गढ़रत्न नेगी दा ​को राष्ट्रपति करेंगे संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, जानिए उनके बारे में सबकुछ

नेगी दा को कल संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जाएगा

देहरादून, 8 अप्रैल। गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी नेगी दा को कल संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जाएगा। राष्ट्रपति लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी समेत 44 हस्तियों पुरस्कृत करेंगे। इसके साथ ही 12 अप्रैल को नेगी दा अपने साथी कलाकारों के साथ राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के सामने अपने लोकगीतों की प्रस्तुति भी देंगे।

 President will be honored with the Sangeet Natya Akademi Award to Gadratna Negi Da, know everything about him

वर्ष 2018 के लिए यह पुरस्कार
लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को कल प्रतिष्ठित संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद नेगी दा समेत 44 अन्य हस्तियों को यह पुरस्कार प्रदान करेंगे। पुरस्कार के रूप में उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि, अंगवस्त्र और ताम्रपत्र दिया जाएगा। नरेंद्र सिंह नेगी को वर्ष 2018 के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा कला और साहित्य जगत की 44 अन्य हस्तियों को भी यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

उत्तराखंड के राज्य गीत को भी नरेंद्र सिंह नेगी ने ही आवाज दी

नेगी दा उत्तराखंड मशहूर लोक गीतकारों में से एक है। उनकी श्री नेगी नामक संस्था उत्तराखण्ड कलाकारो के लिए एक लोकप्रिय संस्थाओं मे से एक है। नरेंद्र सिंह नेगी मूल रूप से पौड़ी जिले के ​हैं जो कि 12 अगस्त 1949 को जन्में थे। नेगी ने अपने म्यूजिक कॅरियर की शुरुआत गढवाली गीतमाला से की थी और यह "गढवाली गीतमाला" 10 अलग-अलग हिस्सों में थी। नेगी की पहली एल्बम का नाम बुरांस रखा गया, जो कि पहाड़ों में पाया जाने वाला एक जाना माना एवं सुंदर सा फूल है। इसके बाद ये सि​लसिला चलता रहा। अब तक वे हजार से भी ​अधिक गानों को आवाज दे चुके हैं। नरेंद्र सिंह नेगी लोककलाकार के साथ ही लेखक और कवि भी हैं। उनकी अब तक 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। नेगी की पहली पुस्तक "खुच कंडी " उनकी दुसरी पुस्तक "गाणियौं की गंगा, स्यणियौं का समोदर" उनकी तीसरी पुस्तक मुठ बोटी की राख शामिल हैं। इसके अलावा उनके चर्चित राजनीतिक गीत 'नौछमी नारेणा' पर 250 पृष्ठों की एक क़िताब 'गाथा एक गीत की: द इनसाइड स्टोरी ऑफ नौछमी नारेणा' 2014 में प्रकाशित हो चुकी है और काफी चर्चित रही है। कुछ सालों पहले जब टिहरी बांध के टूटने कारण टिहरी नगर पानी में डूब गया था तब नेगी जी ने एक शोकगीत और उत्तराखण्ड राज्य के अलग होते समय भी एक ओज भरा आंदोलन गीत गाया था। उत्तराखंड के राज्य गीत को भी नरेंद्र सिंह नेगी ने ही आवाज दी है।

75 वर्ष पूरे कर रहे नेगी अब भी सक्रिय

नरेन्द्र सिंह नेगी के जन्म दिवस के मौके पर हाल में एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें उनके जीवन दर्शन पर आधारित पुस्तक "सृजन से साक्षात्कार" भी लांच की गई। इस मौके सीएम पुष्कर सिंह धामी ने नेगी के लिए पद्म पुरस्कार की अनुशंसा संबंधी बात कही। उम्र के 75 वर्ष पूरे कर रहे नेगी अब भी सक्रिय है।नेगी दा राजनीतिक, सामाजिक, पहाड़ की पीड़ा समेत सभी विषयों पर अपने गीत के माध्यम से ​जनता को जागरुक करते रहे हैं। नौछमी नारायण गीत के बाद नेगी दा की ख्याति एक ऐसे गायक के रूप में होने लगी थी, जो कि सरकार को जगाने में अहम भूमिका रखते हैं। इसके बाद नेगी दा कांग्रेस हो या भाजपा हर सरकार के गलत कार्योें के जरिए सामने लाने का प्रयास किया।

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