Sharmistha Panoli को किन शर्तों पर कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत? जानें कब-कैसे शुरू हुआ विवाद?
Sharmistha Panoli gets bail: सोशल मीडिया पर की गई एक विवादित टिप्पणी को लेकर गिरफ्तार की गई लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। बुधवार, 5 जून को न्यायमूर्ति राजा बसु की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सशर्त राहत दी।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मर्यादा, धार्मिक भावनाओं का सम्मान और कानून के दायरे में पुलिस की कार्रवाई के अधिकार पर भी जोर दिया।

Sharmistha Panoli gets bail: क्या है पूरा मामला?
22 वर्षीय शर्मिष्ठा पनोली एक लॉ स्टूडेंट हैं।उन्होंने अपने एक सोशल मीडिया वीडियो में उन बॉलीवुड अभिनेताओं की आलोचना की थी जिन्होंने हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। वीडियो में शर्मिष्ठा एक सोशल मीडिया यूजर को जवाब दे रही थीं, जिसने सवाल उठाया था कि भारत ने पाकिस्तान पर "बिना वजह गोलीबारी क्यों की?"
इस प्रतिक्रिया में शर्मिष्ठा ने कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा और एक समुदाय विशेष के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसी के आधार पर उनके खिलाफ कोलकाता के गार्डनरीच थाने में पहला मामला दर्ज हुआ था , जिसके बाद 30 मई की रात को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर मामला गरमा गया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गईं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने ममता बनर्जी सरकार की आलोचना करते हुए इस गिरफ्तारी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
कोर्ट ने इन शर्तों पर दी जमानत
कोर्ट ने शर्मिष्ठा को अंतरिम जमानत देते हुए कई सख्त शर्तें लागू कीं:
- उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। विदेश यात्रा के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।
- उन्हें ₹10,000 की जमानत राशि जमा करनी होगी।
- उन्हें पुलिस जांच में सहयोग देना अनिवार्य होगा।
साथ ही कोर्ट ने कोलकाता पुलिस को निर्देश दिया कि शर्मिष्ठा द्वारा गिरफ्तारी से पहले दर्ज कराई गई धमकी की शिकायत पर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर पोस्ट के बाद उन्हें धमकियां मिल रही थीं, जिससे उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति राजा बसु की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, "हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम किसी की धार्मिक भावना को आहत करें। किसी अपराध की सजा सात साल से कम होने का अर्थ यह नहीं कि पुलिस गिरफ़्तारी नहीं कर सकती। अगर भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 की शर्तें पूरी हों, तो पुलिस को पूरा अधिकार है कि वह कार्रवाई करे।"
कोर्ट ने नागरिकों को सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी, विशेष रूप से धर्म और समुदाय से जुड़े मामलों पर। कोर्ट ने कहा कि हमारा देश विविधताओं से भरा है, और ऐसे समाज में सामाजिक समरसता बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शर्मिष्ठा के खिलाफ गार्डनरीच थाने में दर्ज FIR को ही मुख्य मामला माना जाएगा, क्योंकि वह पहले दर्ज हुई थी। उनके खिलाफ अन्य थानों में दर्ज सभी FIR पर कार्यवाही रोकने का आदेश दे दिया गया है, जिससे एक ही मामले में बार-बार गिरफ्तारी की संभावना समाप्त हो गई है।
राजनीतिक विवाद भी गरमाया
इस मामले में भाजपा समेत कई विपक्षी नेताओं ने पश्चिम बंगाल सरकार पर "विचार की स्वतंत्रता का दमन" करने का आरोप लगाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पलटवार करते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी और जमानत का यह मामला सोशल मीडिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के बीच के संतुलन पर एक बार फिर बहस छेड़ गया है।
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