उत्तराखंड: भाजपा-कांग्रेस को क्यों याद आईं मलिन बस्तियां, जानिए पर्दे के पीछे का गणित
चुनावी साल में मलिन बस्तियों के वोट बैंक पर बीजेपी कांग्रेस की नजर
देहरादून,23 अगस्त। उत्तराखंड मेंं विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मलिन बस्तियों के मालिकाना हक को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। बता दें कि उत्तराखंड में 11 लाख से ज्यादा वोटर हैं। जिन पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों की नजर है। बीजेपी की सरकार के चुनावी साल में मलिन बस्तियों को 2024 तक राहत देने के निर्णय के बाद से ही कांग्रेस लगातार राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। कांग्रेस मलिन बस्तियों को मालिकाना हक को लेकर चुनाव में जनता के बीच जाने का ऐलान कर चुकी है।

राज्य सरकार ने 3 साल की दी है राहत
प्रदेश की धामी सरकार ने प्रदेश की मलिन बस्तियों को 3 साल तक राहत देकर अतिक्रमण की जद में आ रहे बस्तियों को नहीं हटाने का निर्णय लिया। राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद से ही चुनावी साल में यह मुद्दा वोटबैंक का सबसे अहम मुद्दा बन गया है। मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने राज्य सरकार के इस फैसले पर आपत्ति दर्ज की है। कांग्रेस का आरोप है कि धामी सरकार मलिन बस्तियो में रह रहे लाखों लागों को गुमराह करने का काम कर रही है।
बस्तियों में रह रहे लोगों को मिले हक
कांग्रेस की सरकार में मलिन बस्ती विकास समिति के चेयरमेन रहे पूर्व विधायक और कांग्रेस के एससी विभाग प्रमुख राजकुमार मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने की मांग कर रहे हैं। राजकुमार ने बताया कि अक्टूबर 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कैटेगरी बनाकर मलिन बस्तियों के मुद्दे पर तेजी से काम शुरू किया। इसके लिए 3 टीमें भी बनाई गई जिन्होंने कई इलाकों में सर्वे भी किया। लेकिन जैसे ही इस मामले पर तेजी से काम शुरू हुआ तब तक आचार संहिता लग गया। और बीजेपी की सरकार आते ही मामला ठंडा बस्ता में डाल दिया गया। राजकुमार का आरोप है कि राज्य सरकार चुनाव तक इस मामले को टालने के लिए 3 साल का अध्यादेश लाकर बस्तियों में रहने वाले लोगों के साथ मजाक कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर नियमावलि में कोई कमी है तो सरकार को इसे ठीक करना चाहिए। सिर्फ चुनाव तक ही इस मामले को टालना सही नहीं है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर मलिन बस्तियों को मालिकाना हक दिलाने का काम कांग्रेस की सरकार ही करेगी।
बीजेपी का दावा सबको मिलेगी छत
इधर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता शादाब शम्स ने कांग्रेस पर मलिन बस्तियों के लोगों की भावना से खेलने का आरोप लगाया है। शादाब का कहना है कि जब न्यायालय ने नालों, नदियों, खालों के किनारे अवैध बस्तियों को हटाने का आदेश दिया है तो कोई भी सरकार ऐसे बस्तियों को झूठे सपने कैसे दिखा सकती है। शादाब ने कहा कि उनकी सरकार हर ऐसे व्यक्ति को छत दिलाने के लिए आवास योजना पर काम कर रही है। ऐसे में राज्य सरकार ने 3 वर्ष का समय मांगा है। जिससे इस दौरान ऐसे लोगों के लिए छत की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कांग्रेस पर मलिन बस्तियों के लोगों के वोटबैंक पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
582 बस्तियां, 11 लाख से ज्यादा निवासी
प्रदेश भर में 582 मलिन बस्तियां हैं, इनमें सबसे ज्यादा 132 बस्ती देहरादून में है। राजकुमार का दावा है कि ये वे आंकड़े हैं जो कागजों में है। लेकिन धरातल पर इससे कई ज्यादा बस्तियां हैं। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से इन बस्तियों में 11 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। राजकुमार ने बताया कि इन बस्तियों में सभी वर्ग के लोग रहते हैं ऐसे में इनको किसी पार्टी का वोटबैंक बताना गलत है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिस तरह से मलिन बस्तियों का मुद्दा गर्माया है। साफ है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने होने वाली है। ऐसे में चुनाव में मलिन बस्तियों का मुद्दा सबसे गर्म मुद्दा रहेगा।












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