उत्तराखंड में एक साथ 8 IPS अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति को लेकर क्यों छिड़ा विवाद, जानिए अब किसको लेकर है चर्चा
IPS officers controversy: उत्तराखंड में आईपीएस अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। बता दें कि उत्तराखंड में पहली बार एक साथ आठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने आदेश जारी किए हैं। जिसके बाद से महकमे में हलचल तेज है।
इनमें से कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति को लेकर न जाने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। कुछ अधिकारियों को हाल ही में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। ऐसे में वे प्रतिनियुक्ति पर नहीं जाना चाहते हैं। इसको लेकर भी सवाल खड़े उठ रहे हैं। कि आखिर आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर क्यों नहीं जाना चाहते हैं।

इससे जहां अधिकारियों के प्रोफाइल पर असर पड़ेगा, इसके साथ ही उत्तराखंड में दूसरे आईपीएस अधिकारियों के अधिकारों पर ही असर पड़ सकता है। प्रतिनियुक्ति पर अब विवाद क्यों? जब शासन द्वारा प्रतिनियुक्ति के लिए सहमति दी जा रही थी और बाकायदा सूची भेजी जा रही थी, तब क्या शासन को पता नहीं था कि उत्तराखंड में आईपीएस कैडर में अधिकारियों की कमी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि उत्तराखंड के गृह सचिव ने तो अक्टूबर में ही अधिकारियों की सूची भेज दी थी।
ऐसे में विवाद बिल्कुल नहीं होना चाहिए। अब गृह मंत्री की चिट्ठी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। इसके साथ ही सरकार ने तय सीमा से अधिक यानि 13 अतिरिक्त आईपीएस आफिसर को दूसरे कैडर से प्रतिनियुक्ति पर ले रखा है। यानि आपके पास 23 ऑफिसर है, जो नियम विपरीत है। ऐेस में जब केंद्र ने प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए हैं तो राज्य सरकार को अधिकारी भेजने ही होंगे। माना जा रहा है कि कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर जाने को तैयार हैं।
इस बीच आईपीएस अधिकारियों के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के आदेश के बाद अब नया विवाद अधिकारियों के केंद्र में इम्पैनलमेंट को लेकर छिड़ गया है। केंद्र ने राज्य से बैचवार (1995 से 2006 तक) आईपीएस अधिकारियों के विभिन्न रैंक पर इम्पैनलमेंट के लिए उनकी विजिलेंस क्लियरेंस मांगी थी, लेकिन केंद्र की पहली चिट्ठी पर गृह विभाग ने कोई जबाव नहीं दिया।
अब रिमाइंडर आया तो जवाब में 2006 बैच के अधिकारियों को गायब ही कर दिया। जबकि, इससे अगले साल 2007 के चारों अधिकारियों के नाम इम्पैनलमेंट के लिए भेज दिए। इसके बाद से पुलिस महकमें में नई बहस छिड़ गई है। जिससे विवाद की स्थिति पैदा हो गई है।












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