कोलकाता कांड: क्यों अपने करियर के सबसे बुरे दौर में फंसीं ममता बनर्जी? TMC की महिला MLA भी उठा रहीं सवाल
Kolkata Doctor Case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समय जिस दबाव में दिख रही हैं, वह उनके सीएम बनने के बाद कभी नहीं दिखा। तृणमूल सुप्रीमो पूरी तरह से बैकफुट पर हैं। उन्हें समझ नहीं रहा कि अपनी साथी महिला ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय मांग रहे जूनियर डॉक्टरों को कैसे समझाया जाए। कैसे आम बंगालियों, खासकर महिलाओं के गुस्से को शांत किया जाए।
ममता डॉक्टरों से माफी मांग रही हैं। उनकी शर्तों को मानने के लिए तैयार हैं और मान भी रही हैं। लेकिन, फिर भी आंदोलनकारी डॉक्टरों की नाराजगी कम नहीं हो पा रही है। अब तृणमल की महिला विधायकों ने पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार और टीएमसी की स्थिति की जो हालत बयां की है, उससे काफी हद तक तस्वीर साफ हो जाती है कि मुख्यमंत्री कितने बड़े सियासी संकट का सामना कर रही हैं।

तृणमूल की महिला विधायकों ने रखी अपने दिल की बात
इंडियन एक्सप्रेस ने पश्चिम बंगाल की टीएमसी की सभी 35 महिला एमएलए से बात की है। खास बात ये है कि ये विधायक टीएमसी सांसद जवाहर सरकार के इस्तीफे के बाद अपनी बात रखने की हिम्मत दिखाने लगी हैं।
इन विधायकों में जिन्होंने अपनी बात बेहिचक सामने रखी है, उनके कहने मतलब कुल मिलाकर यही है कि प्रदेश की सड़कों पर नाराजगी है। पुलिस ने अपनी ड्यूटी नहीं की। कुछ न कुछ तो गड़बड़ जरूर हुआ है। हम यहां कुछ टीएमसीपी महिला विधायकों की बात रखने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि कुछ ने खुलकर अपने विचार जाहिर किए हैं और कुछ ने शायद मौन रहकर ही अपनी भावनाएं बयां करने की कोशिश की है।
'पार्टी और सरकार की छवि खराब हुई है....'
मसलन, कुशामंडी की तृणमूल एमएलए रेखा रॉय का कहना है, 'निश्चित रूप से सड़कों पर और लोगों के मन में गुस्सा है, खासकर महिलाओं के। यह भी सही है कि विपक्ष इसका राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर हा है...यह सही है कि पुलिस को अपनी ड्यूटी करना चाहिए...पार्टी और सरकार की छवि खराब हुई है....।'
'मेरे इलाके की महिलाएं नाराज हैं'
इसी तरह नौदा की विधायक साहिना मुमताज खान कहती हैं, 'सब चीजें दीदी की कान तक भी नहीं पहुंच रही हैं...पहले अगर कोई हादसा होता था, वह मौके पर पहुंच जातीं, यह सुनिश्चित हो कि सभी चीजें ठीक से हैंडल की जाती। यह नहीं हुआ....हम सब दीदी के साथ हैं। पुलिस ने जो किया है, उससे निजी तौर पर मैं संतुष्ट नहीं हूं। यह 2024 है। क्या महिलाएं काम पर नहीं जाएंगी? मेरे इलाके की महिलाएं नाराज हैं और मैं उनका गुस्सा जाहिर कर रही हूं।'
'मैं विरोध प्रदर्शन के समर्थन में हूं'
वहीं मोथाबारी की विधायक सबीना यास्मीन कहती हैं, 'यह भयानक है। स्वाभाविक है कि महिलाएं और लड़कियां ज्यादा गुस्से में हैं। मैं विरोध प्रदर्शन के समर्थन में हूं। हमें पहले ही सड़कों पर उतर जाना चाहिए....सिर्फ राज्य में ही नहीं, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खिलाफ पूरे देश में- उन्नाव और हाथरस समेत। मैं कहूंगी कि कुछ (पुलिस) अधिकारियों को बहुत पहले ही सजा मिल जानी चाहिए थी। भ्रष्टाचार की बात सही है...लेकिन क्या आप सोचते हैं कि अगर ममता बनर्जी चली जाएंगी तो भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा?'
'कोलकाता ने ऐसा विरोध प्रदर्शन कभी नहीं देखा'
मानिकतला विधानसभा की तृणमूल एमएलए सुप्ती पांडे कहती हैं कि 'कोलकाता ने ऐसा विरोध प्रदर्शन कभी नहीं देखा, लोगों में एक अजीब सी बेचैनी है। लोग यह भी समझते हैं कि मुद्दे को बेमतलब लंबा खींचा जा रहा है.....मुख्यमंत्री पहले दिन से न्याय चाहती हैं, लेकिन निश्चित रूप से कुछ न कुछ गड़बड़ हुआ है। किसी ने कहीं बड़ी गड़बड़ी कर दी। संदीप घोष और उनके जैसे लोग अच्छे उदाहरण नहीं हैं।'
'बहुत ही अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है'
बैष्णबनगर की विधायक चंदना सरकार कहती है, 'मेरा ग्रामीण इलाका है, जहां कैंडल मार्च निकालने के लिए लोगों के पास समय नहीं है। लेकिन, इस घटना ने पूरे प्रदेश में लोगों पर असर डाला है....दीदी संवेदनशील रही हैं......(महिला)विधायकों को बहुत ही अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।'
'हमारे इलाके में जो प्रदर्शन हो रहे हैं, वह राजनीतिक नहीं हैं'
माणिकचक की विधायक साबित्री मित्रा कहती हैं कि 'यह दुखद और अस्वीकार्य है। हमारे इलाके में जो प्रदर्शन हो रहे हैं, वह राजनीतिक नहीं हैं और दिल से कर रहे हैं......' ममता बनर्जी 2011 से पश्चिम बंगाल की सत्ता में हैं और यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है। आजतक उन्हें कभी ऐसी हालत का सामना नहीं करना पड़ा, जब अपनी ही पार्टी की विधायक, वह भी महिलाएं सरकार और पुलिस-प्रशासन पर सीधे सवाल दाग रही हों।












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