उत्तराखंड: पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच अजीब मुसीबत में फंस चुका है भाजपा नेतृत्व
देहरादून: जब से केंद्र में मोदी सरकार सत्ता में आई है, उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य है जहां भाजपा अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है। अगर राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की नौबत आ गई, जैसा कि वहां पार्टी इसको लेकर भारी दबाव से गुजर रही है तो त्रिवेंद्र सिंह रावत ऐसे पहले मुख्यमंत्री होंगे जो बीच में ही कार्यकाल छोड़ने वाले बीजेपी के सीएम होंगे। इससे पहले गोवा में मनोहर पर्रिकर के सामने ऐसी परिस्थिति आई थी, लेकिन वहां असंतोष जैसा कुछ नहीं था और वह बिल्कुल अलग ही स्थिति थी। पार्टी ने पिछले दिनों त्रिपुरा में भी नेतृत्व के खिलाफ विरोध का सामना किया था, लेकिन उसे थामने में केंद्रीय नेतृत्व कामयाब हुआ। लेकिन, उत्तराखंड में मौजूदा नेतृत्व को लेकर पार्टी जिस मुसीबत में फंसी है, उसने केंद्रीय नेतृत्व को बहुत ही मुश्किलों में डाल रखा है। क्योंकि, इस समय पार्टी का सारा ध्यान चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव पर है। अगर ऐसे में वहां सीएम बदलने का फैसला लेने को मजबूर होना पड़ा तो चुनाव के दौरान पार्टी की छवि पर भी असर पड़ सकता है।

सीएम रावत के खिलाफ विधायकों का विरोध
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस समय पार्टी के अंदर से जबर्दस्त सत्ता संघर्ष झेलने को मजबूर हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो कई विधायक मुख्यमंत्री बदले जाने की मांग कर रहे हैं। इसी वजह से रावत आनन-फानन दिल्ली बुलाए गए थे और वह वापस प्रदेश की राजधानी लौट भी आए हैं। पार्टी के भीतर के लोगों का कहना है कि दोनों केंद्रीय पर्यवेक्षकों- पार्टी उपाध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह और राज्य के प्रभारी महासचिव दुष्यंत गौतम से ज्यादातर विधायकों ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग तो की ही है, यह भी राय दी है कि अगर रावत की अगुवाई में 2022 में पार्टी विधानसभा चुनाव में उतरी तो प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सामने से कोई भी विधायक अपने मतभेदों को लेकर कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन, बीजेपी एमएलए हरबंस कपूर ने इकोनॉमिक्स टाइम्स के सामने माना है कि, 'कुछ महत्वाकांक्षी लोग हैं और ऐसी स्थिति सभी पार्टियों में होती है।.......बेहतर है कि उसपर ध्यान देने की जगह जनता पर ध्यान दिया जाए, क्योंकि हमारी सरकार ने बहुत ही अच्छा काम किया है।' लेकिन, पार्टी नेतृत्व की चिंता ये भी है कि हाल में आए एक ओपिनियन पोल ने प्रदेश सरकार को 'औसत से कम' की रेटिंग दी है।

कैबिनेट विस्तार में देरी से बढ़ा है असंतोष
त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में 3-3 मंत्रियों का पद खाली है, लेकिन सेंट्रल लीडरशिप से कैबिनेट विस्तार की छूट मिलने के बावजूद मुख्यमंत्री इसके लिए अबतक तैयार नहीं हुए हैं। इसके चलते मंत्री बनने की आस में बैठे पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं में भारी असंतोष है। आरोप यह भी लगाया जाता है कि जो मंत्री हैं, उन्हें भी काम करने की पूरी आजादी नहीं दी जा रही है। शिकायतों की फेहरिस्त में यह भी आरोप है कि सीएम कई फैसला लेने से पहले अपनी कैबिनेट को भी भरोसे में लेने की जरूरत नहीं समझते।

पीएम मोदी के सामने ऐसी पहली चुनौती
जहां तक उत्तराखंड की बात है तो नारायण दत्त तिवारी को छोड़कर वहां बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस का भी कोई मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। एक बात और दिलचस्प है कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद चुनावों में सत्ताधारी पार्टी को कोई फायदा नहीं मिला है। खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह व्यक्तिगत चुनौती हो सकती है कि उनके रहते हुए गोवा में मनोहर पर्रिकर को छोड़कर सारे मुख्यमंत्रियों ने अपना कार्यकाल पूरा किया है और पार्टी को कहीं भी नेतृत्व परिवर्तन की मांग के आगे नहीं झुकना पड़ा है। ताजा उदाहरण त्रिपुरा का है, जहां पार्टी विरोध को थामने में सफल हुई है। उसी तरह मणिपुर में भी वह हर चुनौतियों से निपटते हुए अपनी सरकार बचाने में कामयाब रही है।

बीजेपी कर सकती है विधानसभा चुनावों का इंतजार
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के दिल्ली पहुंचने से पहले ही इस संकट पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष और दुष्यंत गौतम के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी थी। यह भी जानकारी है कि केंद्रीय नेतृत्व भी उत्तराखंड में बदलाव पर विचार कर रहा है, लेकिन विधानसभा चुनावों के मद्देनजर तुरंत ऐसा होने की संभावना नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने राय दी है कि इस तरह का कोई फैसला विधानसभा चुनावों के बाद ही लिया जाना चाहिए।

त्रिवेंद सिंह रावत की जगह सीएम के तौर पर इन नेताओं के नाम
हालांकि, इस बात में दम लग रहा है कि अगर नेतृत्व परिवर्तन के लिए सेंट्रल लीडरशिप तैयार भी हो जाती है तो भी विधानसभा चुनावों से पहले इसकी संभावना बहुत ही कम है। लेकिन, इस बीच एक दिलस्प बात ये हो रही है कि आज शाम मुख्यमंत्री ने अपने देहरादून वाले आवास पर बीजेपी विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस स्थिति में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण परिस्थिति पैदा हो चुकी है, क्योंकि पार्टी विधायक दल की बैठक आमतौर पर तभी होती है, जब नए नेता की घोषणा होनी रहती है। इस बीच राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में नए सीएम के नाम को लेकर भी कयासबाजी शुरू हो चुकी है। इन चर्चाओं में जो नाम आगे हैं, वे हैं- राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद अजय भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह रावत, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और आरएएस पदाधिकारी सुरेश भट्ट।












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