जानिए बदरीनाथ धाम के लिए गाडू घड़ा तेल कलश की परंपरा, जिससे होता है भगवान का पहला अभिषेक

भगवान बदरी विशाल का प्रथम अभिषेक तिलों के तेल से होगा

देहरादून, 26 अप्रैल। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का अपना महत्व है। ऐसे में चारधाम यात्रा से जुड़ी कई यात्राओं और पुरानी रीति रिवाज परंपरा और धार्मिक मान्यताओं का अपना ही महत्व है। ऐसे ही एक यात्रा और रीति रिवाज और परंपरा है गाडू घड़ा तेल कलश । जो कि बदरीनाथ धाम पहुंचाया जाता है। बदरीनाथ धाम के कपाट आठ मई को खोले जाने हैं। इस मौके पर भगवान बदरी विशाल का प्रथम अभिषेक तिलों के तेल से होगा।

22 अप्रैल से शुरू हो चुकी है गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा

22 अप्रैल से शुरू हो चुकी है गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा

बदरीनाथ धाम के कपाट आठ मई को खुलेंगे। जिसके लिए 22 अप्रैल से नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार से श्री बदरीनाथ धाम गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा शुरु हो चुकी है। इससे पहले महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह की उपस्थिति में सुहागिन महिलाओं ने राजमहल में तिलों का तेल पिरोया। पवित्र तिलों के तेल को भगवान बदरीविशाल के अभिषेक के लिए कपाट खुलने से पूर्व डिमरी पंचायत द्वारा श्री बदरीनाथ धाम पहुंचाया जायेगा। बदरीनाथ धाम के कपाट आठ मई को खोले जाने हैं। इस मौके पर भगवान बदरी विशाल का प्रथम अभिषेक तिलों के तेल से होगा।

ऐसे तैयार होता है कलश

ऐसे तैयार होता है कलश

पहले महारानी राज्यलक्ष्मी शाह की मौजूदगी में राजपुरोहितों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई। फिर सुहागिनों ने सादगीपूर्ण वातावरण में पीले वस्त्र धारण कर परंपरागत ढंग से तिलों का तेल पिरोया। साथ ही ढोल-दमाऊ व मसकबीन की मधुर लहरियों के बीच भगवान बदरी विशाल का स्तुतिगान हुआ और तेल को कलश में भरकर उसे कपड़े से ढका दिया गया। कपाट खुलने पर सबसे पहले नरेंद्रनगर राजमहल में पिरोये गए तिलों के तेल से ही भगवान बदरी विशाल का अभिषेक होता है। इसके बाद स्नान-पूजन की क्रियाएं संपन्न होती हैं। परंपरा के अनुसार टिहरी रियासत के राजाओं को बोलांदा बदरी (बोलने वाले बदरी) कहा जाता था। यही वजह है कि बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि एवं मुहूर्त राजा की कुंडली के हिसाब से तय होते हैं।

अब 10 दिनों तक लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा

अब 10 दिनों तक लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा

गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा रविवार रात करीब 11 बजे डिम्मर गांव पहुंची। तेल कलश के दर्शनों के लिए देर रात तक डिम्मर सहित आसपास के ग्रामीण पलक पांवड़े बिछाए रहे। लमालाओं से सुसज्जित कलश के साथ यात्रियों के पहुंचने पर पूरा क्षेत्र भगवान बदरीविशाल के जयकारों से गूंज उठा। अब 10 दिनों तक लक्ष्मी नारायण मंदिर में ही गाडू घड़ा तेल कलश की पूजा होगी।

बदरीनाथ धाम में चारधाम यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप

बदरीनाथ धाम में चारधाम यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप

बदरीनाथ धाम में चारधाम यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रविवार देर शाम को बदरीनाथ धाम में बिजली की सप्लाई सुचारु कर दी गई। धाम में पेयजल, संचार, बैंकिंग सहित कई अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कार्य इन दिनों जोर-शोर से चल रहा है। बदरीनाथ धाम के कपाट आठ मई को खोले जाएंगे। इसको लेकर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कर्मचारी रंग रोगन के साथ अन्य काम में जुटे हैं। इसके अलावा धाम में बिजली, पानी की सप्लाई सुचारु करने और साफ-सफाई सहित अन्य काम किए जा रहे हैं। ऊर्जा निगम की ओर से धाम में बिजली व्यवस्था बहाल कर दी गई है, जिसके बाद रविवार शाम को भगवान बदरीनाथ मंदिर बिजली की लाइटों से जगमगा गया। धाम में होने वाले कामों की लगातार निगरानी की जा रही है।

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