आखिरी ओवर में उतरने के बाद भी पुष्कर सिंह धामी कैसे बने धाकड़ बल्लेबाज, ये हैं 10 सबूत

राजनाथ सिंह ने क्‍यों कहा उत्तराखंड आकर कहा कि सीएम धामी को कहा धाकड़ बल्लेबाज

देहरादून, 2 अक्टूबर। करीब 6 माह के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनाए गए पुष्कर सिंह धामी को हाईकमान ने भी धाकड़ मान लिया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ने उत्तराखंड आकर कहा कि धामी धाकड़ बल्लेबाज हैं, इसलिए उन्हें आखिरी ओवर में उतारा गया। राजनाथ सिंह ने इसे लेकर एक ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा, 'क्रिकेट की भाषा में अगर कहूं तो 20-20 के मैच में धामी जी को आखिरी ओवर में उतारा गया है। धामी जी काफी धाकड़ बल्लेबाज हैं। उन पर उत्तराखंड के लोगों की बहुत सारी उम्मीदें टिकी हुई हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि वे इन उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।' कहा कि मैं पुष्कर सिंह धामी को उनकी छात्र राजनीति के दिनों से जानता हूं। उनके पास ऊर्जा है, क्षमता है और बहुत कुछ कर गुजरने का जज्बा भी है। चुनाव से पहले जिस तरह से भाजपा ने साढ़े 4 साल के अंदर 3-3 मुख्यमंत्री बदल दिए, उससे विपक्ष हमलावर हो रहा था, लेकिन अब धामी की धाकड़ पारी से भाजपा की नैया पार होने की उम्मीद है। धामी की 10 बड़ी बातों से समझते हैं कि वे कैसे 3 माह में ही धाकड़ बन गए।

सीएम नहीं खुद को मुख्य सेवक बताकर ​जीता लोगों का दिल

सीएम नहीं खुद को मुख्य सेवक बताकर ​जीता लोगों का दिल

बीजेपी शासन के साढ़े 4 साल में तीसरे मुख्यमंत्री के तौर पर 4 जुलाई को पुष्कर सिंह धामी ने शपथ ली। शपथ लेने के बाद से पुष्कर सिंह धामी ने खुद को जनता का मुख्य सेवक बनकर सेवा करने की बात की। इससे धामी जनता के बीच में मुख्यमंत्री आवास तक आम लोगों की पहुंच को उन्होंने सरल कर दिया। जिससे लोगों में नई उम्मीद जगी है। इतना ही नहीं सीएम हर कार्यक्रम में हल्के फुल्के माहौल और हंसी के जरिए भी लोगों के दिल में जल्दी जगह बनाने में कामयाब हुए।

 युवा सीएम, युवाओं को सौगात

युवा सीएम, युवाओं को सौगात

युवा सीएम के तौर पर धामी ने अपनी छवि के अनुरूप ही फैसले लेने शुरु किये। सबसे पहले युवाओं के लिए रोजगार देने और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सीएम ने 22 हजार पदों पर नियुक्ति देने का ऐलान किया। इसके बाद कोविड में अपनों को खो चुके बच्चों के लिए सीएम ने वात्सल्य योजना लाकर धामी ने ऐसे असहाय बच्चों को सहारा और सुरक्षा देने का सरकार ने काम किया है। युवाओं के बीच सीएम की छवि पुराने मुख्यमंत्रियों की तुलना में बिल्कुल अलग है।

न फैसले बदले, न जुबान ​फिसली

न फैसले बदले, न जुबान ​फिसली

धामी को 6 माह की पारी खेलने का मौका मिला है। ऐसे में 6 माह में धामी को बीजेपी सरकार के साढ़े 4 साल की छवि जिसमें पूर्ववर्ती सरकार के लिए गए विवादित फैसलों को लेकर भी जनता के सामने इमेज बदलने की चुनौती है। इसके साथ ही 6 माह में अपनी सरकार के कार्यों को धरातल पर उतारने का टारेगट है। धामी ने 2 माह में न तो पूर्ववर्ती सरकार के किसी फैसले को बदला है और नहीं उनकी ​जुबान फिसली है।

