उत्तराखंड लोकसभा चुनाव: पौड़ी गढ़वाल के इन 35 गांव से सड़क के लिए होगा वोट का बहिष्कार, 44 साल से आस
'इनकी भी सुन लो', यह आवाज है पौड़ी गढ़वाल जिले के 35 गांव की। दरअसल उत्तराखंड राज्य बनने के 24 साल बाद भी पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर विधानसभा के अंदर डाडामंडल के दो दर्जन से अधिक गांव कौड़िया-किमसार मोटर मार्ग सड़क की समस्या को लेकर परेशान हैं। स्थाई सड़क की समस्या को देखते हुए अब ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सालों से वोट देकर भी जब पक्की सड़क नहीं बनी तो इस बार वोट न देकर अपने जनप्रतिनिधियों को जगाने की कोशिश करेंगे। इतना ही नहीं ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान से ब्लॉक प्रमुख, विधायक, सांसद सब भाजपा के हैं, जिनकी सरकार है तब भी जनसुनवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में वोट बहिष्कार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
इस क्षेत्र के 35 गांव के आबादी ने सड़क की मांग को लेकर पार्क प्रभावित संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन किया है। जो कि लगातार सड़क की मांग को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से लेकर ब्लॉक, जिला, राज्य और केंद्र सरकार तक अपनी बात रख चुके हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र राजधानी देहरादून से मात्र 80 किलोमीटर दूर है। गांव ऋषिकेश से 30 किमी, यमकेश्वर से 40 किमी और पौड़ी मुख्यालय से करीब 200 किमी पड़ता है। ग्रामीणों को हर छोटे बड़े काम के लिए ऋषिकेश जाना पड़ता है। ऐसे में यहां पक्की सड़क न होने को लेकर भी राजनीति हावी है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
हालात ये हैं कि अक्टूबर 2023 में गुरुत्वम सेवा समिति ग्राम तल्ला बनास में जगत ट्रस्ट (पब्लिक चेरेटेबल ट्रस्ट) नेचर केयर सेन्टर का हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल शिव प्रसाद शुक्ला उद्घाटन करने पहुंचे। जो कि सड़क मार्ग से पहुंचे राज्यपाल ने भी कौड़िया-किमसार मार्ग के न बनने पर चिंता जताई।
उन्होंने भी इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री, लोक निर्माण विभाग व वन विभाग से बनाने का अनुरोध करने की बात की। पहली बार, कोई राज्यपाल सड़क मार्ग से यहां तक आया, तभी उन्होने सड़क की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई।
ग्रामीणों ने हाल ही में लोक सभा चुनाव के बहिष्कार को लेकर न्याय पंचायत किमसार से तल्ला बनास, मल्ला बनास, किमसार, रामजीवाला, धारकोट, गंगा भोगपुर के बीन नदी पुल तक जन-जागरूकता अभियान चलाया। लोगों का कहना है कि क्या इस क्षेत्र की जनता सिर्फ वोट बैंक है, जिसका इस्तेमाल केवल मतदान के अवसर पर किया जाता है।
क्षेत्र की मुख्य मांगों में- बीन नदी पर पुल का निर्माण, कौड़िया-किमसार मोटरमार्ग का डामरीकरण, तल्ला गंगाभोगपुर में तटबंध बनाना, कौड़िया-विंध्यवासिनी-ताल-कन्डरा (ताल घाटी) स्थाई आलवेदर रोड़ का निर्माण शामिल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक इन मुख्य मांगों पर विचार नहीं होगा, तब तक पूरा क्षेत्र एकजुट होकर आने वाले लोकसभा चुनाव का पुरजोर बहिष्कार करेगा।
संघर्ष समिति के सचिव और मल्ला बनास गांव के प्रधान बचन विष्ट का कहना है कि हमारी सड़क का मामला अब राजनीतिक हो गया है। 45 साल तक वोट देकर हमें एक सड़क तक नहीं मिली। इमरजेंसी में या जब कोई प्रसुता को अस्पताल ले जाना होता है तो लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अकेले डांडा मंडल में 7 हजार से ज्यादा वोटर हैं।
सड़क से प्रभावित करीब 35 हजार मतदाता होंगे। उन्होंने बताया कि 2016 में जब ग्रामीणों ने आंदोलन किया तब तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने 6 करोड़ 26 लाख का बजट जारी किया। जिससे सीसी मार्ग बनाया गया। पार्क प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्यारे लाल रणाकोटी ने बताया कि 1982 से सड़क की मांग कर रहे हैं। 1995-96 में 10 से 12 किमी बनी, लेकिन नेशनल पार्क की 11 किमी पक्की नहीं बन पाई है।
आरोप है कि हर बार बताया जाता है कि क्लीयरेंस मिल चुकी है, लेकिन सड़क पर काम नहीं होता। तल्ला बनास के प्रधान विनोद नेगी ने बताया कि न्याय पंचायत किमसार के लोग लगातार इस सड़क के लिए आंदोलन कर रहे हैं। हमारे पास जीप से यात्रा करने के अलावा कुछ भी विकल्प नहीं है। गंगा भोगपुर से 12 से 14 किमी सड़क है। जिसको लेकर आंदोलन चल रहा है।
यूकेडी के नेता और समाजसेवी शांति प्रसाद भट्ट का आरोप है कि उत्तराखंड बनने से अब तक यहां भाजपा के विधायक रहे। यहां से वीआईपी नेता भी विधायक और सांसद रहे, लेकिन किसी ने क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया। भट्ट का कहना है कि पूरे उत्तराखंड में ही शायद ऐसा कोई बीहड़ क्षेत्र रह गया होगा, जैसा यमकेश्वर को यहां के जनप्रतिनिधियों ने बना दिया है।












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