Varanasi News: पति की हत्या की साजिश में फंसी सोनम का काशी में हुआ तर्पण, जीते-जी किया गया क्रियाकर्म
Varanasi News: वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर एक अनोखी और विवादास्पद धार्मिक क्रिया ने सबका ध्यान आकर्षित किया है। महिला संगठनों ने पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार सोनम रघुवंशी का प्रतीकात्मक पिंडदान कर उसे समाज से बहिष्कृत घोषित कर दिया।
इस अनुष्ठान में बाकायदा धार्मिक विधि-विधान का पालन किया गया। सोनम की तस्वीर को आग के हवाले किया गया और उसका पिंड जलाकर बहिष्कार का संदेश दिया गया। महिला संगठनों का कहना है कि यह अपराध माफ करने योग्य नहीं है।

मेघालय में पति की हत्या की साजिश में सोनम की भूमिका सामने आने के बाद महिलाओं के गुस्से ने यह रूप लिया। आयोजकों ने बताया कि यह कदम सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि अपराध के खिलाफ सामाजिक चेतावनी है।
घाट पर पिंडदान, समाज से 'मृत' घोषित
अनुष्ठान का नेतृत्व कर रहे पंडित रामेश्वर शास्त्री ने कहा कि जीवित व्यक्ति का पिंडदान एक असाधारण और कठोर धार्मिक प्रक्रिया है। इसका अर्थ है कि अब समाज उस व्यक्ति को जीवित नहीं मानता।
शास्त्री ने आगे बताया कि यह कदम इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि सोनम ने विवाह संस्था और महिला मर्यादा को कलंकित किया है। ऐसे व्यक्ति को मोक्ष का अधिकार नहीं दिया जा सकता, यह प्रतीकात्मक दंड है।
समाज को देना था संदेश
'नारी सम्मान मोर्चा' की अध्यक्ष सुनीता सोनी ने कहा कि यह कदम भावनाओं का विस्फोट नहीं, बल्कि संयमित और ठोस विरोध है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ चुप्पी अब खतरा बन चुकी है।
उनका कहना था कि विवाह अब विश्वास का प्रतीक नहीं रह गया है, और ऐसी घटनाएं महिला अधिकारों को भी आघात पहुंचाती हैं। इसलिए यह सांकेतिक विरोध आवश्यक हो गया था।
घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई। कुछ लोगों ने इसे साहसी कदम कहा, तो कुछ ने इसे अतिवादी और अंधविश्वासी करार दिया।
सोशल मीडिया पर इस घटना ने खूब चर्चा बटोरी। कुछ ने इसे महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए जरूरी बताया, जबकि अन्य ने इसे व्यक्तिगत न्याय का खतरनाक उदाहरण माना।
दशाश्वमेघ घाट पर पुलिस तैनात रही और स्थिति पर नजर रखी गई। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जीवित व्यक्ति का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार विवादास्पद है और इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।












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