Uttarakhand Holi 2026: 125 गांवों में नहीं खेली जाती होली, कुलदेवता क्यों होते नाराज, जानिए वजह, अनोखी परंपरा
Uttarakhand Holi 2026 उत्तराखंड में होली कुछ अलग अंदाज में मनाई जाती है। खासकर कुमाऊं में एक महीनें तक होली का होल्यार रहता है। हर जगह होली अपने अपने रंग और परंपरा के हिसाब से मनाई जाती है। लेकिन उत्तराखंड के कई ऐसे गांव भी हैं, जहां होली खेलना पाप माना जाता है।
पिथौरागढ़ जिले के तल्ला डारमा, तल्ला जोहार और बागेश्वर जिले के मल्ला दानपुर क्षेत्र के लगभग 125 से अधिक गांवों में रंग वाली होली नहीं मनाई जाती है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यहां के कुलदेवता को होली के रोमांटिक या फिल्मी गीत पसंद नहीं हैं और इससे वे नाराज हो जाते हैं।

जिससे प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप हो सकता है। ऐसे में इन गांवों में होली नहीं खेली जाती है। यहां के लोग रंगों को छूते तक नहीं हैं। पिथौरागढ़ जिले के तल्ला डारमा, तल्ला जोहार और बागेश्वर जिले के मल्ला दानपुर क्षेत्र उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के दुर्गम, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र हैं। ये क्षेत्र अपनी अनूठी परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाने जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि कुछ इलाकों में तो पूजा-पाठ में रंगीन कपड़े पहनने से भी परहेज करते हैं।
14 वीं शताब्दी में चंपावत के चांद वंश के राजा लेकर आए
जानकार मानते हैं कि होली त्योहार को कुमांउ क्षेत्र में 14 वीं शताब्दी में चंपावत के चांद वंश के राजा लेकर आए थे। राजाओं ने इसकी शुरूआत ब्राह्मण पुजारियों के माध्यम से की इसलिए जहां-जहां उन पुजारियों का प्रभाव पड़ा, वहां इस त्योहार का प्रसार हो गया। जिन क्षेत्रों में होली नहीं मनाई जाती है, ये वे क्षेत्र हैं जहां सनातन परंपराएं पूरी तरह से नहीं पहुंच पाईं।
कुलदेवता प्राकृतिक आपदाओं के रूप में दंड देते
सामा इलाके के एक दर्जन से अधिक गांवों में ऐसी मान्यता है कि अगर ग्रामीण रंगों से खेलते हैं तो उनके कुलदेवता उन्हें प्राकृतिक आपदाओं के रूप में दंड देते हैं। न केवल कुमांउ क्षेत्र के दूरस्थ गांवों बल्कि गढ़वाल क्षेत्र में रुद्रप्रयाग जिले के तीन गांवों- क्वीली, खुरझांग और एक अन्य गांव के निवासियों ने भी अपनी कुलदेवी त्रिपुरा सुंदरी के प्राकृतिक आपदा के रूप में इन गांवों पर कहर बरपाए जाने के बाद पिछले डेढ़ सौ साल से होली नहीं खेली है।
चिपला केदार, रंगों से होली के रोमांटिक गीतों से भी नाराज
दूसरे राज्यों के भी कई ऐसे गांव हैं, जहां होली नहीं मनाई जाती। पिथौरागढ़ जिले के तल्ला जोहरा क्षेत्र के चिपला केदार देवता में आस्था रखने वाले उनके क्षेत्र के कई गांवों में भी होली नहीं खेली जाती। मान्यता है कि चिपला केदार न केवल रंगों से बल्कि होली के रोमांटिक गीतों से भी नाराज हो जाते हैं। चिपला केदार के श्रद्धालुओं को देवता की पूजा और यात्रा के दौरान तक रंगीन कपड़े पहने की अनुमति नहीं है। पूजा के दौरान पुजारियों समेत सभी श्रद्धालु केवल सफेद कपड़े पहनते हैं।
-
बिहार में होगी टीवीएफ की फिल्म ‘शिव-शक्ति’ की शूटिंग, युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और काम का मौका -
US Secretary India Visit: युद्ध के बीच 'ट्रंप के वॉर मिनिस्टर' का अचानक भारत दौरा, किन मुद्दों पर चर्चा -
Iran America War: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से की बात,किन मुद्दों पर हुई बात -
Iran America War: ईरानी राजदूत से विदेश मंत्री जयशंकर ने की मुलाकात, क्या हुई सीक्रेट बात? -
Pakistan Petrol Diesel Price: कंगाल पाकिस्तान में ₹335 का पेट्रोल! कितने रुपए में मिल रहा है एक LPG सिलेंडर -
Hormuz Controversy: क्या हॉर्मुज में फंसे जहाजों से हो रही है वसूली? वायरल दावों पर ईरानी दूतावास ने क्या कहा -
New Labour Codes: नए श्रम कानून लागू होने से कंपनियों और कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा? Explainer में समझें -
World Most Polluted Cities: पाकिस्तान बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, भारत की क्या है रैंकिंग -
क्या भारत में 'LOCKDOWN' लगने वाला है? दुनियाभर में Energy Lockdown की शुरुआत! तेल संकट से आप पर कितना असर -
Badshah Caste: बॉलीवुड के फेमस रैपर बादशाह की क्या है जाति? क्यों छुपाया असली नाम? कौन-सा धर्म करते हैं फॉलो? -
Iran Vs America War: अमेरिका ने किया सरेंडर! अचानक ईरान से युद्ध खत्म करने का किया ऐलान और फिर पलटे ट्रंप -
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट












Click it and Unblock the Notifications