कांग्रेस के लिए गुड न्यूज, हो गया डेमेज कंट्रोल, बगावती तेवर दिखाने वाले विधायकों के बदले सुर

नाराज विधायकों की अब तक बैठक न होने से लगाए जा रहे कयास

देहरादून, 15 अप्रैल। उत्तराखंड कांग्रेस में मचा घमासान अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। जिससे कांग्रेस के अंदर हुए बवाल को लेकर अब डेमेज कंट्रोल के कयास लगाए जा रहे हैं। जिस तरह के तेवर नए प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने दिखाए हैं, उससे साफ लग रहा है कि हाईकमान अब किसी भी तरह का रोलबैक के मूड में नहीं है। साथ ही नाराज विधायकों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। जिसके बाद नाराज विधायकों की प्रस्तावित बैठक भी नहीं हो पा रही है।

नाराज विधायकों की अब तक नहीं हुई बैठक

नाराज विधायकों की अब तक नहीं हुई बैठक

प्रदेश में करारी हार के बाद कांग्रेस को सही ट्रेक पर ले जाने के लिए हाईकमान ने एक नया प्रयोग किया है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष, उपनेता प्रतिपक्ष का जिम्मा भी नए समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों पर दांव खेला है। जिसके बाद से कांग्रेस में बगावती तेवर ​देखने को मिल रहे हैं। लेकिन जिस तरह से अब तक बगावती तेवर दिखाने वाले विधायकों ने कोई ​मीटिंग नहीं की नहीं हरीश धामी को छोड़कर किसी ने बगावती तेवर दिखाए हैं,उससे साफ है कि नाराज विधायकों ने अब कदम पीछे खींच लिया है। देहरादून से दिल्ली दौड़ लगाने के बाद विधायक अब वापस क्षेत्रों में जाने ​की तैयारी में हैं।
प्रदेश में करारी हार के बाद कांग्रेस को सही ट्रेक पर ले जाने के लिए हाईकमान ने एक नया प्रयोग किया है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष, उपनेता प्रतिपक्ष का जिम्मा भी नए समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों पर दांव खेला है। जिसके बाद से कांग्रेस में बगावती तेवर ​देखने को मिल रहे हैं। लेकिन जिस तरह से अब तक बगावती तेवर दिखाने वाले विधायकों ने कोई ​मीटिंग नहीं की नहीं हरीश धामी को छोड़कर किसी ने बगावती तेवर दिखाए हैं,उससे साफ है कि नाराज विधायकों ने अब कदम पीछे खींच लिया है। देहरादून से दिल्ली दौड़ लगाने के बाद विधायक अब वापस क्षेत्रों में जाने ​की तैयारी में हैं।

पहले ही दिन से हाईकमान का तेवर सख्त

पहले ही दिन से हाईकमान का तेवर सख्त

इस प्रकरण में पहले ही दिन से हाईकमान का तेवर सख्त नजर आ रहा है। नए प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का तेवर भी इसी से जोड़ा जा रहा है। करन माहरा से साफ कर दिया कि जो भी नाराजगी है वो एक उचित प्लेटफॉर्म पर कहनी होगी। इतना ही नहीं सख्त तेवर दिखाने वाले विधायकों ने उन्होंने हिदायत दी कि वे पार्टी के सिंबल पर जीते हैं, उन्हें इस बात का ध्यान देना चाहिए। इसके बाद किसी भी विधायक की नाराजगी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। धारचूला विधायक हरीश धामी ने ही खुलकर अपना नाराजगी जताई है। धामी ने प्रदेश प्रभारी और हाईकमान पर सवाल खड़े किए। इतना ही नहीं धामी ने सीएम पुष्कर सिंह धामी के लिए सीट छोड़ने की तक पेशकश कर दी। जिससे अनुशासनहीनता मानी जा रही है। कांग्रेस हाईकमान इस पर भी जल्द कोई ​फैसला ले सकता है।

दलबदल का कानून का भी है डर

दलबदल का कानून का भी है डर

खास बात ये है कि जिन नाराज विधायकों के नाम लिए जा रहे थे, उनमें से मनोज तिवारी और विक्रम सिंह नेगी ने नाराजगी को लेकर मीडिया में अब तक कोई बयान नहीं दिया है। मनोज तिवारी ने कहा है कि धारचूला विधायक हरीश धामी के कांग्रेस पार्टी से बगावती सुर के बीच अल्मोड़ा विधायक ने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के एक कर्मठ सिपाही है और संगठन की मजबूती के लिए कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मैं नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में जरूर था। लेकिन अब हाईकमान ने निर्णय ले लिया है तो कोई मनभेद व मतभेद नहीं है। विक्रम सिंह नेगी ने भी सिर्फ गढ़वाल के नेताओं की नाराजगी का मुद्दा उठाया है। ऐसे में साफ है कि जिन 10 नाराज नेताओं के नाम लिए जा रहे थे, उनमें हरीश धामी को छोड़कर किसी ने भी खुलकर नाराजगी नहीं जताई है। साथ ही जो नाराज विधायकों की बैठक की चर्चा थी उस पर भी फिलहाल विराम लगता हुआ नजर आने लगा है। ऐसे में साफ माना जा रहा है कि नाराज विधायकों की प्रेशर पॉलिटिक्स का फिलहाल कोई असर होता हुआ नजर आ रहा है। इसके पीछे की वजह 13 से कम विधायकों पर लटक रहा दलबदल का कानून भी माना जा रहा है। लेकिन ये बवाल कब तक थमा हुआ रहता है, ये भी कहना अभी आसान नहीं होगा।

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