चुनावी साल में हरीश रावत के लिए उत्तराखंड से ज्यादा पंजाब कांग्रेस की टेंशन
हरीश रावत उत्तराखंड में कांग्रेस की चुनावी अभियान की कमान संभालने के साथ पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भी हैं
देहरादून, 27 अगस्त्त। उत्तराखंड में चुनाव अभियान की कमान हरीश रावत के हाथ में हैं। लेकिन पंजाब कांग्रेस प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी निभाना अब हरीश रावत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में हरीश रावत पंजाब की जिम्मेदारी से मुक्त होकर उत्तराखंड पर फोकस करना चाहते हैं। जानकारों की मानें तो पंजाब में आए दिन हो रहे कांग्रेस के घमासान का खामियाजा हरीश रावत की इमेज पर भी पड़ना तय है। जो कि उत्तराखंड बीजेपी के लिए भी चुनाव में बड़ा हथियार बन सकता है।

एक साथ दो जिम्मेदारी पड़ सकती है भारी
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने सत्ता में वापसी को अपना पूरा जोर लगाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने सभी समीकरणों को साधने के लिए चुनाव अभियान की कमान पूर्व सीएम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत के हाथ में सौंपी हुई है। हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चुनावी साल में जनता के हर मुद्दे को कांग्रेस से जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन हरीश रावत के सामने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में फोकस करने के अलावा पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान को भी शांत करवाना है। हरीश रावत की राजनैतिक शक्ति को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें पंजाब का प्रदेश प्रभारी बनाया था। लेकिन जब से पंजाब का मोर्चा हरीश रावत ने संभाला है। कांग्रेस के अंदर नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच विवाद चल रहा है। बीते दिनों हरीश रावत की सलाह पर कांग्रेस ने पंजाब में नया फॉर्मूला बनाकर प्रदेश अध्यक्ष के अलावा कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए। पंजाब के बाद यह फॉर्मूला उत्तराखंड में भी लागू किया गया। उत्तराखंड में यह फॉर्मूला लागू होने के बाद से राजनैतिक प्रतिस्पर्धा पार्टी के अंदर तो फिलहाल थमी हुई नजर आ रही है। लेकिन पंजाब का घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात ये हैं कि पंजाब का घमासान देहरादून तक पहुंचने लगा है।
देहरादून तक पहुंचा पंजाब का विवाद
बतौर प्रदेश प्रभारी हरीश रावत से मिलने कुछ नाराज विधायक देहरादून आ पहुंचे। जिसके बाद हरीश रावत को नाराज विधायकों से मिलना भी पड़ा। इतना ही नहीं हाईकमान तक नाराज विधायकों की आवाज पहुंचाने का वादा करना पड़ा जिसके बाद नाराज विधायक शांत हुए। अब हरीश रावत दिल्ली मेें हाईकमान से मिलकर पूरी रिपोर्ट सौंपने जा रहे हैं। लेकिन इससे पहले हरीश रावत ने मीडिया के सामने अपने दिल की बात रखते हुए पंजाब के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी से मुक्त होने की बात कर चुके हैं। हरीश रावत का इसके पीछे तर्क उत्तराखंड के चुनाव में पूरी तरह से फोकस करने की बात की है। दरअसल हरीश रावत उम्र के जिस पड़ाव पर हैं ऐसे में उनके लिए ये विधानसभा चुनाव काफी मायने रखता है। साथ ही इस बार हरीश रावत के लिए कांग्रेस की सरकार आने पर सीएम पद पाने की संभावनाएं ज्यादा नजर आ रही हैं। ऐसे में चुनाव अभियान की कमान संभालने के बाद हरीश रावत सीएम पद की कमान संभालने को रणनीति बनाने में जुटे हैं। जिसके लिए हरीश रावत हर तरह के हथकंडे अपना भी रहे हैं। लेकिन पंजाब में चल रहे घमासान को शांत कराने का असर उत्तराखंड की राजनीति पर ना पड़े इसके लिए हरीश रावत उत्तराखंड पर ही फोकस करने की बात कर रहे हैं।
पंजाब का असर उत्तराखंड चुनावों पर भी पड़ेगा
राजनीति के जानकार ये मानते हैं कि पंजाब में चल रहे घमासान को सत्ताधारी बीजेपी चुनाव में मु्द्दा भी बना सकती है। चुनावों तक पंजाब में राजनैतिक उथल पुथल जारी रहेगी जिससे बीजेपी को हरीश रावत और कांग्रेंस पर हमला करने का मौका मिलेगा। जिससे हरीश रावत की इमेज पर चुनाव में असर पड़ सकता है। हरीश रावत 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। ऐसे में हरीश रावत चुनाव से पहले हर तरह के विवाद से दूर रहने की कोशिश कर रहे हैं। हरीश रावत के दिल्ली दौरे को लेकर हरीश रावत के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि हरीश रावत दिल्ली जाकर हाईकमान के सामने सभी बिंदुओं को रखने गए हैं। हरीश रावत के उत्तराखंड चुनाव पर पूरी तरह से फोकस करने के सवाल पर सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि हरीश रावत की कर्मभूमि और जन्म भूमि उत्तराखंड है। ऐसे में हरीश रावत के लिए उत्तराखंड सबसे पहले है। वे पार्टी के हर नेता के पीछे खड़े हैं।












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