जानिए क्या है 1991 का एक्ट जिसकी ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हो रही है चर्चा

वाराणसी, 16 मई। काशी विश्वनाथ के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद एक बार फिर से चर्चा में है। यह पूरा विवाद इसलिए एक बार फिर से चर्चा में है क्योंकि कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर सर्वे की इजाजत दी है। कोर्ट ने एएसआई से मस्जिद का सर्वे करने को कहा है और साथ ही इसकी वीडियोग्राफी भी करने को कहा है। लेकिन इस पूरे मामले को लेकर 1991 एक्ट की काफी चर्चा हो रही है। इस एक्ट का हवाला देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने भी कोर्ट के फैसले को गलत बताया था और कहा था कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी चाहिए, हम एक और मस्जिद नहीं खोने देंगे। ऐसे में आईए समझते हैं कि ये 1991 का एक्ट क्या है।

Recommended Video

    Gyanvapi Masjid Case: पहले केस से Survey तक जानिए ज्ञानवापी विवाद की पूरी कहानी | वनइंडिया हिंदी
     क्या है एक्ट का मूल स्वरूप

    क्या है एक्ट का मूल स्वरूप

    जहां पर कोई पूजा करता हो उसको लेकर 1991 में एक कानून बनाया गया। उस वक्त अयोध्या विवाद अपने चरम पर था, लेकिन तबतक मस्जिद को गिराया नहीं गया था। इसी दौरान पीवी नरसिम्हाराव की सरकार ने संसद में एक कानून पास किया, जिसमे कहा गया कि हम एक तारीख तय कर देते हैं, जिसके बाद के किसी भी धार्मिक स्थल के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। कानून के तहत 15 अगस्त 1947 के बाद किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदला नहीं जाएगा। इस कानून का लक्ष्य सभी धर्म के धार्मिक स्थल फिर चाहे वो मंदिर हो, मस्जिद हो या चर्च हो,उसके मूल स्वरूप को आजादी के बाद जैसा है वैसा ही रखा जाएगा और इसके ढांचे में बदलाव नहीं किया जाएगा।

    बाबरी मस्जिद विवाद के समय आया एक्ट

    बाबरी मस्जिद विवाद के समय आया एक्ट

    प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के सेक्शन 4(1) यह कहता है कि 15 अगस्त 1947 को अगर किसी मंदिर को मस्जिद बना दिया गया तो वह मस्जिद ही रहेगा और मस्जिद को मंदिर बना दिया गया तो वह मंदिर ही रहेगा। यानि आजादी के बाद अब इसके स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। अगर किसी भी विवादित ढांचे के स्वरूप में बदलाव के लिए कोर्ट में मामला आता है तो उस मामले की सुनवाई जुलाई 1991 के बाद नहीं की जा सकती है। इस तरह के मामले को खारिज कर दिया जाएगा।

    बाबरी मस्जिद को अलग रखा गया

    बाबरी मस्जिद को अलग रखा गया

    हालांकि इस कानून से बाबरी मस्जिद विवाद को अलग रखा गया क्योंकि उस वक्त बाबरी मस्जिद का विवाद कोर्ट में लंबित था। लेकिन बाबरी मस्जिद से इतर सभी विवादित ढांचों की सुनवाई पर रोक लगा दी गई थी। अगर कोई मंदिर है जिसे 1962 में तोड़कर मस्जिद बना दिया गया तो ऐसे मामले में कोर्ट यह देखेगा कि आजादी के वक्त वह स्थल कैसा था। 1947 में उस स्थल का जो स्वरूप था उसे वापस से उसी स्वरूप में फिर से स्थापित किया जाएगा।

    एएसआई के पास जा सकता है परिसर

    एएसआई के पास जा सकता है परिसर

    इस कानून के सेक्शन 4 (3) के तहत अगर कोई जगह जिसका ऐतिहासिक महत्व है उसे प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत नहीं लाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि एएसआई इसे एंसियंट मॉन्यूमेंट एंड ऑर्कियोलॉजिकल साइट्स एंड रिमेंस एक्ट 1958 के तहत अपने संरक्षण में लेकर संरक्षित करेगा। ऐसे में इस तरह की जगहों को मंदिर मस्जिद की जगह ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर देखा जाएगा। अगर किसी बिल्डिंग को बने 100 साल हो गए हैं इसका कोई ऐतिहासिक महत्व है तो इसे एएसआई संरक्षित कर सकता है। वर्ष 2007 में इस कानून का इस्तेमाल करते हुए शिमला के एक चर्च को ऐतिहासिक स्थल मानते हुए इसे एएसआई ने अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था।

    varanasi
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+