मतदान के बाद भी पूर्व सीएम हरीश रावत की सक्रियता और घोषणाओं के पीछे क्या हैं सियासी मायने, जानिए
हरीश रावत अब भी घोषणाएं और चुनावी वादे करने में जुटे
देहरादून, 17 फरवरी। चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनाव की थकान न मिटाकर जनता के बीच जा रहे हैं, इतना ही नहीं हरीश रावत लगातार सक्रिय होकर प्रदेश के मुद्दों पर अपनी राय रख रहे हैं। इधर सोशल मीडिया में भी हरीश रावत अब भी घोषणाएं और चुनावी वादे करने में जुटे हैं। इसके पीछे हरीश रावत की खुद को बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हरीश रावत लगातार नजर आ रहे सक्रिय
उत्तराखंड में 1 माह से भी ज्यादा समय तक प्रत्याशियों और प्रचार-प्रसार में जुटे रहे दिग्गज अब मतदान के बाद चुनाव की थकान मिटा रहे हैं। इस बीच कई नेता अपने जीत के गुणा-भाग में भी लगे हैं। साथ ही सियासी दल अपने-अपने समीकरणों के हिसाब से सीटों के समीकरण बनाने में जुटे हैं। लेकिन कांग्रेस के बड़े चेहरे और चुनाव अभियान कमान संभाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनावी दौरे की तरह ही एक्टिव नजर आ रहे हैं। हरीश रावत लगातार लालकुंआ क्षेत्र में भ्रमण कर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। इतना ही नहीं मतदान के बाद भी हरीश रावत घोषणाएं करने में लगे हैं। अब उन्होंने तीन प्रमुख घोषणाएं की हैं। साथ ही भरोसा दिलाया है कि सरकार बनने पर इस घोषणाओं को पूरा किया जाएगा। हरीश रावत का दावा है कि उनकी सरकार आने पर मांगलिक गीत गाने वाली महिलाओं को 18 सौ रुपये पेंशन देंगे। उन्होंने मंगलगीत गाने वाले महिलाओं के लिए कांग्रेस की सरकार बनने पर 18 सौ रुपये की पेंशन दिए जाने की घोषणा की है।
10 मार्च तक कैसे बिताएंगे दिन
अपने फेसबुक पेज पर हरीश रावत ने लिखा है कि कई लोग उनसे पूछ रहे हैं कि आप 10 मार्च तक कैसे अपना दिन बिताएंगे। उन्होंने लिखा है कि वह उत्तराखंड और उन लोगों के लिए कुछ करना चाहते हैं, जिन उनके जीवन या राज्य के जीवन में महत्व रहा है। ऐसे ही लोगों में से एक हमारे गांवों में मंगलगीत गाने वाली महिलाएं भी हैं, जिनमें अधिकांश बुजुर्ग हैं। यह परंपरा कहीं टूट न जाए। इसलिए वह चाहते हैं कि इनको भी सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर वह तुरंत शगुन पेंशन प्रारंभ करेंगे। शगुन अक्षर मांगलिक गीत गाने वाली महिलाओं को बुजुर्ग आदि के बराबर ही 18 सौ रुपये पेंशन के रूप में दी जाएगी। इसके अलावा हरीश रावत ने घसियारी सम्मान पेंशन योजना शुरू करने की घोषणा की है। कांग्रेस की सरकार बनने पर इस घोषणा के तहत घसियारी महिलाओं को पांच सौ रुपये की सम्मान राशि प्रतिमाह पेंशन के रूप में दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर वह घसियारी मां-बहनों के लिए सम्मान पेंशन योजना शुरू करेंगे।
पुलिसकर्मियों को फिर दिलाया भरोसा
इतना ही नहीं हरीश रावत अब भी पुलिसकर्मियों से मिलकर अपना वादा दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा है एक विशेष वादा अपने पुलिस के जवानों से किया है, वह वादा उनके ग्रेड पे से जुड़ा है। सरकार में आने पर वह पुलिस कर्मियों की इस मांग और अन्य मांगों को प्राथमिकता के आधार पर हल करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकाल में उन्होंने पुलिस विभाग के रिक्त पदों को भरने में हमेशा वरीयता दी है। पुलिस भर्ती के रिकॉर्ड से और उनकी प्रमोशन की संख्या के रिकॉर्ड से भी इस बात को देखा व समझा जा सकता है। क्योंकि पुलिस को प्रत्येक परिस्थिति में 24 घंटे सातों दिन काम करना होता है। इसलिये वह स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि कांग्रेस के सत्ता में आने पर सामान्य तौर पर अन्य कर्मचारी संगठनों की मांगों से इतर पुलिस कर्मियों की मांगों को प्राथमिकता के तौर पर हल किया जाएगा। हरीश रावत सोशल मीडिया से लेकर फील्ड में जाकर अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं। जानकारों की मानें तो हरीश रावत का लक्ष्य मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना है। इसका जिक्र वो एक इंटरव्यू में भी कर चुके हैं। जिसमें उन्होंने साफ किया कि वे मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर घर बैठेंगे। इस बयान के बाद ये माना जा रहा है कि कांग्रेस इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है कि उन्हें सत्ता मिलने जा रही है। ऐसे में कांग्रेस की सरकार आने पर मुख्यमंत्री का चेहरा हरीश रावत बनेंगे इसको लेकर अभी हरीश रावत और उनके समर्थक माहौल बनाने में जुटे हैं।












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