 राज्य कर्मचारियों की समस्या को फ्रंटफुट में कर रहे बैटिंग

राज्य कर्मचारियों की समस्या को फ्रंटफुट में कर रहे बैटिंग

पुष्कर सिंह धामी ने सीएम बनते ही राज्य कर्मचारियों को साधने का काम किया है। सीएम कर्मचारियों से खुद मिलकर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं। जिससे कर्मचारियों में उनके प्रति विश्वास बढ़ा है। कर्मचारी भी मानते हैं कि धामी पहले सीएम हैं जो सीधे और सरल तरीके से सबसे मिल रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में 11 फीसदी की बढ़ोतरी का ऐलान कर वे पहले ही कर्मचारियों को खुश करने में कामयाब हुए हैं।

 विवाद नहीं सीधे निर्णय लेने में माहिर

विवाद नहीं सीधे निर्णय लेने में माहिर

त्रिवेंद्र रावत सरकार के समय से चल रहे उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के विवाद को धामी ने बड़ी चतुराई से निपटा लिया। बोर्ड के अध्यक्ष पद से शमशेर सिंह सत्याल को हटाना और बोर्ड के सचिव से मधु नेगी चौहान को भी हटाकर धामी ने दोनों गुटों को साफ संदेश दे दिया कि पार्टी में किसी तरह की गुटबाजी हावी नहीं होने ​दी जाएगी। इससे त्रिवेंद्र और ​हरक दोनों को संदेश भी दिया है।

 नाराज यशपाल के साथ ब्रेकफोस्ट डिप्लोमेसी

नाराज यशपाल के साथ ब्रेकफोस्ट डिप्लोमेसी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिं​ह धामी को जैसे ही इस बात की खबर लगी कि कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य पार्टी और उनकी सरकार से नाराज हैं तो धामी ने तुरंत यशपाल आर्य के घर पहुंचकर सबको चौंका दिया। पार्टी में अंदरखाने यशपाल के कांग्रेस में जाने की चर्चाओं के बीच आर्य के साथ ब्रेकफास्ट करना एक नई पहल थी।

गुटबाजी नहीं सबके खास

गुटबाजी नहीं सबके खास

पुष्कर सिंह धामी के साथ कोई विधायक या मंत्री आसपास बार-बार नजर नहीं आता है। इससे साफ है कि वे अपने साथियों को ये संकेत दे चुके हैं कि सीएम के आसपास रहने से छवि नहीं बनती, क्षेत्र में रहकर छवि बनती है। यही कारण है कि कोई भी मंत्री या विधायक उनका खास नहीं माना जात रहा है। धामी जहां जाते हैं उसी क्षेत्र के मंत्री और विधायक के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

नौकरशाही पर लगाम, तबादलों में दिख रही धमक

नौकरशाही पर लगाम, तबादलों में दिख रही धमक

सीएम पुष्कर सिंह धामी चेहरे के हाव भाव से नहीं अपनी कलम और कार्यशैली से फैसले ले रहे हैं। धामी के कार्यकाल में नौकरशाही पूरी तरह से नए रंग और कलेवर में नजर आ रही है। मुख्य सचिव पर एसएस संधू को लाना उनके सबसे पहले और बोल्ड डिसीजन में से एक था, जिसके बाद से वे लगातार नौकरशाही के तबादलों में ​लगातार फैसले ले रहे हैं।

देवस्थानम और भू कानून पर बड़ा फैसला

देवस्थानम और भू कानून पर बड़ा फैसला

भाजपा के लिए चुनाव में देवस्थानम और भू कानून का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जिसको लेकर पार्टी को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। ऐसे में सीएम बनते ही धामी ने इन सभी मुद्दों पर हाईपॉवर कमेटी बनाकर दोनों मसलों पर पार्टी की खराब होती छवि को काफी हद तक सुलझाने की कोशिश की है। इतना ही नहीं इन मुद्दों से जुड़े लोगों की भावनाओं को भी धामी बातचीत के जरिए सुलझाने में लगे हैं।

सिर्फ फैसले नहीं धरातल पर काम

सिर्फ फैसले नहीं धरातल पर काम

पुष्कर सिंह धामी बतौर सीएम सिर्फ घोषणाएं नहीं कर रहे हैं। वे पहले घोषणाओं से संबंधित बजट और उसका पूरा होमवर्क कर रहे हैं। जिससे घोषणा होते ही उस पर काम हो पाए। कोविड की वजह से पर्यटन रोजगार सेक्टर बर्बाद हुआ तो धामी ने पैकेज का ऐलान किया। जिसकी धनराशि लोगों को मिलने लगी है। धामी के हर भाषण में इस बात का जिक्र है कि जो घोषणाएं वे कर रहे हैं, उनका लोकार्पण भी वे खुद ही करेंगे।

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