केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की मौत पर जागी राज्य सरकार, पशुपालन मंत्री ने दिए ये बड़े निर्देश
लापरवाही बरतने पर घोड़े-खच्चरों के संचालकों पर होगा केस दर्ज
देहरादून, 30 मई। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की मौत पर राज्य सरकार ने सुध ली है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की व्यवस्थाओं को परखने के बाद कई सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही ऐसे घोड़े-खच्चर संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को कहा गया है, जिनकी लापरवाही से जानवरों की मौत हो रही है।

16 दिनों में 55 घोड़ा-खच्चरों की मौत
चारधाम में श्रद्धालुओं की मौत का आंकड़ा बढ़ने के साथ ही एक ओर चिंताजनक खबर सामने आने लगी है। पैदल मार्गों की दूरी तय करने के लिए यात्रा मार्गोंं पर घोड़ा-खच्चरों को लगाया जाता है। आंकड़ों के अनुसार चार धाम यात्रा की शुरुआत से अबतक महज 16 दिनों में 55 घोड़ा-खच्चरों की पेट में तेज दर्द उठने से मौत हो चुकी है, जबकि 4 घोड़ा-खच्चरों की गिरने से और एक की पत्थर की चपेट में आने से मौत हुई है। मौत का आंकड़ा 70 पार कर चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक 1.25 हजार तीर्थयात्री घोड़े-खच्चरों से अपनी यात्रा कर चुके हैं, जबकि अन्य तीर्थयात्री हेलीकॉप्टर और पैदल चलकर धाम पहुंचे हैं। बाबा केदार के भक्तों को 18 से 20 किमी की दूरी तय करनी होती है। इस दूरी में यात्री को धाम पहुंचाने में घोड़ा-खच्चर अहम भूमिका निभाते हैं। यात्रा में इन जानवरों के लिए भरपेट चना, भूसा और गर्म पानी भी नहीं मिल पा रहा है। तमाम दावों के बावजूद पैदल मार्ग पर एक भी स्थान पर घोड़ा-खच्चर के लिए गर्म पानी नहीं है। एक तरफ जहां जानवरों के लिए कोई सुविधा नहीं हैं तो वहीं दूसरी तरफ, संचालक और हॉकर रुपये कमाने के लिए घोड़ा-खच्चरों से एक दिन में गौरीकुंड से केदारनाथ के 2 से 3 चक्कर लगवा रहे हैं। इतना ही नहीं रास्ते में उन्हें पलभर भी आराम नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण वह थकान से परेशान होकर दर्दनाक मौत का शिकार हो रहे हैं।
प्रशासन की टीम करेगी मॉनिटरिंग, रखी जाएगी निगरानी
घोड़े खच्चरों की मौत पर राज्य सरकार गंभीर हो गई है। इसको लेकर पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने पहले रुद्रप्रयाग में जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। मंत्री को बताया गया कि अब तक यात्रा मार्ग पर 70 घोड़े-खच्चरों की मौत हो चुकी है। इस पर मंत्री ने केदारनाथ यात्रा को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने और यात्रा मार्ग में संचालित हो रहे घोडे खच्चरों का स्वास्थ का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई घोड़ा खच्चर कमजोर एवं अनफिट है तो उसका यात्रा मार्ग में संचालन न किया जाय। मंत्री ने यात्रा मार्ग में पीने के पानी की उचित व्यवस्था करने और पशुचरहियों की उचित साफ-सफाई करते हुए खच्चरों के लिये गर्म पानी व उनके चारे-दाने की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केदारनाथ यात्रा मार्ग में लगभग दस हजार घोड़े खच्चर हैं, जिसमें आठ हजार पांच सौ का ही रजिस्ट्रेशन किया गया है। उन्होंने कहा कि एक दिन में पचास प्रतिशत ही घोड़े खच्चरों का संचालन किया जाए और घोड़े खच्चरों को एक दिन का अनिवार्य रूप से आराम दिया जाए। सौरभ बहुगुणा ने जिला प्रशासन को यात्रा मार्ग में एक फोर्स तैनात करने के निर्देश दिए, जिसमें 20 लोगों शामिल किये जांए, जो कि यात्रा मार्ग में संचालित घोड़े खच्चरों को उनके मालिकों एवं हाॅकरों द्वारा समय-समय पर दाना, चारा, पानी उपलब्ध कराने पर फोकस करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने पांच सदस्यों की टीम भी गठित करने के निर्देश दिये, जिसमें पशु चिकित्सक, पुलिस, जिला पंचायत एवं जिला प्रशासन के लोग शामिल होंगे। जो यात्रा मार्ग में संचालित हो रहे घोडे़-खच्चरों का निरन्तर निगरानी करते हुए जांच करेंगें और जांच में घोड़ा खच्चर कमजोर पाया जाता है तो यात्रा मार्ग में उसका संचालन नहीं होने देंगे।
मौत पर एफआईआर व पैसा रोकने के निर्देश
मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि यदि यात्रा मार्ग में घोड़े खच्चर की मृत्यु होने पर जांच रिपोर्ट में पाया जाता है कि उसकी मृत्यु उचित दाना-पानी न मिलने व भूख के कारण हुई है तो घोड़े खच्चर मालिक एवं होकर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए और घोड़े खच्चर के बीमा का पैसा भी न दिया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए है कि कमजोर घोड़े-खच्चरों के लिये उचित दाने एवं चारे की व्यवस्था पशुपालन विभाग द्वारा कराई जायेगी। जिसके लिये धनराशि उन्हें उपलब्ध कराई जायेगी और घोड़े खच्चरों को उचित दाम पर दाना-चारा उपलब्ध कराया जाय और घोड़ा खच्चर जब तक स्वस्थ नहीं होता है, तब तक उन्हें यात्रा मार्ग में संचालित न किया जाए। साथ ही डॉक्टरों द्वारा स्वस्थ प्रमाण पत्र जारी होने पर ही घोड़े खच्चरों का संचालन किया जायेगा। बैठक के बाद पशुपालन मंत्री हेलीकाॅप्टर के जरिये सोनप्रयाग पहुंचे। यहां उन्होंने गौरीकुंड घोड़ा-पड़ाव का निरीक्षण किया और यात्रा में तैनात अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।












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