उत्तराखंड के वन मंत्री के इस कदम से अफसरशाही मेंं मचा हड़कंप, पहले दिए थे संकेत, अब होने वाली है कार्रवाई
दो आईएफएस अफसरों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सिफारिश की फाइल तैयार
देहरादून, 9 अप्रैल। उत्तराखंड में धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री लगातार अधिकारियों पर पेंच कसने में जुटे हैं। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने तो एक कदम आगे बढ़ाते हुए दो आईएफएस अफसरों को घर बैठाने की भी तैयारी कर दी है। अधिकारियों पर अवैध कटान और दूसरी तमाम शिकायतों के बाद वन मंत्री सुबोध उनियाल की ओर से इन अफसरों की फाइल तैयार कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सिफारिश के साथ सीएम को भेज दी गई है। वन मंत्री के इस कदम से नौकरशाही में हड़कंप मचा हुआ है। वन मंत्री का कामकाज संभालते ही सुबोध उनियाल ने सबसे पहले भ्रष्ट्राचार पर कड़ा प्रहार करने की बात कहते हुए ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करने की बात की थी। इतना ही नहीं ऐसे अधिकारियों की फाइल भी तलब की थी।

पद संभालते ही तलब की थी फाइलें
सरकार के गठन के बाद से ही वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सबसे पहले भ्रष्ट्राचार पर कड़ा प्रहार करने की बात की थी। वन मंत्री ने विभाग के लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसने का भी दावा किया था। विवादों से नाता रखने वाले और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों के लिए वन मंत्री ने ऐसे अफसरों की काम से छुट्टी तय करने के संकेत दिए थे। इसे लेकर सबसे पहले वन मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रदेश के अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन के साथ बैठक की भी। जिसमें साफ हो गया था कि ऐसे अफसरों को वीआरएस लेना ही होगा। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि भ्रष्ट और अन्य मामलों में जिन अधिकारियों की संलिप्तता है वो अपना वीआरएस अवश्य ले लें नहीं तो विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार रहें। विभाग में भ्रष्टाचार किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उसी दौरान वन मंत्री ने ऐसे तमाम अधिकारियों की फाइल भी तलब कर ली। जिसके बाद अब एक्शन भी शुरू हो गया है। वन मंत्री के इस कदम से नौकरशाही में हड़कंप मचा हुआ है।
सीएम समेत सभी मंत्री एक्शन में
बीते दिनों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत मंत्रियों ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, जो कि काम सही तरह से नहीं कर रहे हैं। खुद मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को सुधरने की हिदायत दी थी। सीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा है जनता के काम के लिए वे न तो खुद चेन से सोएंगे नहीं अधिकारियों को चेन से सोने देंगे। सीएम ने अधिकारियों को टाइमिंग और कार्यशैली में भी बदलाव लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके पीछे सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति मानी जा रही है। सीएम की तरह मंत्रीमंडल भी लगातार अधिकारियों के खिलाफ एक्शन मोड में है। जिसकी वजह नौकरशाही का बेलगाम होना है। इसी तरह समाज कल्याण, परिवहन मंत्री चंदनराम दास ने भी एक्शन लिया। जब बिना मंत्री के संज्ञान के अधिकारियों ने डिपो के विलय की फाइल चलाई। मंत्री ने अधिकारियों को लेकर सख्त एक्शन लेने की बात की है। हालांकि वन मंत्री के सख्त एक्शन को लेकर कुछ लोगों ने इसे सुबोध उनियाल ने धामी सरकार से नाराजगी से भी जोड़ना शुरू कर दिया है। जो कि दावा कर रहे हैं कि सुबोध को मनपसंद विभाग न मिलना और पहले से उनका कद कम हुआ है। जिस वजह से सुबोध उनियाल सख्त नजर आ रहे हैं।












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