Kolkata Doctor Case: ममता बनर्जी की पार्टी में उभरे मतभेद, कोलकाता कांड पर अलग-अलग सुर अलाप रहे TMC के नेता

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या ने पश्चिम बंगाल में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है, जिससे इस मामले को संभालने और उसके बाद के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक टकराव उजागर हो गया है। पार्टी के सदस्य प्रदेश सरकार के रवैए पर विभाजित हैं। इनमें से कुछ इसके ढीले रवैए की आलोचना कर रहे हैं।

टीएमसी के भीतर अन्य लोगों का मानना है कि विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना करने के लिए स्थिति का फायदा उठाया है। एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने नाम नहीं जाहिर होने देने की गुजारिश कर कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जो कहा जा रहा है, उसका अन्य नेताओं से समर्थन का अभाव चिंताजनक है, जो जनता और पार्टी के सदस्यों दोनों को गलत संदेश दे रहा है।

Kolkata Doctor Case

टीएमसी के वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्रा ने मौजूदा जन आक्रोश की तुलना पिछले वाम मोर्चा शासन के खिलाफ नंदीग्राम और सिंगूर भूमि अधिग्रहण विरोध प्रदर्शनों से की। उन्होंने कहा, 'हमने नंदीग्राम और सिंगूर भूमि अधिग्रहण विरोध प्रदर्शनों के दौरान वाम मोर्चा शासन के खिलाफ इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों को देखा था। यह टीएमसी थी जिसने उन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था।' उन्होंने कहा कि अगर लोग सरकार में बदलाव चाहते हैं, तो वे 2026 के विधानसभा चुनावों में वोट दे सकते हैं।

टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने इस भयानक अपराध की निंदा की है और कोलकाता के पुलिस आयुक्त विनीत गोयल और आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संजीव घोष के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की। रॉय ने इस घटना पर दुख और गुस्सा व्यक्त करते हुए उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया जो आत्महत्या की कहानी फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं।

रॉय ने सोशल मीडिया पर लिखा 'सीबीआई को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। पूर्व प्रिंसिपल और पुलिस आयुक्त का हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि पता चल सके कि आत्महत्या की कहानी किसने और क्यों फैलाई।' इसके बाद, कोलकाता पुलिस ने रॉय को पूछताछ के लिए तलब किया, जिसके बाद उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय में पुलिस की नोटिस को चुनौती दी।

वहीं पार्टी प्रवक्ता शांतनु सेन ने घोष के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाते हुए अपना पद छोड़ दिया। सेन ने कहा, 'मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि घोष को बचाने के प्रयास क्यों किए जा रहे हैं।' उन्होंने घोष और वर्तमान अस्पताल प्रशासन दोनों की उनकी विफलताओं के लिए आलोचना की।

हालांकि, सभी टीएमसी नेता रॉय और सेन के रुख से सहमत नहीं हैं। वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने प्रतिद्वंद्वी दलों के कथित राजनीतिक अवसरवाद की आलोचना की। वहीं रॉय की पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, घोष ने इस तरह की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, खासकर एक वरिष्ठ नेता से। उन्होंने कहा, 'मैं भी आरजी कर मामले में न्याय की मांग करता हूं। लेकिन मैं पुलिस आयुक्त के संबंध में इस मांग का पुरजोर विरोध करता हूं।'

इस बीच पीड़िता के लिए न्याय की मांग करते हुए पश्चिम बंगाल में ग्यारह दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। 31 साल की ट्रेनी महिला डॉक्टर की ड्यूटी के दौरान बलात्कार और हत्या कर दी गई, जिसका शव 9 अगस्त को मिला था। अपराध के सिलसिले में 10 अगस्त को एक नागरिक स्वयंसेवक को गिरफ्तार किया गया।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को आदेश दिया कि मामले को कोलकाता पुलिस से सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया जाए, जिसने 14 अगस्त को अपनी जांच शुरू की। अपनी सहकर्मी के लिए न्याय की मांग करने वाले जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे अधिकांश राज्य सरकार के अस्पतालों में आपातकालीन और ओपीडी बंद हैं।

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