उत्तराखंड भाजपा में राज्यसभा की एक सीट को लेकर ये दावेदार रेस में, जानिए क्या कहते हैं समीकरण
उत्तराखंड में राज्यसभा की 3 सीटों में से 1 हो रही है रिक्त
देहरादून,29 अप्रैल। उत्तराखंड में सत्ता पाने के बाद अब भाजपा राज्य सभा में एक बार फिर उत्तराखंड का पूरा प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में हैं। वर्तमान में भाजपा के दो राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी व नरेश बंसल और एक सीट कांग्रेस से प्रदीप टम्टा राज्यसभा में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन अब एक मात्र सीट कांग्रेस से भाजपा के पाले में जाना तय है। इसके लिए भाजपा उत्तराखंड से अब पैनल तैयार कर हाईकमान को भेजेगी। जिसमें 6 नाम मांगे गए हैं। इनमें दो पूर्व सीएम भी दौड़ में बताए जा रहे हैं। हालांकि सीएम के लिए सीट छोड़ने वाले कैलाश गहतोड़ी को भी पार्टी ईनाम दे सकती है।

69 में से 46 भाजपा के विधायक
राज्यसभा की तीन में से एक सीट प्रदीप टम्टा का कार्यकाल अगले महीने समाप्त होने जा रहा है। वर्तमान में 69 में से भाजपा के 46 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर देखा जाए तो रिक्त होने जा रही राज्यसभा सीट के चुनाव में भाजपा की जीत तय है। हाईकमान ने प्रदेश संगठन से पैनल भी तैयार करने को कहा है। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की है कि प्रदेश स्तर से 6 नामों का पैनल हाईकमान को भेजा जा रहा है। हालांकि नामों पर अब भी संशय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हाल ही में राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के देहरादून प्रवास के दौरान भी राज्यसभा की एक सीट के चुनाव पर बात हुई। हालांकि ये तय माना जा रहा है कि राज्यसभा प्रदेश से ही कोई चेहरा भेजा जाएगा। कौशिक के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व ने अपेक्षा की है कि प्रत्याशियों का एक पैनल बनाकर केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेजा जाए। पैनल तय करने के लिए पार्टी की दो बैठकें हो चुकी है। जल्द एक और बैठक के बाद पैनल को केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया जाएगा। इस पैनल में छह नाम भेजे जाएंगे। जल्द ही इन नामों को तय कर लिया जाएगा।
दो पूर्व सीएम, एक पूर्व विधायक रेस में
पार्टी सूत्रों का दावा है कि सबसे ज्यादा जिन नामों की चर्चा है, उनमें पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैलाश गहतोड़ी का नाम है। इनमें सबसे ज्यादा उम्मीदें विजय बहुगुणा की मानी जा रही हैं। विजय बहुगुणा जिस तरह से प्रदेश की सक्रिय राजनीति से दूर हैं लेकिन प्रदेश की राजनीति में हर बार निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उससे विजय बहुगुणा के राज्यसभा भेजे जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है। इसके बाद दूसरा नाम पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का लिया जा रहा है। जो कि फिलहाल न विधायक हैं और नहीं किसी पद पर। त्रिवेंद्र सिंह रावत के सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद से ही उनको केन्द्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की बात उठती रहती है। हालांकि त्रिवेंद्र सिंह रावत राज्यसभा जाकर सक्रिय राजनीति से बाहर होने को तैयार होंगे या नहीं, ये बड़ा सवाल है। त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी लिया जा रहा है। ऐसे में त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी ज्यादा मजबूत मानी जा रही है। राज्यसभा की दावेदारी में तीसरा नाम कैलाश गहतोड़ी का बताया जा रहा है जो कि चंपावत से दो बार विधायक रह चुके हैं और इस बार सीएम के लिए सीट छोड़ चुके हैंं। कैलाश गहतोड़ी को सीएम के लिए सीट छोड़ने का ईनाम दिया जा सकता है। हालांकि गहतोड़ी को प्रदेश में किसी तरह के कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी देने के भी चर्चा है। इन तीनों के अलावा महिला दावेदारों के नाम भी प्रमुखता से माने जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का दावा है कि दो सांसद पुरुष हैं तो पार्टी एक महिला को राज्यसभा भेजकर संतुलन बैठा सकती है। इसमें स्वराज विद्धान और दीप्ति रावत का नाम लिया जा रहा है। हालांकि पार्टी पिछली बार की तरह इस बार भी नए नाम के साथ चौंका सकती है।












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