Explainer: नीदरलैंड से पीएम मोदी का अमेरिका, इजराइल और ईरान को बड़ा संदेश, क्या दुनिया पर है बड़ा खतरा?
PM Modi Netherlands visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड की धरती से एक ऐसा वैश्विक संदेश दिया है, जिसका सीधा संकेत अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे देशों की तरफ है। आज जब पूरी दुनिया युद्ध, तनाव और गुटबाजी में बंटी हुई है, तब पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि टकराव का यह रास्ता किसी के हित में नहीं है। उन्होंने चेताया कि मौजूदा संकटों से वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।
भारत ने बिना किसी का पक्ष लिए दुनिया को यह समझाने की कोशिश की है कि ताकत का प्रदर्शन समाधान नहीं, बल्कि विनाश का रास्ता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पीएम मोदी ने इस मंच से दुनिया के बड़े और शक्तिशाली देशों को क्या बड़े संकेत दिए हैं।

अमेरिका को संकेत: गुटबाजी छोड़ें, जिम्मेदारी संभालें
पीएम मोदी का इशारा साफ था कि वैश्विक महाशक्तियों को सिर्फ अपने फायदे या गुटबाजी पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अमेरिका जैसे देशों को आगे बढ़कर दुनिया में स्थिरता लानी होगी। अगर बड़े देश सिर्फ युद्ध को हवा देते रहेंगे या प्रतिबंधों की राजनीति करेंगे, तो इससे विकासशील देशों में ऊर्जा और खाद्य संकट और गहरा हो जाएगा, जिससे पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आ जाएगी।
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इजराइल और ईरान को नसीहत: युद्ध से तबाही के सिवा कुछ नहीं
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच पीएम मोदी ने साफ कहा कि लगातार चलते युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं हैं। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव से न सिर्फ तेल और ऊर्जा का संकट खड़ा हो रहा है, बल्कि लाखों मासूमों की जिंदगी दांव पर लगी है। दोनों देशों को जिद छोड़कर जल्द से जल्द शांति का रास्ता अपनाना चाहिए।
ऊर्जा संकट (Energy Crisis) पर बड़ी चेतावनी
लगातार होते युद्धों के कारण आज पूरी दुनिया बिजली, गैस और पेट्रोल-डीजल की किल्लत से जूझ रही है। पीएम मोदी ने आगाह किया कि अगर इजराइल-ईरान जैसे देशों का तनाव नहीं थमा, तो ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा, जिससे दुनिया का आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
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बातचीत ही समाधान, युद्ध नहीं
भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि यह युग युद्ध का नहीं है। पीएम मोदी ने नीदरलैंड से एक बार फिर दोहराया कि चाहे कितना भी बड़ा विवाद हो, उसका हल सिर्फ और सिर्फ बातचीत (डायलॉग) और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है। बंदूकों और मिसाइलों के दम पर कोई भी देश शांति हासिल नहीं कर सकता, बल्कि इससे सालों की तरक्की पीछे चली जाती है।












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