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Uttarakhand News: साढ़े 8 KG की साइकिल से दयारा बुग्याल 11 हजार फीट पर साइकिलिंग, जानिए कौन है पूर्णिमा

Uttarakhand News उत्तराखंड में 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा ​है दयारा बुग्याल। जो कि प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन गतिविधियों के लिए जाना जाता है। 24 साल की पूर्णिमा ने दयारा बुग्याल में साइकिलिंग कर साहसिक पर्यटन का बड़ा संदेश​ दिया है।

पूर्णिमा रैथल गांव की रहने वाली हैं और जिस साइकिल से उन्होंने दयारा में साइकिलिंग की उसका वजन महज साढ़े आठ किलो है। जिससे बुग्यालों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। पूर्णिमा पैराग्लाइडिंग पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी कदम रख चुकी है।

Uttarakhand News Cycling 11 000 feet Dayara Bugyal 8 5 kg bicycle know who Purnima adventure tourism

पूर्णिमा ने दयारा के नोरी का डेरू, कुंती का सेरू से लेकर बकरिया टॉप तक करीब दस किमी एरिया में साइकिलिंग से बुग्यालों का दूरी नापी, जो कि बुग्याल क्षेत्र को नई पहचान दिलाने की दिशा में अभिनव प्रयास भी माना जा रहा है।

पैराग्लाइडिंग से भी दे चुकी हैं संदेश

उन्होंने हाल ही में पर्यटन गांव नटीण से पैराग्लाइडिंग कर क्षेत्र के बेटियों को हर क्षेत्र में मुकाम हासिल करने की प्रेरणा दी। उत्तरकाशी में पर्यटन का प्रमुख केंद्र दयारा बुग्याल में रैथल की बेटी पूर्णिमा ने साइकिलिंग कर साहिसक पर्यटन की दिशा में पहल की है।

दयारा बुग्याल 11 हजार फीट की ऊंचाई पर साइकिलिंग

पू​र्णिमा ने रैथल से दयारा बुग्याल 11 हजार फीट की ऊंचाई पर साइकिलिंग कर दयारा में नई पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। पर्यटक स्थल दयारा बुग्याल में स्कीइंग और ट्रेकिंग जैसी पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए जाना जाता है। पूर्णिमा ने दयारा बुग्याल में साइकिलिंग कर यहां साहसिक पर्यटन की दिशा में नई पहल की है।

रैथल की पूर्णिमा, पिता हैं किसान

रैथल की पूर्णिमा के पिता कुंदन खेती बाड़ृी का काम करते हैं और पूर्णिमा चार भाई बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके द्वारा साइकिलिंग,पैराग्लाइडिंग दयारा और इस क्षेत्र में साहसिक पर्यटन विकास की नई संभावना के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

कहां हैं दयारा बुग्याल
दयारा बुग्याल जो मखमली घास (बुग्याल) उत्तरकाशी जिले में स्थित है। चारों ओर बर्फ से ढके इस बुग्याल तक पहुंचने के लिए पहले उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी पहुंचना होता है। फिर बारसू गांव से दयारा बुग्याल तक पैदल चलना होता है। जो कि करीब 9 किलोमीटर है। ये ट्रैकिंग के लिए भी खास है। यहां पर अब होम स्टे बन चुके हैं। ऐसे में किसी तरह की परेशानी नहीं हो सकती है।

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