25 साल की उम्र में श्रुति के रिकॉर्ड की कहानी,10 हजार की साइकिल यात्रा और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की ठानी
Motivational story: उत्तराखंड के सीमांत उत्तरकाशी जिले के गोरशाली गांव की श्रुति रावत ने मात्र 25 साल की उम्र में ही इंडिया व एशिया बुक आफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा लिया है। श्रुति रावत को यह सम्मान करीब दस हजार किलोमीटर की साइकलिंग यात्रा कर महिला सशक्तीकरण व पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दिया गया है।
श्रुति ने अपनी साइकिल यात्रा के दौरान भारत के आठ राज्यों व नेपाल सहित उच्च हिमालय दरों व विश्व की सबसे ऊंची झील को भी साइकिल से पार किया था। इसके अलावा उन्होंने 2 हजार किमी की साइकिल यात्रा 2022 में प्रकृति को बचाने के संकल्प के साथ प्रख्यात पर्यावरणविद् व पद्मभूषण अलंकरण से सम्मानित डा. अनिल प्रकाश जोशी के साथ की थी।

वर्तमान में श्रुति धार क्षेत्रीय विकास संस्थान के साथ पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि क्षेत्र में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने व जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही हैं। श्रुति सगन्ध एवं औषधीय पौधों रोजमेरी, डेंडिलियौन, लैवेंडर के उत्पादन पर कार्य कर रही हैं।
यह पौधे पर्वतीय क्षेत्रों की विषम परिस्थितियों जैसे सिंचाई का अभाव, जंगली जानवरों से नुकसान व मौसम के बदलाव आदि के प्रतिकूल प्रभाव को झेल सकते हैं, जिससे कि पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों को इसकी खेती करने में आसानी व अच्छा रोजगार उत्पन्न हो रहा है।
श्रुति का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। पहाड़ के छोटे से गांव में जन्मी श्रुति ने बचपन से ही कुछ अलग करने की ठानी। जिसमें माता कुसुम और पिता सतीश रावत ने बेटी का पूरा सहयोग किया और उसके सपनों को पंख लगाने में हर कदम साथ दिया।
श्रुति ने साइकिलिंग के साथ ही पहाड़ों में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की भी ठानी और मशरूम उत्पादन के अलावा खेती बाड़ी और किसानी में भी मेहनत कर सफलता हासिल कर दूसरों के लिए प्रेरणा बनीं। आज श्रुति शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए बीएड कर रही हैं। उनके पति आईटीबीपी में तैनात हैं। श्रुति का कहना है कि वे आगे भी इसी तरह अपने पहाड़ खासकर महिलाओं के लिए काम करते रहना चाहती हैं।












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