लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने वालों के लिए ये है निर्वाचन विभाग की तैयारी, ऐसे मनाएंगे
लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही कई गांव और इलाकों के मतदाता वोट के बहिष्कार की चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में इन मतदाताओं को मनाने का जिम्मा भी निर्वाचन आयोग को ही है। लोकसभा चुनाव के दौरान व्यवस्था से नाराज मतदाता भी मतदान केंद्र तक पहुंचें, इसके लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जिलाधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।

चुनाव के दौरान अपनी मांगें पूरी न होने से नाराज कई लोग वोट न देने का ऐलान कर प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा देते हैं। इससे चुनाव पर भी असर पड़ता है। सड़क, पानी, बिजली जैसी सुविधांओं से नाराज होकर ग्रामीण या लोग चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर रहे हैं। ऐसे में इन मतदाताओं को मुख्य धारा में जोड़कर मतदान के पर्व में शामिल करने की चुनौती है।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि जहां मतदाता तंत्र की कार्यप्रणाली से नाराज हैं, वहां जिलाधिकारी उनसे संवाद कर समस्या का समाधान करने का प्रयास करेंगे। यदि किसी तकनीकी कारण के चलते समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है तो उस संबंध में भी उन्हें जानकारी दी जाए। साथ ही उन्हें मतदान करने के लिए भी प्रेरित किया जाए।
निर्वाचन आयोग ने इस वर्ष मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर जोर दिया है। लक्ष्य इस बार 75 प्रतिशत मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाना है। बीते पांच वर्षों में मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। इस वर्ष 5,55,784 नए सामान्य मतदाता बने हैं।
देहरादून के डोईवाला और सहसपुर में कई ग्रामीणों ने वोट के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। यहां सड़क की मांग पूरी न होने को लेकर लंबे समय से लड़ाई चल रही है। अब पहाड़ से भी ये खबरें सामने आने लगी है। चमोली के कर्णप्रयाग के किमोली और पारतोली के ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। ग्रामीणों ने गांव में सड़क नहीं तो वोट नहीं के पोस्टर लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि जनप्रतिनिधियों को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा।












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