलों (ISBT) पर भी पैनी नजर रखी जा रही थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की मदद के लिए अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की लगभग 40 कंपनियों को तैनात किया गया था। इसके अलावा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सरकारी आवास के चारों तरफ भी सुरक्षा घेरा बेहद मजबूत कर दिया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

🔷'आंदोलन करो भाई, पर पहले नाम तो बदलो!'बीजेपी नेता अनिल विज की सलाह

इस पूरे आंदोलन और पार्टी के नाम को लेकर अब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। हरियाणा के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस मामले को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन तो किया, लेकिन पार्टी के नाम पर तंज कसने से खुद को नहीं रोक पाए।

भाजपा नेता कद्दावर अनिल विजय ने कहा, ''कॉकरोच एक बहुत ही गंदे कीट का नाम है। इसको छोटा बच्चा भी देख कर चप्पल से कुचल देता है। संघर्ष करो यह प्रजातंत्र में सबको अधिकार है परंतु अपना नाम बदल लो।''

अनिल विज ने इसके पीछे का तर्क देते हुए अपने पोस्ट में लिखा कि 'कॉकरोच' एक ऐसा जीव है जिसे देखते ही एक छोटा बच्चा भी अपने पैर की चप्पल से कुचल देता है। ऐसे में किसी आंदोलन या संगठन का ऐसा नाम रखना समझदारी नहीं है, इसलिए बेहतर होगा कि वे अपनी पहचान के लिए कोई दूसरा और गरिमामय नाम चुनें। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े ये युवा आने वाले दिनों में क्या रुख अपनाते हैं।

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