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​हरीश रावत ने क्यों कहा, पता नहीं कितने दिन कांग्रेस मुझे अपने से जोड़े रखना चाहती है, क्या है सियासी मायने ?

पूर्व सीएम हरीश रावत ने हार के बाद पहली बार निराश नजर आए

देहरादून, 6 अप्रैल। 2022 के विधानसभा में कांग्रेस चुनाव अभियान की कमान संभाल चुके पूर्व सीएम हरीश रावत ने हार के बाद पहली बार निराश नजर आ रहे हैं। ये निराशा हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए बयां करने की कोशिश की है। जिसके बाद हरीश रावत के बयान के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। हरीश रावत ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए हार के बाद कांग्रेस की ओर से उनको लेकर रूचि न दिखाए जाने का जिक्र किया है। हरदा ने कहा है कि कांग्रेस में भी मुझ पर रुचि घटती जा रही है, पता नहीं कितने दिन कांग्रेस मुझे अपने से जोड़े रखना चाहती है।

Why did Harish Rawat say, I dont know how many days Congress wants to keep me attached to it, what is the political meaning

पहली बार हरीश रावत के पोस्ट में निराशा

लालकुंआ से हार के बाद हरीश रावत कई बार हार के कारणों और चुनाव में कांग्रेस की करारी हार का जिक्र कर चुके हैं। लेकिन पहली बार हरीश रावत के पोस्ट में निराशा झलक रही है। हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लिखा है कि

चुनाव में हार के बाद बहुत से अपने लोगों ने उनसे दूरी बना ली है। हारे हुए व्यक्ति में रुचि कम होना स्वाभाविक है। कांग्रेस में भी मुझ पर रुचि घटती जा रही है, पता नहीं कितने दिन कांग्रेस मुझे अपने से जोड़े रखना चाहती है।

इमोशनल कार्ड तो नहीं

हरीश रावत राजनीति के सबसे धुरंधर खिलाड़ी माने जाते हैं। कहां पर कब क्या सियासी तीर चलाना है। इस बात को हरदा सही तरह से समझते हैं। ऐसे में हरीश रावत के इस पोस्ट के कई सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। कांग्रेस को आने वाले समय में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का चयन करना है। जिसमें फिलहाल प्रीतम खेमा ही हावी नजर आ रहा है। प्रीतम सिंह के नेता प्रतिपक्ष को लेकर दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में हरीश रावत खेमे को अपना अस्तित्व खतरे में लग रहा है। तो क्या हरदा इस बयान के जरिए इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं। या हरदा अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित है। इस तरह के कयासों के बीच हरीश रावत एक बार फिर से खुद को राजनीति में भी एक्टिव दिखा रहे हैं। बीते दिनों भाजपा के नेताओं सीएम से लेकर सभी बड़े चेहरे हरीश रावत से मुलाकात कर चुके हैं। जिसके बाद से हरदा को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जाने लगे थे। लेकिन हरदा इस बात को पूरी तरह से नकार चुके हैं, कि वे उम्र के इस पड़ाव में अब दूसरा विकल्प तलाश रहे हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालित नहीं होने को लेकर इतनी सुस्ती क्यों
हरीश रावत ने इस बार पोस्ट पिछले दो वर्षों से लगातार कुमाऊं के पिथौरागढ़-लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालित नहीं होने को लेकर शुरू की। हरीश रावत ने कहा कि दो वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण यात्रा का संचालन नहीं हो पाया, यह तो समझ में आता है, लेकिन इस बार भी यात्रा के संचालन को लेकर कुछ सुनाई नहीं दे रहा है। यह एक चिंता का विषय है। आखिर इसमें इतनी सुस्ती क्यों है। हरीश रावत ने कहा कि जब से सिक्किम से कैलाश मानसरोवर यात्रा प्रारंभ हुई, तब से निरंतर एक लॉबी इस कोशिश में है कि कुमाऊं मंडल की ओर से संचालित यात्रा रूट को छोड़ दिया जाए। चीन भी नहीं चाहता कि इस यात्रा का संचालन इस रूट से हो। क्योंकि यह काला पानी के जिस इलाके से होकर गुजरती है, चीन, सीमा विवाद के उस प्रसंग को उकसाने में भी नेपाल के पीछे है। चीन के लिए असुविधाजनक होते हुए भी हमारे लिए एक बेहतर व्यापार मार्ग भी कैलाश मानसरोवर का यह यात्रा मार्ग उपलब्ध करवाता है। न जाने क्यों केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में अपेक्षित रुचि क्यों नहीं दिखाई जा रही है।

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