जानिए, धामी को दोबारा 'कैप्टन' बनने का सफर, कैसे निशंक,बलूनी और भगतदा की जोड़ी ने किया कमाल
सीएम बनाने में निशंक, बलूनी और कोश्यारी का रहा अहम रोल
देहरादून, 21 मार्च। उत्तराखंड में सारे मिथक तोड़कर पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर प्रदेश की कमान संभालने जा रहे हैं। धामी को दोबारा कैप्टन चुनने में पार्टी को 10 दिन का वक्त लगा है। जिसमें धामी के मास्टरस्ट्रोक से सभी चित्त हो गए। हालांकि धामी को कैप्टन बनवाने के पीछे तीन बड़े चेहरों की अहम भूमिका रही है। जिनमें पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और महाराष्ट्र के गर्वनर भगत सिंह कोश्यारी का अहम रोल रहा है। जो कि देहरादून से दिल्ली तक लगातार लॉबिंग में जुटे रहे और हाईकमान को ये विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि धामी ही बेहतर कैप्टन हो सकते हैं। जानते हैं कैसे टीम को जीताकर खुद हारने वाले धामी दोबारा कैप्टन कैसे चुने गए।

कैप्टन बनने के लिए आसान नहीं थी राह
पुष्कर सिंह धामी पर केन्द्रीय नेतृत्व ने ऐसे समय में भरोषा जताया था, जब चुनाव के लिए मात्र 6 माह का समय बचा हुआ था। धामी ने विपरीत परिस्थितियों में भी शानदार परफोर्मेंस देकर मोदी, शाह के सामने खुद को प्रुफ कर दिया। लेकिन पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती तब सामने आई जब धामी खटीमा से अपना ही चुनाव हार गए। इस बीच दूसरा खेमा एक्टिव होकर विधायकों में से ही मुख्यमंत्री चुनने की मांग करने लगा। जिसमें धन सिंह रावत, सतपाल महाराज और ऋतु खंडूरी भूषण का नाम रेस में लिया जाने लगा। मुख्यमंत्री की रेस में दूसरे नाम सामने आते ही देहरादून से लेकर दिल्ली तक लॉबिग शुरू हो गई। जिसमें पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, केन्द्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट और राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी भी एक्टिव हो गए। इस दौरान निशंक और बलूनी भले ही खुद मुख्यमंत्री की रेस में रहे हों लेकिन दिल्ली में हाईकमान की पसंद को भांपकर वे धामी के पक्ष में खड़े हो गए। इस बीच धामी के राजनीतिक गुरू और पहली बार धामी को मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले महाराष्ट्र के गर्वनर भगत सिंह कोश्यारी भी दिल्ली में सक्रिय हो गई। जिस वजह से पुष्कर सिंह धामी का कैप्टन बनने का रास्ता साफ हो गया। सोमवार को जब विधानमंडल दल की बैठक के लिए पुष्कर सिंह धामी पहुंचे तो उनके साथ पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक एक ही कार में पहुंचे और बैठक में हर समय साथ ही नजर आए।
दिल्ली में धामी के नाम पर बनी सहमति
दिल्ली में अमित शाह से लेकर जेपी नड्डा की मुलाकात में अनिल बलूनी हर समय धामी के साथ खड़े नजर आए। जिससे साफ है कि धामी को कैप्टन बनाने के पीछे इन त्रिमूर्ति का ही हाथ रहा है। जो कि धामी के कैप्टन बनने तक उनके साथ खड़े रहे। दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के घर में बैठक के बाद जिस तरह धामी के अंदर विश्वास झलकने लगा उससे साफ हो गया कि धामी ने फिर से मैदान मार लिया है। इसके बाद एक बार फिर निशंक ने अपने आवास पर सभी सीनियर नेताओं को बुलाकर रायशुमारी की और धामी के चुने जाने का रास्ता फिर से साफ हो गया। पार्टी हाईकमान ने पर्यवेक्षक के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को चुना जो कि पहले ही धामी को धाकड़ और फ्लावर नहीं फायर कह चुके थे, इस तरह धामी को हर तरफ से सीनियर नेताओं का साथ और आशीर्वाद मिलता रहा और उन्होंने साबित कर लिया कि वे राजनीति के मैदान के धाकड़ बल्लेबाज और कैप्टन साबित हो गए हैं।












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