Shivanand Baba: वाराणसी के प्रसिद्ध पद्मश्री योग गुरु का निधन, 129 साल की उम्र में BHU में ली अंतिम सांस
Padma Shri shivanand baba passed away: वाराणसी के दुर्गाकुंड निवासी और पद्मश्री से सम्मानित योग गुरु स्वामी शिवानंद अब हमारे बीच नहीं रहे। शनिवार की रात बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
स्वामी शिवानंद जी का निधन रात 8:30 बजे हुआ, जिसके बाद उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया गया है कि उनकी अंत्येष्टि रविवार को की जाएगी, ताकि दूर-दराज से आने वाले अनुयायी उन्हें अंतिम विदाई दे सकें। स्वामी जी की उम्र 129 वर्ष थी और साल 2022 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था।

स्वामी शिवानंद का आश्रम वाराणसी के कबीरनगर में स्थित है, जहां वे अपने अनुयायियों के बीच योग और संयमित दिनचर्या का महत्व बताते थे। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे नियमित रूप से योग करते थे और स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू औषधियों के प्रयोग को रामबाण मानते थे।
संयम और योग को माना लंबी उम्र का राज
स्वामी जी का कहना था कि संतुलित आहार, प्राणायाम और अनुशासित जीवनशैली ही उनके दीर्घायु जीवन का रहस्य है। वे रोज सुबह तीन बजे उठते थे और दिन की शुरुआत स्नान तथा श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ से करते थे। खास बात यह थी कि वे बांग्ला में अनुवादित गीता का पाठ करते थे।
बताते हैं कि स्वामी शिवानंद ने कभी गंभीर बीमारी का सामना नहीं किया। वर्ष 2019 में जब उनकी स्वास्थ्य जांच कोलकाता और चेन्नई के अपोलो अस्पताल में हुई, तो डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह स्वस्थ पाया। यह उनकी नियमित योग साधना का ही प्रभाव था।
1896 में बांग्लादेश के सिलहट जिले में हुआ था जन्म
स्वामी शिवानंद खुद बताते थे कि उनका जन्म 8 अगस्त 1896 को वर्तमान बांग्लादेश के सिलहट जिले के हरीपुर गांव में हुआ था। बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के कारण उन्होंने योग और साधना को जीवन का आधार बना लिया।
योग गुरु शिवानंद प्रतिदिन सर्वांगासन करने के बाद शवासन करते थे। वे मानते थे कि यह अभ्यास न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक शांति भी देता है। वे अपने अनुयायियों को भी यही साधना करने की सलाह देते थे।
जीवनभर रहे अनुशासित, कभी नहीं पड़े बीमार
स्वामी जी के अनुयायी बताते हैं कि उन्होंने कभी भी स्वास्थ्य को लेकर कोई बड़ी परेशानी नहीं झेली। वे सादा भोजन करते थे और बाजारू दवाइयों की बजाय घरेलू नुस्खों को प्राथमिकता देते थे। यही वजह रही कि उन्होंने 129 साल की उम्र तक सक्रिय जीवन जिया।












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