हार का बदला और परिवारवाद का जवाब..., हरिद्वार ग्रामीण सीट पर हरीश रावत की बेटी के सामने हैं 2 बड़ी चुनौती

हरीश रावत की बेटी अनुपमा है हरिद्वार ग्रामीण से मैदान में

देहरादून, 28 जनवरी। उत्तराखंड में हरिद्वार ग्रामीण सीट पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत को कांग्रेस ने टिकट दिया है। इस सीट पर 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में हरीश रावत को हार का मुंह देखना पड़ा था। ऐसे में ये भी दावा किया जा रहा है कि इस बार बेटी पिता के हार का बदला लेने के लिए चुनाव मैदान में हैं। अनुपमा ने ही 2017 में हरिद्वार ग्रामीण सीट पर हरीश रावत के चुनाव अभियान की कमान अपने हाथ में संभाली हुई थी। इस लिहाज से अनुपमा रावत के लिए इस सीट पर चुनाव लड़ना ज्यादा मुश्किल नहीं माना जा रहा है। हरिद्वार ग्रामीण सीट पर भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद तीसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जिन्होंने 2017 में हरीश रावत को चुनाव में शिकस्त दी थी। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर पहाड़ी और मुस्लिम वोटर का अच्छाखासा वोटबैंक है। इस सीट पर लगातार यतीश्वरानंद ​ही विधायक का चुनाव जीतते आए हैं।

 Revenge of defeat and answer to familyism..., Harish Rawats daughter has 2 big challenges in Haridwar rural seat

हरीश रावत की बेटी और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव हैं अनुपमा रावत

हरिद्वार ग्रामीण सीट से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की बेटी और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव अनुपमा रावत को प्रत्याशी बनाया है। अनुपमा रावत के सामने अपने पिता की हार का बदला लेने के साथ ही परिवारवाद को लेकर उठ रहे सवाल का जवाब देने की भी चुनौती है। अनुपमा रावत एक मात्र प्रत्याशी हैं जिन पर एक परिवार से दो टिकट देने का आरोप लगा है। खुद पिता हरीश रावत लालकुंआ और बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में अनुपमा रावत को ऐसे विरोधियों को जवाब देना होगा जो उनके टिकट के पीछे परिवारवाद को कारण बता रहे हैं।

हरीश रावत का राजनीतिक सफर
हरीश रावत 2014-2017 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। 2009 से 2011 तक केंद्र की यूपीए सरकार में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री रहे। 2011 से 2012 तक वह कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री और संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे। 2012 में वे जल संसाधन मंत्री रहे। 1980 में हरीश रावत पहली बार अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के बड़े नेता मुरली मनोहर जोशी को हराकर संसद पहुंचे। इसके बाद 1984 में उन्होंने फिर से बड़े अंतर से मुरली मनोहर जोशी को चुनाव में शिकस्त दी। 1989 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल के बड़े नेता काशी सिंह ऐरी को हराया और लगातार तीसरी बाद लोकसभा पहुंचे। 1991 में हरीश रावत चुनाव हार गए। इसके बाद 1996, 1998 और 1999 के चुनाव में लगातार चार बार उन्हें अल्मोड़ा सीट से हार का मुंह देखना पड़ा। 2009 के लोकसभा चुनाव में हरिद्वार सीट से चुनाव जीतकर चौथी बार लोकसभा पहुंचे। फरवरी 2014 में वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने और 2017 तक मुख्यमंत्री रहे। धारचुला सीट से उपचुनाव जीतकर वे विधायक बने। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में हरीश रावत ने हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह दोनों सीटें हार गए। 2019 के लोकसभा चुनाव में वे नैनीताल-उधमसिंह नगर सीट से चुनाव हारे। 2000 में हरीश रावत उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। 2002 से 2008 में वे कांग्रेस से उत्तराखंड कोटे से राज्यसभा सदस्य भी रहे।

  • हरिद्वार ग्रामीण सीट
  • मतदाताओं की संख्या-130757
  • पुरूष मतदाता- 69236
  • महिला- 61521

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