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Kashi Tamil sangamam : नई शिक्षा नीति और विकसित भारत पर विचार-विमर्श, शिक्षकों और लेखकों ने साझा किए विचार

Kashi Tamil sangamam : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आयोजित काशी तमिल संगम 3.0 के अंतर्गत विशेष शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में देशभर के विद्वानों, शिक्षकों, लेखकों और विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, जिसमें नई शिक्षा नीति, मातृभाषा, संगम साहित्य और विकसित भारत की परिकल्पना प्रमुख रूप से शामिल थे।

कार्यक्रम में तंजावुर विश्वविद्यालय, पांडिचेरी विश्वविद्यालय और भारती दास कॉलेज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन प्रतिनिधियों ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों का दौरा किया और वहां के अनुसंधान, नवाचार तथा खेल सुविधाओं का अवलोकन किया। इसके बाद पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में शैक्षणिक सत्र आयोजित हुआ, जहां विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

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इस सत्र में प्रमुख वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति और मातृभाषा की अहमियत पर चर्चा की। आईआईटी-बीएचयू के प्रो. आर. के. मिश्रा ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मातृभाषा में शिक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनका मानना था कि इससे विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा और शिक्षा का स्तर बेहतर होगा। प्रो. मिश्रा ने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया और बताया कि कैसे यह नीति देश के भविष्य को आकार देने में मददगार साबित होगी।

प्रो. आनंदवर्धन शर्मा ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों की चर्चा की। उन्होंने महान कवि सुब्रमण्य भारती, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और अन्य तमिलनाडु के महान व्यक्तियों के योगदान का उल्लेख किया। प्रो. शर्मा ने बताया कि इन व्यक्तियों ने भारतीय संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने काशी और तमिलनाडु के संबंधों को एकजुटता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

आर्थिक विकास और सुशासन पर चर्चा

आईआईटी-बीएचयू से शोध करने वाले डॉ. एस. अरुल ने 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना पर विचार किए। उन्होंने आर्थिक विकास और सुशासन (गुड गवर्नेंस) के महत्व पर जोर दिया। डॉ. अरुल ने बताया कि भारतीय युवाओं को अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा, जो राष्ट्र निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया, जो देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।

वाराणसी की शिक्षिका डॉ. रचना शर्मा ने उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 73 नए कॉलेजों और 3 विश्वविद्यालयों की स्थापना से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आया है। इसके अलावा, उच्च शिक्षण प्रोत्साहन निधि जैसी योजनाओं ने विद्यार्थियों को बेहतर अवसर दिए हैं।

तमिलनाडु के प्रतिनिधियों के विचार

सत्र के अंत में तमिलनाडु से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभवों और विचारों का आदान-प्रदान किया। अरुण वेंकट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया, जिनके नेतृत्व में काशी तमिल संगमम जैसा कार्यक्रम आयोजित हुआ। भाग्यलक्ष्मी जी ने इस कार्यक्रम को 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करने वाला बताया और कहा कि वे इसे अपने विद्यार्थियों के साथ भी साझा करेंगी।

काशी तमिल संगम 3.0 ने शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाओं का आयोजन किया। यह कार्यक्रम न केवल काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों को उजागर करने का अवसर था, बल्कि इसने भारतीय संस्कृति और शिक्षा के भविष्य के लिए नई दिशा भी प्रदान की। इस तरह के कार्यक्रमों से न केवल ज्ञानवर्धन होता है, बल्कि यह समाज में एकता और समृद्धि की भावना को भी बढ़ावा देता है।

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