देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस वे पर बनेगा एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर, जानिए कब होगा बनकर तैयार
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर बनने जा रहा है। एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ घने जंगल के हिस्से में वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। यही वजह है कि इसका कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है।

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर बनने जा रहा है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य 2024 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। इस एक्सप्रेस-वे के बनने के बाद दिल्ली से दून तक का सफर केवल ढाई घंटे में पूरा हो जाएगा।
करीब 20 किलामीटर का इलाका
देहरादून से उत्तर प्रदेश के गणेशपुर तक का पूरा क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र के तहत आता है। जो कि करीब 20 किलामीटर का इलाका है। एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ घने जंगल के हिस्से में वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। यही वजह है कि परियोजना में 12 किमी हिस्सा पिलर डाल कर हवा में बनाया जा रहा, ताकि नीचे से वन्य जीवों की आवाजाही हो सके। केवल सात किमी हिस्से में ट्रैफिक जमीन पर गुजरेगा। दून के आशारोड़ी से डाट काली मंदिर तक 200-200 मीटर के दो एलीफेंट कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। इसकी ऊंचाई सात मीटर होगी। इसके बीच से हाथी भी सड़क के इस पार से उस पार आ जा सकेंगे।
छह छोटे एनिमल अंडर पास भी
एलीफेंट कॉरिडोर का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। इसके अलावा आशारोड़ी से डाट काली मंदिर तक छह छोटे एनिमल अंडर पास भी बनाए जा रहे हैं। इन अंडर पास से बाघ, गुलदार, चीतल और अन्य छोटे वन्यजीव आसानी से आर पार जा सकेंगे। एक्सप्रेस-वे परियोजना में जमीन पर रेंगने वाले सांप बिच्छू और अन्य अति सूक्ष्म जीवों के लिए विशेष तौर पर 12 माइनर अंडर पास बनाए जा रहे हैं, जो बरसात में पानी की निकासी का भी काम करेंगे। आशारोड़ी क्षेत्र में निर्माणाधीन दो एलीफेंट कॉरिडोर के लिए स्थान का चयन देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के तीन साल के अध्ययन के बाद किया गया। इस दौरान संस्थान ने करीब साढ़े तीन किमी हिस्से में कई जगह ट्रैप कैमरा लगाए। जिसके आधार पर ये कॉरिडोर तैयार किए जा रहे हैं।
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