Uttrakhand News: 'हरदा' का सोशल मीडिया हथियार, खुद को सच्चा सिपाही बताकर सीएम चेहरे का खेला दांव
कांग्रेस के अंदर सीएम फेस को लेकर खींचतान
देहरादून, 19 अगस्त ।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनैतिक दलों में सीएम फेस को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है। आप ने कर्नल अजय कोठियाल को पार्टी का सीएम फेस डिक्लेयर कर कांग्रेस और बीजेपी के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस में तो इसका असर दिखना शुरू हो गया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने तो सोशल मीडिया में आकर सीएम पद को लेकर अपनी टीस जाहिर भी कर दी है।

खुलकर हो रही पैरवी
हरीश रावत ने राहुल गांधी को फेसबुक के जरिए अपनी बात रखी हैा हरीश रावत के इस सोशल हथियार को लेकर कांग्रेस में एक बार फिर हरीश रावत समर्थक उन्हें सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट करने की मांग करने लगे हैं। हरीश रावत के प्रवक्ता कांग्रेस के नेता सुरेंद्र अग्रवाल ने हरीश रावत को प्रदेश का सबसे लोकप्रिय नेता बताया, उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि हरीश रावत को एक बार फिर मौका मिले साथ ही हरीश रावत पूर्ण बहुमत वाली सरकार के सीएम बनें। हरीश रावत के इस लेटर बम से एक बार फिर कांग्रेस के अंदर वर्चस्व की जंग शुरू होनी तय है। हरीश रावत को 2022 विधानसभा चुनाव के चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने चुनाव की कमान तो सौंपी है, लेकिन हरीश रावत गुट चुनाव में हरीश रावत के चेहरे पर चुनाव लड़ने की मांग कर रहा है। साफ है कि कांग्रेस के दूसरे बड़े चेहरे भी आने वाले दिनों में इस तरह के लेटर बम की राजनीति को लेकर कई तरह के सवाल खड़े कर सकते है। जिससे पार्टी के अदंर एक बार फिर सियासी जंग नजर आनी तय हैा
पार्टी में है अभी 2 गुट
उत्तराखंड कांग्रेस में इस समय हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह दो गुट बने हुए हैा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन से लेकर नेता प्रतिपक्ष के चयन तक सभी जगह नामों के चयन में हरीश रावत और प्रीतम सिंह की राय को ही पार्टी हाईकमान ने तवज्जो दी हैा ऐसे में अब पार्टी के अंदर दो ही बड़े चेहरे चुनाव मे आमने सामने होंगेा इस समय कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के अंदरखाने चल रही गुटबाजी को थामना हैा कांग्रेस सत्ता में आने के लिए हर समीकरण को साधने में लगी हैा इसी के तहत प्रदेश अध्यक्ष के अलावा पहली बार 4 कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं ।अब पार्टी के सामने सीएम फेस को लेकर चल रहे सियासी घमासान को थामने की है जो कि इतना आसान नहीं लग रहा है।
हरीश रावत के पत्र की अहम बातें-
#राहुल जी, हम भी राहुल हैं और जीवन की अंतिम सांस तक कांग्रेस का झंडा थाम करके खड़े रहने वाले लोग हैं। हरीश रावत , 2002 में पार्टी ने ना कहा तो पार्टी का झंडा थाम करके खड़ा रहा, 2007 में बहुमत बना लिया था जोड़-तोड़ से ही सही, दिल्ली से पार्टी ने बयान जारी किया कि मैंडेट भाजपा के पक्ष में है, कांग्रेस जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं करती है, हमने अपने साथ खड़े लोगों को कहा आप स्वतंत्र हैं, हमारे साथ रहना चाहें या जहां चाहें, भाजपा की सरकार बनी। 2012 में CLP व PCC अध्यक्ष भी अपनी-2 सीटों पर संघर्ष में जुटे रहे, हरीश रावत हेलीकॉप्टर लेकर गाढ़-गधेरे, दांडे-कांडों में चुनाव प्रचार में जुटा रहा। मुख्यमंत्री चयन की बात आई तो मुझसे एक शब्द पूछा तक नहीं गया, 2014 में भी हिमालयन त्रासदी के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण का सवाल नहीं होता तो शायद मैं आज भी मुख्यमंत्री नहीं होता लेकिन मैं मुख्यमंत्री बना, कांग्रेस ने बनाया हमेशा उसका ऋणी रहूंगा। गरीब घरों के नौजवान जो संघर्ष से निकल करके आये हैं, वो पहले भी और आज भी, आगे भी कांग्रेस का झंडा थाम करके रहेंगे। लोग और शिद्दत के साथ "#कांग्रेसलाओ-राहुल लाओ" के नारे को बुलंद कर रहे हैं। जरा उन योद्धाओं का एक बार आवाहन करिए, उन बूढ़ी हड्डियों में संघर्ष से तपा हुआ तेज है, बल है, वो आज भी जब सोनिया जी कह रही हैं कि यह #लोकतंत्र बचाने का संघर्ष है, यह अपनी आजादी को बचाने का संघर्ष है तो ऐसे संघर्ष में वो पीछे नहीं रहेंगे और आपके पीछे झंडा लेकर के खड़े है।












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