उत्तराखंड के 22 साल के इतिहास में पहली बार ​आईएएस सलाखों के पीछे, 14 दिन की रिमांड, अब पत्नी से पूछताछ संभव

सस्पेंड आईएएस रामविलास यादव 14 दिन की 14 दिन की रिमांड पर

देहरादून, 24 जून। उत्तराखंड के 22 साल के इतिहास में पहली बार ​किसी आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी और जेल जाने के प्रकरण से नौकरशाही में हड़कंप मचा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भ्रष्ट्राचार पर बड़ा एक्शन माना जा रहा है। सीएम ने पहले ही आईएएस रामविलास यादव को सस्पेंड कर सख्त संदेश दे दिया था। अब विजिलेंस ​की करीब 13 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद आईएएस रामविलास यादव को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। विजिलेंस अब यादव की पत्नी से पूछताछ कर सकती है।

 For the first time in the 22-year history of Uttarakhand, IAS behind bars, remand for 14 days

ढ़ाई साल बाद विजिलेंस के सामने आए
बुधवार को राम विलास यादव करीब ढाई साल के बाद विजिलेंस के सामने पेश हुए थे। विजिलेंस डायरेक्टर अमित सिन्हा ने बताया कि उन्होंने विजिलेंस अफसरों के किसी भी सवाल का सही जवाब नहीं दिया। करीब 13 घंटे की पूछताछ के बाद बुधवार रात 2.15 बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार शाम करीब साढ़े पांच बजे विजिलेंस कोर्ट में यादव को पेश किया गया। उनके वकीलों ने ज्यूडिशियल कस्टडी रिमांड का विरोध किया। लेकिन, विजिलेंस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट ने यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट परिसर से हिरासत में लेकर उन्हें सुद्धोवाला जेल ले जाया गया।

कौन है रामविलास यादव
रामविलास यादव पहले यूपी में कार्यरत थे। जो कि 2017 में उत्तराखंड आए। इसके बाद यूपी सरकार ने उनके खिलाफ जांच कराने की संस्तुति कर दी थी। ढाई साल बाद विजिलेंस यादव तक पहुंच पाई। इससे पहले विजिलेंस ने यादव के सभी ठिकानों पर दबिश कर जरुरी दस्तावेज जुटाए। राम विलास यादव पर अपनी आय से 500 गुना अधिक संपत्ति होने का आरोप हैं। वे कृषि विभाग में अपर सचिव पद पर तैनात थे। विजिलेंस डायरेक्टर ने बताया कि यादव से करीब 300 सवाल किए, जिनमें से केवल 10 फीसदी ही सवालों के जवाब यादव ने दिए। विजिलेंस ने कोर्ट में भी यादव को अरेस्ट करने के पीछे कारण जांच में सहयोग न होना बताया है। इसके बाद अब यादव की पत्नी से पूछताछ की जाएगी। जिसके बाद कुछ और मामले में सामने आ सकते हैं। बता दें ​कि यादव इसी माह रिटायर होने वाले थे। लेकिन उससे पहले ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया और अब उत्तराखंड के इतिहास में जेल जाने वाले वो पहले आईएएस अफसर बन गए हैं। हालांकि इस पूरे प्रकरण पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है।
ये है पूरा प्रकरण
अप्रैल 2022 में यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। विजिलेंस ने गत वर्ष सितंबर में अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। आरोप है कि रामविलास यादव के पास उनके ज्ञात आय के स्रोतों से 500 फीसदी से अधिक संपत्तियां हैं। मुकदमे के बाद विजिलेंस ने उनके लखनऊ, गाजीपुर और देहरादून स्थित आवासों पर छापे मारे। इसके बाद रामविलास यादव हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। आखिरकार बुधवार को वे विजिलेंस के सामने पेश हुए, जहां से वे गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

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